भिवानी। बुल्गारिया के शहर सोफिया 74वें स्ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गांव मिताथल के मुक्केबाज सचिन सिवाच जूनियर (54 किग्रा) को चोटिल होने की वजह से कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। उनका सेमीफाइनल मैच में बुल्गारिया के मुक्केेबाज यासेन रादेव के साथ मुकाबला हुआ। सोमवार को उन्हें चैंपियनशिप में कांस्य पदक देकर सम्मानित किया जाएगा, जिसके बाद वे मंगलवार को भारत के लिए उड़ान भरेंगे।
इस चैंपियनशिप में विश्व के विभिन्न देशों के 398 मुक्केबाजों ने हिस्सा लिया है, जिनमें 256 पुरुष और 142 महिलाएं हैं। यह चैंपियनशिप के इतिहास में अब तक सर्वाधिक है। मुक्केबाज सचिन सिवाच खेल कोटे से भारतीय सेना में बतौर हवलदार के पद पर कार्यरत है। जोकि गांव में ही कोच अनिल टेकराम के मागदर्शन में अभ्यास करते हैं। हालांकि अब वे कैंप में अभ्यास करते हैं। वहीं कांस्य पदक जीतने पर उनके परिजनों, कोच और खेलप्रेमियों ने लड्डू बांटकर एक-दूसरे को बधाई दी है। वहीं मैच के दौरान आंख के नीचे चोट लगने की वजह से वे मैच को पूरा नहीं खेल सकें और चिकित्सकों व कोच के परामर्श पर उन्हें रिंग से बाहर आना पड़ा।
वर्ष 2021 में बने थे यूथ वर्ल्ड चैंपियन
महज 20 वर्षीय सचिन ने वर्ष 2021 में यूथ वर्ल्ड चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। गांधीनगर में हुए नेशनल गेम्स 2022 में सिल्वर, 2022 में हिसार में आयोजित सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड, वर्ष 2022 में जालंधर में हुई ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में गोल्ड सहित राष्ट्रीय स्तर के भी कई पदक उनके नाम हैं। उनके पिता अनिल सिवाच गांव में ही खेतीबाड़ी करते हैं, जबकि मां सुमन देवी गृहिणी है और छोटी बहन नेहा कॉलेज में पढ़ाई करती है।
घर से मैच का लाइव प्रसारण देख रहे थे। सचिन ने पहला राउंड एक तरफा कर दिया था और दूसरे राउंड में भी अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन दूसरे राउंड में उसकी आंख के नीचे चोट लग गई, जिसके कारण सचिन मैच पूरा नहीं कर पाया। अगर चोट नहीं लगती तो सचिन स्वर्ण पदक पर पंच लगाते। कांस्य पदक जीतने पर सचिन को बधाई और आगामी प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए अच्छा अभ्यास करेंगे।
- कोच अनिल टेकराम, मिताथल।