मेडिकल कॉलेज की जगह को लेकर अभी असमंजस की स्थिति है। प्रेम नगर की जगह को सामान्य अस्पताल से ज्यादा दूरी बताकर निरीक्षण करने आई टीम रिजेक्ट कर चुकी है तो शिक्षा बोर्ड की जगह को लेकर भी विवाद है। निरीक्षण करने आई विशेषज्ञों की टीम ने हरियाणा विद्यालय बोर्ड परिसर की 34 एकड़ जमीन को मेडिकल कॉलेज के उपयुक्त बताया था। गत दिवस मिट्टी-पानी की जांच के लिए टीम पहुंची तो बोर्ड अधिकारियों ने उन्हें बोर्ड परिसर से निकाल दिया। स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों ने इस बारे में बातचीत भी की। बोर्ड अधिकारियों का कहना है कि उनसे जमीन संबंधित कोई अनुमति ली गई और न ही जांच के लिए पहुंची टीम के पास कोई अथारिटी लेटर था।
भिवानी में मेडिकल कॉलेज का निर्माण प्रस्तावित है। इसकी घोषणा कांग्रेस सरकार में हुई थी। 29 जुलाई 2017 को हुई भाजपा की स्वास्थ्य शिक्षा विकास रैली में मेडिकल कॉलेज के निर्माण का शिलान्यास किया गया था। प्रेम नगर में चयनित जगह की बाउंड्री वॉल भी हो चुकी है और मिट्टी भराई का कार्य भी। 13 जून को मेडिकल कॉलेज रोहतक के वीसी व अन्य मेडिकल कॉलेजों के डायरेक्टर व अन्य अधिकारियों की टीम ने भी निरीक्षण किया। रोहतक मेडिकल कॉलेज के वाइस चांसलर ओपी कालडा के नेतृत्व में आई टीम ने प्रेम नगर गांव में मेडिकल कॉलेज के लिए चयनित जगह का निरीक्षण किया। टीम ने सामान्य अस्पताल और प्रेम नगर के बीच की दूरी पर आपत्ति जताई। टीम को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 34 एकड़ जमीन मेडिकल कॉलेज के लिए ठीक लगी। टीम ने अपनी रिपोर्ट में कई कारण गिनाए। जिनमें मुख्य रूप से प्रेम नगर से अस्पताल पहुंचने के दौरान मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ अहम था।
पिछले सप्ताह चंडीगढ़ मुख्यालय में हुई बैठक में भी मेडिकल कॉलेज की जगह पर विचार किया गया और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड परिसर की 34 एकड़ जगह को उपयुक्त बताया गया।
इसी के चलते दो दिन से मिट्टी-पानी की जांच करने के लिए एक्सपर्ट टीम भिवानी आई है। टीम ने पहले अस्पताल परिसर और अस्पताल के साथ लगे रेवेन्यू विभाग की जगह से मिट्टी के सैंपल लिए। टीम गत दिवस शिक्षा बोर्ड परिसर पहुंची तो उसे सैंपल लेना तो दूर एंट्री गेट के पास ही वापस कर दिया गया। शिक्षा विभाग अधिकारियों ने कहा कि अभी तक न तो जमीन बाबत उनसे कोई अनुमति ली गई है और न ही किसी प्रकार का पत्र किसी विभाग, प्रशासन की ओर से उनके पास आया है। अधिकारियों का कहना है कि जो जगह मेडिकल कॉलेज के लिए देखी जा रही है, वह खेल का मैदान है। इसलिए इसे लेना उचित नहीं है।
मिट्टी की जांच के लिए टीम आई थी। अस्पताल परिसर से मिट्टी के सैंपल लिए गए हैं। बोर्ड परिसर में भी टीम गई थी मगर वहां सैंपल नहीं लेने दिए गए। इस बारे में अधिकारियों से भी बात करवाई गई थी। अभी इस बारे में उच्च अधिकारी फैसला लेंगे।
डॉ. कृष्ण कुमार, डिप्टी सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग
शिक्षा बोर्ड परिसर में मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए अब तक मुझसे कोई संवाद नहीं किया गया है। किसी विभाग ने उनसे इस बारे में कोई अनुमति नहीं ली है। एक टीम मिट्टी जांच के लिए सैंपल लेने के आई थी, मगर उनके पास कोई अथारिटी लेटर नहीं था। जिससे सैंपल नहीं लेने दिए गए। जिस 34 एकड़ जमीन की बात की जा रही है वह खेल का मैदान है।
डॉ. जगबीर सिंह, चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड