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दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने छेड़ी अंधता के खिलाफ जंग

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आप और हम संस्था के सदस्य डॉ. मदनलाल व गोसाई चन्द्रगिरी। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
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नेत्रहीन के लिए यह रंगीन दुनिया नहीं देख पाना किसी अभिशाप से कम नहीं है। ऐसे ही नेत्रहीन लोगों की जिंदगी में रोशनी लाने का बीड़ा उठाया है दो सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने। ये हैं सेवानिवृत्त जिला प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. मदन लाल पसरीजा और सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ. गोसाई चंद्रगिरी। लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करने ये श्मशानघाट भी पहुंच जाते हैं। अब तक करीब पांच सौ लोगों का नेत्रदान करा चुके हैं।
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इन्हीं का कमला है कि एक रेहड़ी दुकानदार ने अपनी महज 10 दिन की बेटी की आंखें दान की जो पीजीआई रोहतक में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग की जिंदगी में रोशनी लाई। बुजुर्ग आज भी उस 10 दिन की बेटी का शुक्रिया अदा करता है। इतना ही नहीं उनकी प्रेरणा के कारण ही शमशान घाट में एक बुजुर्ग की नेत्रदान की गई। बुजुर्ग सास-बहू ने नेत्रदान किया। दोनों सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने आप और हम नेत्रदान सेवा समिति बनाई है। किसी की भी मौत की सूचना मिलती है तो दोनों कर्मचारी उनके घर पहुंच जाते हैं और उनके परिजनों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करते हैं।
सबसे छोटी बच्ची के नेत्रदान का रिकार्ड
तेलीवाड़ा निवासी रेहड़ी दुकानदार अनिल वर्ष 2014 में बेटी पैदा हुई। पैदा होने के बाद ही बच्ची बीमार थी और कुछ दिन के इलाज के बाद उसकी मौत हो गई। जब डॉ. मदन लाल को इसका पता चला तो वे अनिल से मिलने उसके घर पहुंचे। अनिल और सीमा को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया। जिसके बाद अनिल और सीमा ने अपनी नवजात बच्ची की आंखें दान करने का निर्णय लिया। मरणोपरांत बच्ची का नाम मुस्कान रखा गया। बच्ची की आंखें पीजीआई रोहतक में एक 70 वर्षीय बुजुर्ग को लगाई गई।
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70 वर्षीय नंदलाल की श्मशान घाट में ली गई आंखें
दादरी गेट लाल मस्जिद के नजदीक रहने वाले 70 वर्षीय नंदलाल सरदाना का हृदयाघात से निधन हो गया। उनके बेटे नेत्रदान करने को तैयार हुए। चिकित्सकों की टीम जब तक पहुंची तब तक परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशानघाट लेकर पहुंच चुके थे। जहां ओपन में उनकी आंखें ली गई।
सास-बहू ने किया नेत्रदान
जैन चौक वासी राजरानी का आठ फरवरी 2016 को निधन हो गया। अगले ही दिन नौ फरवरी को पुत्रवधू राजरानी का निधन हो गया। डॉ. मदन लाल की प्रेरणा से परिजनों ने दोनों की नेत्रदान की।
पोती ने किया दादा-दादी का नेत्रदान
आप और हम संस्था की प्रेरणा से ही कोंट रोड वासी युवती रजनी ने अपनी दादी मुन्नी देवी की मौत पर 22 अक्तूबर 2017 और दादा चंद्रपाल गुप्ता के निधन पर 12 अप्रैल 2018 में नेत्रदान करवाया।
सभी नेत्रहीन देख सके दुनिया
आप और हम समिति नेत्रदान सेवा समिति के सदस्य डॉ. मदनलाल पसरीजा और डॉ. गोसाई चंद्रगिरी ने कहा कि श्रीलंका में मृत्यु के बाद सभी नेत्रदान करते हैं। हमारा प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को नेत्रदान के प्रति जागरूक करें ताकि देश के सभी नेत्रहीन लोगों को आंखें मिल सके और वे भी इस दुनिया को देख सके। हम बीते 10 साल से इस मुहिम में लगे हैं।
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