तोशाम। खानक-डाडम स्टोन क्रेशर एसोसिएशन ने खानक पहाड़ में पत्थर बोली को लेकर एचएसआईआईडीसी व खनन कंपनी पर मनमानी का आरोप लगाते हुए पत्थर बोली का बहिष्कार कर दिया। पत्थर में मिट्टी न डालने व तीन लाख टन से ऊपर पत्थर की बोली करने की मांग की है।
खानक-डाडम स्टोन क्रशर एसोसिएशन के प्रधान कृष्ण मलिक, क्रशर मालिक, भीष्म महत्ता, उमेश मंगल, रमेश श्योराण, नरेश जैन, जेपी नीलकंठ व सुनील सहित अन्य ने आरोप लगाया कि एचएसआईआईडीसी की ओर से खानक पहाड़ में बहुत ही कम पत्थर की बोली लगवाई जाती है, ताकि क्रशर मालिकों में प्रतियोगिता हो और पत्थर के रेट आसमान को छुएं ताकि खनन कंपनी को फायदा पहुंचे। जिसका ताजा उदाहरण यह है कि यहां पर प्रतिदिन 2 से 3 लाख टन पत्थर की बोली लगवाई जाती रही है, लेकिन बुधवार को मात्र 85 हजार टन पत्थर की बोली लगवाई गई, जिसमें से सिर्फ पहाड़ में काम करने वाले कंपनी व एचएसआईआईडीसी के आदमियों ने ही मात्र 10 हजार टन पत्थर की बोली लगाई, जिससे अन्य क्रशर मालिकों के साथ-साथ सरकार को भी नुकसान पहुंचाया गया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कम पत्थर की बोली लगवाना एक सोची समझी चाल के तहत किया जाता है, ताकि सभी क्रशर मालिक बोली लगाएं तो रेट आसमान को छुएं और अगर कम पत्थर के कारण क्रशर मालिक बोली न लगाएं तो उनके चहेतों को सबसे कम रेटों में पत्थर मिल सके।
स्टोन क्रशर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि खनन कंपनी द्वारा क्रशर मालिकों को लूटने के लिए पत्थर के साथ गाड़ियों में मिट्टी भरी जा रही है, जिससे क्रशर मालिकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रतिदिन एचएसआईआईडीसी व खनन कंपनी द्वारा कम से कम तीन लाख टन से अधिक पत्थर की बोली लगवाई जाए, ताकि क्रशर मालिकों को पर्याप्त मात्रा में माल और सरकार को पूरी रॉयल्टी मिल सके।
इस मामले में एचएसआईआईडीसी के प्रोजेक्ट मैनेजर संजय फौगाट ने कहा कि विभाग की समझ से बाहर है कि क्रशर मालिकों की समस्या क्या है, मिट्टी न डालने की मांग उठाई थी उसको दूर कर दिया है और एक बार फिर क्रशर मालिकों की बैठक बुलाकर उनकी समस्या को पूछा जाएगा व निवारण किया जाएगा। संवाद