मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर मचे बवाल के बीच जिले के बाढड़ा कस्बे में एक नवविवाहिता महिला ने सैकड़ों साल पुरानी परंपरा बदल दी। हुआ यूं कि देवर के लग्र (टीका) समारोह का मंडप सजा था, ब्राह्मण (पुरोहित) का इंतजार हो रहा था। काफी इंतजार के बाद भी पंडितजी नहीं पहुंचे तो नवविवाहिता ने अपने देवर के लग्र में खुले घूंघट से सारे मांगलिक कार्य संपन्न करवा कर सशक्त नारी की बानगी पेश की।
रविवार को इनेलो अनुसूचित सेल के पूर्व जिलाध्यक्ष व दलित नेता मनफूल सिंह आर्य के चचेरे भाई शिक्षक मुकेश व हरियाणा पुलिस के जवान सुनील का उनके ससुरालजन लग्र टीका लेकर पहुंचे तो उसी समय पंडित जी की कमी खली। परिजनों ने साथ लगते गांवों में भी संपर्क साधा तो भी बात नहीं। कार्यक्रम में देरी पर खुसर फुसर शुरू हुई तो आखिरकार मामला अंदर महिलाओं तक पहुंच गया। इस पर मनफूल आर्य के छोटे भाई सरकार शिक्षक अनूप सिंह की पत्नी अनीता देवी, जो स्वयं कन्या गुरुकुल पंचगावां की छात्रा रही, ने लग्र कार्यक्रम संपन्न करवाने की बात कही तो घर की बुजर्ग महिला व पुरुषों ने कड़ा विरोध जताया लेकिन उसने कहा कि जब सारा परिवार शिक्षित, जागरूक नौकरी पेशे व समाज से कुरीतियों दूर करने के अलावा अधिकार पाने के लिए संघर्षरत है तो उन पर ये बंदिशें क्यों और अनीता के अपनी हठ पर अडने पर सब राजी हो गए और उक्त महिला ने समाज की पुरानी रुढ़िवादी परंपराओं को ठेंगा दिखाते हुए पांच सौ ग्रामीणों की मौूजदगी में बिना घूंघट सारा कार्य संपन्न कराया। कार्यक्रम में मौजूद मुख्तयार सिंह, दलित नेता मनफूल सिंह आर्य, किसान नेता प्रकाश पहलवान, युवा क्लब अध्यक्ष कुलदीप श्योराण, सूबेदार सुरजभान, सुरजपाल, देवीलाल नंबरदार, कपूर सिंह, पंच धर्मपाल, डा. मनफूल, बीरसिंह सभ्रवाल, बलबीर पंच, रमेश कुमार ने बताया कि गांव की शिक्षित विवाहिता के इस कदम से उन्हें हैरानी तो हुई लेकिन जागरूकता के नाम पर जीती जागती मिसाल भी मिली।