इसे हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड प्रशासन की मजबूरी कहें या फिर प्रशासनिक व्यवस्था का तकाजा। बोर्ड प्रशासन अपने ही स्थानांतरण आदेश को महीनेभर के भीतर तीन बार पलट चुका है। हैरानी की बात यह है कि जिन कर्मचारियों का तबादला किया गया, वे वापस उन्हीं सीट पर पहुंच गए। सवाल उठता है कि पहले तबादला क्यों किया गया और फिर वापस लेने की आखिरकार वजह क्या रही।
पिछले महीने की 23 तारीख को शिक्षा बोर्ड सचिव की ओर से 10 कर्मचारियों की तबादला सूची जारी हुई। लगभग सभी ने अपना नया कार्यभार भी संभाल लिया। लेकिन, 17 दिन बाद यानी नौ जनवरी को सचिव आदेश पर 14 कर्मचारियों के तबादले की नई सूची आई। पिछली सूची में प्रशासन शाखा से विशेष परीक्षा शाखा में स्थानांतरित हुए सहायक रोहित शर्मा को फिर से प्रशासन शाखा में भेज दिया। सत्येंद्र सिंह शैक्षिक पक्ष से प्रशासन गए और नौ जनवरी को वापस शैक्षिक पक्ष में आ गए। इसी तरह से विक्रम विशेष परीक्षा शाखा से शैक्षिक पक्ष और बाद में दोबारा विशेष परीक्षा शाखा आ गए। प्रमाण-पत्र अनुभाग में सहायक कर्मपाल को पहली सूची में लेखा शाखा भेजा गया, लेकिन दूसरी सूची में कर्मपाल को वापस प्रमाण-पत्र अनुभाग में जिम्मेदारी दे दी।
गत 23 जनवरी को अध्यक्ष कार्यालय ने 12 कर्मचारियों के तबादला आदेश जारी किए। हैरानी की बात यह है कि पहली व दूसरी सूची में स्थानांरित हुए सत्येंद्र सिंह व रोहित शर्मा का तीसरी बाद फिर तबादला कर दिया गया।
महीने में सहायक सत्येंद्र सिंह व रोहित शर्मा की तीन-तीन बाद बदली शिक्षा बोर्ड में चर्चा का विषय बनी हुई है। कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं कि शिक्षा बोर्ड प्रशासन की आखिर ऐसी क्या ‘मजबूरी’ रही कि एक बार स्थानांतरण के 17 दिन के भीतर दोबारा पुरानी सीट पर भेज दिया। इसके 12 दिन बाद तीसरी सूची में फिर इन कर्मचारियों के तबादले की आखिर क्या मजबूरी रही। सत्येंद्र सिंह, महासंघ से संबद्ध कर्मचारी यूनियन में पदाधिकारी भी हैं।
दो नेताओं का पहले तबादला फिर सस्पेंड कर चुका है बोर्ड
गत दिसंबर महीने से आंदोलनरत संगठन के दो नेता ऋषिराम शर्मा व सुखबीर यादव को शिक्षा बोर्ड प्रशासन ने पहले यहां मुख्यालय से अंबाला व करनाल स्थानांतरित किया। पिछले दिनों दोनों को सस्पेंड किया था।