सरकारी कर्मचारियों के खाते में एक दिसंबर को सैलरी आ गई है। खाते में भले ही सैलरी आ गई हो, मगर कर्मचारियों की जेब खाली है। नोटबंदी के फेर में आमजन ही नहीं कर्मचारी भी फंसे हुए है। खाते में रुपये होने के बावजूद कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। हालात ये है कि कर्मचारी घर के राशन में भी कटौती कर रहे है। सर्दी का मौसम शुरू होने के बावजूद गर्म कपड़े नहीं खरीद पा रहे है। कुछ बैंकों ने अपने कर्मचारियों की इस समस्या को देखते हुए 10-10 हजार रुपये प्रत्येक कर्मचारी को देने का निर्णय लिया है।
नोटबंदी के चलते बैंकों में भीड़ उमड़ रही है। बैंकों के कर्मचारी उपभोक्ताओं को नए नोट बांटने में जुटे हैं, पर कर्मचारियों की खुद की जेब खाली है। अधिकतर बैंकों के कर्मचारी खातों में सैलरी आने के बावजूद आर्थिक तंगी से जूझ रहे है। यानी रुपये पास है, फिर भी प्रयोग नहीं कर सकते। बृहस्पतिवार को कुछ बैंकों में नगदी आई मगर बेहद कम। जिस कारण बमुश्किल बैंकों में काम चला। एसबीआई में करीब डेढ़ करोड़ की राशि बांटी गई। एसबीआई के चीफ मैनेजर राम सिंह ने बताया कि राशि कम आई मगर आमजन को पूरी-पूरी राशि बांटी गई है। एटीएम में डालने लायक राशि नहीं थी।
कर्मचारियों के लिए अलग काउंटर
कर्मचारियों की आर्थिक समस्या को समझते हुए बैंकों ने भी अलग-अलग योजनाएं बनाई है। यूको बैंक ने अपने सभी कर्मचारियों को 10-10 हजार रुपये नगद देने का निर्णय लिया है। यह वेतन का काफी कम हिस्सा है मगर कर्मचारियों को इसी में अपने खर्च चलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में कर्मचारियों के लिए अलग से काउंटर बनाया गया है। यहां लिमिट के अनुसार सप्ताह में 24 हजार की नगदी निकाली जा सकेगी।
खर्च में कटौती ही एकमात्र विकल्प
भिवानी में किराये पर रहते हैं और सारी चीजें खरीदनी पड़ती है। नोटबंदी के बाद खाते से 87 सौ रुपये निकाले हैं। सारे खर्च कम से कम कर रहे हैं ताकि अन्य लोगों को भी बैंकों से राशि मिल सके। आमजन को इस समस्या में एक-दूसरे का सहयोग करना चाहिए। अब लोग हर रोज लाइन में लग रहे है। आज नगदी निकलवाने के बाद कल फिर से लाइन में लग जाते है। जिस कारण बहुत से लोग पूरी तरह वंचित रह जाते है। लोगों को समस्या को देखते हुए कम राशि में खर्च चलाना चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा के कम से कम राशि जरूर मिल सके।
राज कुमार मीणा, मुख्य प्रबंधक
यूको बैंक
सर्दी का मौसम शुरू, नहीं कर पा रहे खरीददारी
कैश हाथ में नहीं होने के कारण अनेक परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। सर्दी का मौसम शुरू हो चुका है और रुपये नहीं होने के कारण खरीददारी नहीं कर सकती। बैंकों के बाहर लाइन लगी है। कॉलेज क्लास के चलते इतना समय नहीं है कि लाइन में लग सके।
डा. रेखा शर्मा, लेक्चरर, राजीव गांधी महिला कॉलेज
खरीददारी में कटौती
नोटबंदी के बाद अब आर्थिक तंगी के चलते हर चीज कम से कम खरीद रहे हैं। किरयाणा और सब्जी खर्च में भारी कटौती की है। बैंकों में रुपये नहीं है और एटीएम के बाहर लंबी लाइनें लगी है। इस कारण रुपये निकालना भी मुश्किल भरा है।
डा. अनीता बिबियान, लेक्चरर, राजीव गांधी महिला कॉलेज
दुकानदारों के पास ई-बैंकिंग की नहीं है सुविधा
खातों में सैलरी आने के बाद भी हाथ में रुपये नहीं होना परेशानी भरा होता है। हमारे शहर में इतने संसाधन नहीं कि ई-पेमेंट की जा सके। दूध विक्रेता, परचून वाला के पास ई-पेमेंट के लिए मशीनें नहीं है। जिस कारण समस्या आ रही है।
डा. सुरेश कुमारी, कार्यकारी प्रिंसिपल, गवर्नमेंट कॉलेज
आज चला लो पांच-पांच सौ के नोट, कल हो जाएंगे बेकार
पांच-पांच सौ के नोट जरूरी स्थानों अस्पताल, पेट्रोल पंप, बिजली बिल, ट्रेन, बस किराये में 15 दिसंबर तक मान्य किए गए थे। मगर अब इसे दो दिसंबर तक ही सीमित कर दिया गया है। यानी आज-आज ही पांच-पांच सौ के नोट चलेंगे। जिसके पास हो वह इन सेवाओं में पांच-पांच सौ के नोट चला सकते है। शनिवार से इन नोटों की कोई वेल्यू नहीं रहेगी। न पेट्रोल पंप संचालक लेंगे और न ही किसी सरकारी विभाग में पांच सौ नोटों से किसी तरह का भुगतान किया जा सकेगा।