चरखी दादरी को प्रदेश का नया जिला बनाने की घोषणा के फौरन बाद सीएम मनोहरलाल खट्टर ने एक कहानी सुनाते हुए भिवानी के विधायक घनश्याम सर्राफ व बवानीखेड़ा के विधायक बिशंबर वाल्मीकि का बाकायदा नाम लेकर चुटकी ली कि आपकी तो रुपये की अठन्नी हो गई। सीएम की यह टिप्पणी अनायास नहीं है, बल्कि इसमें कई मतलब छिपे हैं।
दरअसल, मजाक में कही गई इस बात के गहरे मायने हैं। सीएम की बात को भौगोलिक परिपेक्ष्य में देखा जाए तो प्रदेश के सबसे बड़े जिले का रुतबे पाने वाले भिवानी की गिनती अब राज्य के छोटे जिलों में होगी। नया जिला अस्तित्व में आने के बाद भिवानी से चरखी दादरी, बाढड़ा, झोझू व बौंद इलाका हट जाएगा। इतना बड़ा हिस्सा हटने के बाद वर्तमान भिवानी जिला आधा रह जाएगा।
सीएम के मजाक में चाहे राजनीति अर्थ न भी हों, लेकिन यह बात सही है कि राजनीतिक ताकत के लिहाज से भिवानी की 'रुपये की अठन्नीÓ जरूर हो गई। इतिहास गवाह है कि राजनीतिक तौर पर भिवानी की पूरे हरियाणा में हनक है। भिवानी से उठी राजनीतिक लहर ने कई बार प्रदेश की राजनीति को नई दिशा दी। इसी हनक के बूते पूर्व सीएम बंसीलाल ने लंबे समय तक हरियाणा की हुकूमत संभाली। बुरे राजनीतिक समय में बंसीलाल को भिवानी का साथ मिला। इसी साथ की वजह से कांग्रेस से अलग होने के बाद भी बंसीलाल की राजनीतिक हनक हमेशा बनी रही। प्रदेश की राजनीति में अखंड-भिवानी का जो पॉलिटिकल क्लेम बनता था, अब दो हिस्सों में बंट जाने की वजह से कहीं न कहीं सूबे की राजनीति में भिवानी की हनक पर असर पड़ना तय है। नए जिले के अस्तित्व में आने के बाद नए राजनीतिक समीकरण संभव है।
ये सुनाई सीएम ने कहानी
पहले जमाने में दो प्रकार की चिट्ठी आती थी। खुशी का समाचार आता था तो चिट्ठी पर रंग लगा होता था और गम की खबर होती तो चिट्टी का कोना फटा होता था। गांव में लड़के के पास पिता की चिट्ठी आई। लड़के ने डाकिये से पूछा, चिट्ठी में क्या है। डाकिया बोला, रंग लगा है। खुशी का समाचार होगा। फिर बताया कि तुम्हारे भाई पैदा हुआ है। लड़का बोला, ये तो खुशी नहीं की बात नहीं हुई। रुपये की अठन्नी हो गई।
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