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जर्जर सड़कें दे रही हैं दर्द, रोज अस्पताल पहुंच रहे हैं डेढ़ सौ

Tue, 06 Sep 2016 01:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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डाक्टर - फोटो : अमर उजाला
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भिवानी शहर की छोटी-बड़ी सड़कों पर हर कदम पर गड्ढे अब लोगों की सेहत भी बिगाड़ने लगे हैं। डेढ़-दो महीने के दौरान सरवाइकल स्पोंडेलाइटिस, कंधे व कमर दर्द पीड़ितों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। जिला अस्पताल में फिजियोथैरेपी लेने वालों की तादाद हर रोज डेढ़ सौ तक पहुंच गई है। बरसात में सड़कों की हालत ज्यादा खराब होने से पहले यह संख्या 50-60 थी।

सड़कों पर कदम-कदम की दूरी पर बने अनगिनत गड्ढ़े दोपहिया व चार पहिया वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। बरसात में जब सड़कों की हालत ज्यादा खराब हुई है, तब से लोगों के गर्दन, कंधों में दर्द, कमर में दर्द, डिस्क प्राब्लम जैसी बढ़ गई हैं।
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जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपी विभाग में रोजाना पहुंच रहे लोगों की संख्या इसकी तसदीक कर रही है। रोज करीबन 150 लोग ओपीडी में आ रहे हैं। इनमें से 70 प्रतिशत मरीज कमर दर्द व सरवाइकल, कंधे के दर्द से पीड़ित है। दस मिनट से आधा घंटे की फिजियोथेरेपी प्रक्रिया के जरिए गर्दन को सीधा रखने, कमर को सीधा रखने, खिंचाव, सेंक लगवाने के लिए मरीज हर रोज अस्पताल में एक घंटा से डेढ़ घंटा लगाते है। ताकि दर्द से राहत मिल सके। एलोपैथी इलाज कराने वालों की संख्या में भी इन दिनों वृद्धि हुई है। हर रोज 15 से 20 सरवाइकल स्पोंडेलाटिस, कमर दर्द पीड़ित इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि गड्ढों वाली सड़कों पर हर रोज आवाजाही सेहत के लिए खतरनाक है।

गर्दन का दर्द, बाजू में दर्द, चक्कर आना, कमर दर्द, पैर दर्द, कंधों को दर्द, कंधा जाम होना, घुटनों का दर्द, टेनिस अल्बो, एडी का दर्द, हड्डी टूटने के बाद जोड़ जाम हो जाने के मरीज लगातार पहुंच रहे है। इनके इलाज के लिए अल्ट्रावायलेट व इंफ्रारेड किरणों के माध्यम से सेंक, अल्ट्रासोनिक मसाजर, माइक्रोबेव डायथर्मी, टेन्स मशीन, सरवाइकल ट्रैक्शन, व्यायाम आदि से इलाज किया जाता है।

अब तो 14-16 साल के बच्चों को भी दिक्कत
चिकित्सकों का कहना है कि पहले सरवाइकल की समस्या 40 वर्ष से ऊपर की आयु वर्ग वाले लोगों में देखने को मिलती थी, वो भी कैल्शियम की कमी या फिर तकिया लगाने अन्य कारणों की बदौलत। लेकिन अब तो 14-16 वर्ष के बच्चों में भी सरवाइकल, कमर दर्द आम बात हो गई। इसके लिए कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप पर गेम खेलने, या लगातार पढ़ाई करने, टीवी देखने की आदत, लेटकर पढ़ने आदि मुख्य कारण बन रहे है।
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सरवाइकल स्पोंडेलाटिस के लक्षण:
- गर्दन का टाइट होना व दर्द होना
- गर्दन के अलावा कंधो, बांहों, पीठ के उपरी भाग में भी दर्द होना
- सिर दर्द, हाथों का सुन्न पड़ जाना

 कारण:
- भारी वजनदार वस्तु उठाने
- टूटी सड़कों पर लंबे सफर के कारण
- कैल्शियम की कमी के कारण
- दिनचर्या में बैठने, लेटने के दौरान सही शारीरिक  मुद्रा न होने की वजह से

बचाव:
- ज्यादा गड्ढे हों, उस रास्ते से न जाएं
- गर्दन झुकाकर न बैठें
- बैठने, चलने व लेटने के गलत तौर तरीकों न अपनाएं
- तकिया का प्रयोग न करें
- मोबाइल पर बात करते वक्त गर्दन को सीधा रखे।
- कंप्यूटर पर काम, मोबाइल पर बात के अलावा बैठते वक्त अपनी बॉडी पॉश्चर सही रखें।
- कैल्शियम की कमी दूर करने के लिए दूध, दही, पनीर आदि को भोजन में शामिल करें।

कमर दर्द व सरवाइकल की समस्या से मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कंप्यूटर व टीवी के सामने लगातार बैठे रहने, कैलशियम की कमी के कारण 14 साल के बच्चे से लेकर महिला, पुरुषों में तेजी से फैलता जा रहा है। साथ ही लगातार सफर करने वाले 50 फीसदी लोगों के लिए सड़कों पर बने गड्ढे मूल कारण साबित लहो रहे है। ऐसे में सावधानी बरतने, फिजियोथेरेपी से इलाज दर्द से छुटकारा दिलाने में कारगर साबित हो सकते है।
डॉ. ओपी केसरवानी, प्रभारी फिजियोथेरेपी विभाग, जिला अस्पताल
 
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