पर्यावरण दिवस की पूर्व संख्या पर यह झटका देने वाली खबर है। वन विभाग ने सालाना पौधारोपण में लगभग 60 प्रतिशत कटौती की है। पिछले साल विभाग ने नौ लाख से अधिक पौधे रोपे थे, लेकिन इस बार केवल तीन लाख पौधे तैयार किए गए हैं। यानी, विभाग पूरे साल केवल तीन लाख पौधा का रोपण करेगा। इसी अनुपात में पौधारोपण क्षेत्र में भी भारी कटौती होगी। इस वर्ष केवल 464 हेक्टेयर में पौधारोपण होगा, जबकि गत वर्ष 1080 हेक्टेयर में पौधे रोपे गए थे। विभाग ने पौधारोपण में कंजूसी बजट में कमी के चलते की है।
वन विभाग के सूत्र बताते हैं कि गत वर्ष की अपेक्षा अब की बार विभिन्न खंड व ब्लॉक स्तर पर लगाए जाने वाले पेड़-पौधों के लिए काफी कम बजट निर्धारित किया गया है। वन विभाग की ओर से 2016-17 में जिले भर में कुल 1080 हेक्टेयर में कुल 9 लाख 39 हजार 380 पेड़-पौधे लगाए गए थे। इनमें से 2.22 लाख पौधे ‘हर घर हरियाली’ के तहत एक रुपया प्रति पौधे के हिसाब से वितरित किए गए थे। इसके उलट चालू वर्ष सत्र 2016-17 के लिए केवल 464 हेक्टेयर में ही पेड़-पौधे लगाए जाने का प्रावधान है। इस दौरान पूरे जिले में 3 लाख 26 हजार 400 पौधे लगाए जाएंगे। इनमें से करीब एक लाख पौधे ‘हर घर हरियाली’ के तहत वितरित किए जाएंगे।
गत वर्ष की अपेक्षा इस बार पेड़-पौधे लगाने के लिए कम बजट निर्धारित किया गया है। करीबन साढ़े तीन लाख पौधे लगाए जाने हैं। इस बार केवल सड़क किनारे लगाए जाने वाले पौधे पर ही जोर रहेगा।
शक्ति सिंह फौगाट, जिला वन अधिकारी
वर्ष सत्र 2015-16 में लगाए गए पेड-पौधे
क्षेत्र कुल जमीन लगाए गए पौधे
भिवानी 113 हेक्टेयर 73000 पौधे
दादरी 248 हेक्टेयर 1,81,300 पौधे
बाढड़ा 205 हेक्टेयर 1,65,000 पौधे
लोहारू 315 हेक्टेयर 2,34,000 पौधे
सिवानी 30 हेक्टेयर 27000 पौधे
तोशाम 143 हेक्टेयर 1,15000 पौधे
इसके अलावा 2.22 हजार पौधे हर घर हरियाली योजना के तहत एक रुपये प्रति पौधा के हिसाब से बांटे गए। वहीं 48000 पौधे सरकारी संस्थानों में मुफ्त में लगाए गए।
एक्सपर्ट व्यू:
पेड़ ज्यादा काटे जा रहे हैं और पौधारोपण कम हो रहा है। इस कारण पर्यावरण असंतुलन का संकट गहरा रहा है। इन विकट हालात में पौधारोपण में और कटौती किया जाना अफसोस जनक है। पेट्रोल-डीजल, प्लास्टिक, कूड़ा फैलाने आदि कारणों से लगातार वायु, जल, भूमि, प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रदूषण को रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा पौधारोपण करना होगा और पेड़ों की परवरिश करनी होगी।
रामनिवास यादव, पर्यावरणविद्