चरखी दादरी में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान उपद्रव को जहन में रखते प्रशासन सतर्कता बरत रहा है। प्रशासन एक साथ दो मुद्दों की सूची तैयार कर रहा है। इसमें एक तो जाट नेता शामिल है और दूसरा उपद्रव के आशंकित लोग। जाट नेताओं की सूची पुलिस अधीक्षक के पास पहुंच चुकी है और इसमें 30 से 35 नाम शामिल बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर उपद्रव के आशंकित लोगों पर भी पुलिस नजर गड़ाए बैठी है। आंदोलन के प्रारंभिक चरण में ही इनकी संपत्ति का ब्यौरा प्रशासन जुटा रहा है। एसपी सुनील दलाल के मुताबिक उपद्रव होने पर नुकसान की भरपाई इनकी संपत्ति से ही की जाएगी। इसके अलावा आपराधिक प्रवृति के युवा भी प्रशासन के राडार पर आंदोलन के दौरान रहेंगे। जाट नेताओं के भाषणों की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है।
जेसीबी व क्रेन मालिकों पर भी पुलिस की निगरानी
एसपी सुनील दलाल का कहना है कि अगर कोई जेसीबी या क्रेन मालिक अपना वाहन किराये पर देता है तो पहले उक्त व्यक्ति की सारी जानकारी जुटा लें। अगर इन वाहनों का रोड जाम या अन्य उपद्रव में प्रयोग हुआ तो वह मालिक भी बराबर का दोषी मनाया जाएगा। एसपी का कहना है कि हर जेसीबी व क्रेन मालिक को किराये पर देने का कारण सहित अन्य जानकारी संबंधित व्यक्ति से लेकर रिकॉर्ड मेंटेन रखना होगा। व्यापारियों व टैंट हाउस संचालकों पर भी यह बात लागू रहेगी।
सोशल साइट्स पर कंट्रोल रूम से रखी जा रही नजर
पुलिस अधीक्षक का कहना है कि जिले का पुलिस कंट्रोल रूम लगभग स्थापित हो चुका है। यहां से सोशल साइट्स पर निगरानी रखी जा रही है। इसमें अगर कोई भड़काऊ मैसेज करता या फैलाता पाया गया तो उस पर भी तय निर्देशानुसार कार्रवाई होगी। उन्होंने आमजन से अपील की है कि अफवाहों की और ध्यान न दें। किसी के मन में कोई संशय है तो डीएसपी हैडक्वार्टर दादरी सुरेश हुड्डा या खुद एसपी सुनील दलाल से संपर्क कर सकते हैं।
प्रशासन ने खरीदारी पर नहीं लगाई रोक
प्रदर्शनकारियों ने दूसरे दिन भी प्रशासन पर बाजार से जरूरत की चीजें खरीदने पर दखल अंदाजी करने का आरोप लगाया। जिलाध्यक्ष राजकुमार हड़ौदी का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही दुकानदारों को रसद या अन्य सामान आंदोलनकारियों को न देने के निर्देश जारी कर रखे हैं। वहीं, एसपी सुनील दलाल का कहना है कि हमने उपद्रवियों को कोई भी सामान न देने के निर्देश जारी कर रखे हैं। अगर उपद्रवी की कोई मदद करेगा तो हमारे लिए भी वह इसी श्रेणी में आएगा। क्या पता दुकानदार अपने बचाव के लिए सामान देने से इंकार कर रहे हों।