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जाट आरक्षण मामला: नोटिस के बाद भी धरना स्थल पर अडिग रहे प्रदर्शनकारी, करीब दस के खिलाफ मामला दर्ज

Tue, 07 Jun 2016 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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मामला दजऱ्र् - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जाट आरक्षण के दौरान लंबित पड़ी मांगों को लेकर धरना दे रहे प्रदर्शनकारियों को सोमवार को प्रशासन ने नोटिस थमा दिया। नोटिस में एक घंटे में धरनास्थल खाली न करने पर एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी भी प्रशासन की तरफ से दी गई। बावजूद इसके प्रदर्शनकारी धरनास्थल पर देर शाम तक अडिग रहे। एक घंटे का अल्टीमेटम पूरा होने के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम व डीएसपी को भी प्रदर्शनकारियों ने धरनास्थल न छोड़ने का दो टूक जवाब दे दिया। प्रदर्शनकारियों के अडिग रैवये को देखते हुए प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए करीब दस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। हालांकि इस संबंध में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की अगुवाई में महेंद्रगढ़ बाईपास स्थित हुडा सेक्टर में रविवार से शुरू हुआ शांतिपूर्वक धरना लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। समिति की प्रमुख रूप से मांगों में  जाट आंदोलन के दौरान मारे व्यक्तियों  को सरकारी नौकरी  व 10-10 लाख रूपये अनुग्रह राशि दिए जाने के अलावा आंदोलन  के दौरान दर्ज केस वापस लिया जाना शामिल हैं। शांतिपूर्वक धरने के बावजूद प्रशासनिक अमला पहले दिन की तरह ही दूसरे दिन भी मुस्तैद रहा। दोपहर बाद प्रशासन ने जिलेभर में लागू की गई धारा 144 का हवाला देकर धरने की अगुवाई कर रहे अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष राजकुमार हड़ौदी को नोटिस दे दिया। खुद तहसीलदार राजकुमार अरोड़ा मौके पर पहुंचे और राजकुमार को नोटिस देकर एक घंटे के अंदर धरनास्थल खाली करने का अल्टीमेटम दिया। इस दौरान स्पष्ट चेतावनी दी गई कि ऐसा न करने पर प्रशासन नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाएगा।

धरने को बताया गया गैरकानूनी
सोमवार सांय करीब चार बजे प्रशासन की ओर से तहसीलदार राजकुमार धरना स्थल पर पहुंचे। तहसीलदार ने धरने पर बैठे  अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति जिला प्रधान राजकुमार हड़ौदी को नोटिस सौंपा। नोटिस के माध्यम से धरना स्थल को तुरंत प्रभाव से खाली करने की  बात कही गई है। नोटिस में कहा गया है कि क्षेत्र में धारा 144 लागू हो चुकी है। ऐसे में धरने पर बैठना धारा 144 की अवमानना माना जाएगा। नोटिस का अल्टीमेटम खत्म होने के बाद एसडीएम विजेंद्र हुड्डा व डीएसपी सुरेश हुड्डा मौके पर पहुंचे। इस दौरान प्रशासनिक अमले ने प्रदर्शनकारियों को जब धरनास्थल छोड़ने की बात कही तो प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट मना कर दिया। धरने पर बैठे जाट आरक्षण संघर्ष समिति जिला प्रधान राजकुमार हड़ौदी  का कहना है कि जब तक समिति की मांगें पूरी नहीं हो जाती उनका धरना जारी रहेगा। इसके लिए वे गिरफ्तारी देने को भी तैयार हैं।
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नाकों पर डटे पुलिस और सीआरपीएफ के जवान
धरना के दूसरे दिन भी पुलिस व सीआरपीएफ के जवान तैनात रहे। धरना स्थल से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर सीआरपीएफ के जवानों को तैनात कर रखा है। इसी प्रकार शहर के लोहारू चौक, समसपुर बाइपास, इमलोटा बस स्टैंड के अलावा, महेंद्रगढ़ चुंगी समेत विभिन्न संवेदनशाली भागों में पुलिस व सीआरपीएफ के जवान लगातार स्थिति पर निगरानी रखे हुए हैं।

डीसी के आदेशों की अवमानना(धारा 144) पर करीब दस लोगों पर आईपीसी की धारा 188 के तहत पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
भूदेव सिंह, सिटी थाना प्रभारी

धरने को समर्थन देने के फैसले पर किया विचार विमर्श
फौगाट खाप के पदाधिकारियों की बैठक का आयोजन सोमवार को स्वामी दयाल मंदिर परिसर में किया गया। इसकी अध्यक्षता प्रधान रामदास फौगाट ने की। बैठक में जाट आरक्षण संघर्ष समिति को समर्थन देने के लिए विचार-विमर्श किया गया। प्रधान रामदास ने कहा कि आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए झूठे मुकदमे वापस लेने, गिरफ्तार किए गए लोगों की रिहाई, मारे गए लोगों को सरकार द्वारा घोषित की गई आर्थिक मदद दिलवाने, उसके आश्रित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिलवाने और हाईकोर्ट में आरक्षण से संबंधित विचाराधीन मामले के विषय में सरकार द्वारा ढंग से पैरवी करवाने सहित अन्य मांगों पर फौगाट खाप द्वारा जाट आरक्षण संघर्ष समिति को समर्थन देने का विचार किया जा सकता है। बशर्ते कि संघर्ष समिति व अन्य धरने में शामिल लोग कानून की पूरी पालना करें। बैठक में रामसिंह बलकरा, बलवंत नंबरदार, अधिवक्ता गिरेंद्र फौगाट,डॉ. सुभाष, युद्धबीर सिंह, राजबीर फौगाट, बोरा फौगाट आदि उपस्थित थे।
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