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....यहां नहीं चलते पांच सौ के नोट

Wed, 07 Dec 2016 01:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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15 दिसंबर तक भले ही चुनिंदा केंद्रों पर पांच सौ का नोट चलाने के सरकार के निर्देश हों, मगर जमीनी हकीकत कुछ ओर है। न सरकारी विभागों में और न ही प्राइवेट संस्थानों में पांच सौ का नोट लिया जा रहा है। अस्पताल में इलाज हो या रोडवेज में टिकट लेनी हो या फिर स्कूल की फीस भरी हो, कहीं भी पांच सौ का नोट नहीं चल रहा। इसके अलावा नगर परिषद की जन्म-मृत्यु शाखा, ई-दिशा केंद्र में भी पांच सौ का नोट लेने से साफ इनकार किया जा रहा है। इतना ही नहीं अधिकतर तो चेक से भी इनकार कर रहे हैं। पीएसओ मशीन इनके पास है नहीं ऐसे में मरीजों की परेशानी बढ़ गई है।

कहां क्या हाल :

ई-दिशा केंद्र: पांच सौ का नोट सिर्फ बैंक में चलाओ
वाहन रजिस्ट्रेशन सीट पर बैठे कर्मचारी को जब शुल्क के रूप में पांच सौ का नोट देना चाहा तो जवाब मिला कि पांच का नोट सिर्फ बैंक में चलता है। यहां नहीं। यहां तो एक-एक सौ के जमा कराओ।
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नगर परिषद : ना पांच सौ चलेगा, ना दो हजार का नोट
जन्म-मृत्यु शाखा में सर्टिफिकेट के लिए लाइन लगी है। अधिकतर के पास या तो पांच सौ के है या फिर दो हजार के नोट। मगर कर्मचारी दोनों ही लेने से इंकार कर रहे है। कर्मचारियों का कहना है कि पांच सौ का नोट यहां नहीं चलेगा। दो हजार के नोट इसलिए नहीं स्वीकार कि छोटे नोटों का टोटा है। ऐसे में एक-एक सौ के ही नोट लाओ।

सामान्य अस्पताल : एमएलआर कटवानी है तो एक सौ रुपये का नोट लाओ
एमएलआर कटवानी है तो एक सौ का नोट लाओ। ये जवाब सभी मरीजों व उनके तिमारदारों को मिल रहे है। कर्मचारी साफ कहता है कि पांच सौ का नोट यहां चलेगा नहीं, दो हजार का नोट छुट्टा नहीं होगा। डेबिट, क्रेडिट कार्ड से रुपये काटने की व्यवस्था नहीं।

रोडवेज : छुट्टे लेकर आओ
छुट्टे नहीं है, छुट्टे लेकर आओ। पांच सौ का नोट देखते ही रोडवेज कर्मचारी यात्रियों को यह जवाब देते है। बेशक सरकार ने यहां पांच सौ का नोट चलाने की अनुमति दे रखी हो मगर यहां पांच सौ का नोट नहीं चलता।

प्राइवेट अस्पताल व प्राइवेट स्कूलों को चाहिए बस नई करेंसी
प्राइवेट अस्पताल व प्राइवेट स्कूलों को चाहिए नई करेंसी में कैश। पांच सौ का नोट नहीं चलेगा। जिले में ढाई सौ से अधिक प्राइवेट स्कूल है। कुछ बड़े स्कूल तो चेक से पेमेंट ले रहे हैं, मगर छोटे स्कूल तो सिर्फ कैश मांगते हैं लेकिन उसमें वो पांच सौ का पुराना नोट स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
दो हजार के नोट को भी ना
पांच सौ के नोट ही नहीं अधिकतर जगह चेक और दो हजार के नोट को भी इनकार किया जा रहा है। प्राइवेट अस्पताल, नगर परिषद, रोडवेज, मोबाइल रिचार्ज में पांच सौ के नोट के साथ चेक को भी नकार रहे हैं। दो हजार के नोट को भी छुट्टे के चक्कर में विभागों के कर्मचारी मना कर रहा है।

यहां 15 दिसंबर तक चलेंगे पांच सौ के नोट
सरकार के निर्देशानुसार अस्पताल, रोडवेज, ई-दिशा केंद्र, सरकारी बीज की दुकानों, एलपीजी सिलेंडरों, बिजली बिल, पानी बिल, हाउस टैक्स में 15 दिसंबर तक पांच सौ का नोट प्रयोग किया जा सकता है।

तीन दिन बाद बैंकों में उमड़ी भीड़
शनिवार और सोमवार को नगदी नहीं थी और रविवार को अवकाश रहा। तीन दिन बाद मंगलवार को बैंकों में कैश आया तो बैंकों में भीड़ भी उमड़ी। लगभग सभी बैंकों के बाहर मंगलवार को लंबी-लंबी कतार लगी थी। बैंकों के बाहर भीड़ थी मगर अधिकतर एटीएम के शटर डाउन ही रहे। जिस कारण लोग दिनभर परेशान रहे। बैंकों के बाहर इतनी भीड़ थी कि लोग सड़क पर भी लाइन में लगे थे। इस कारण बीच-बीच में सड़क पर जाम के हालात भी बने मगर मौजूद पुलिस लोगों को लाइन में लगाती रही।

देरी से पहुंचे बैंक कर्मचारी, ग्रामीणों ने लगाये नारे
दिनोद गांव में सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के बाहर लोगों की भीड़ लगी थी मगर कर्मचारी कोई नहीं था। दिनोद गांव के अलावा कोहाड़, बजीणा, ढाणी माहू गांव के लोग लाइन में लगे थे। कर्मचारियों पर देरी से आने का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने नारे लगाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वे अपने सब काम छोड़कर सुबह-सवेरे जल्दी आते है ताकि उनका नंबर आ सके और उन्हें भी नगदी मिल सके। नगदी नहीं होने के कारण भारी आर्थिक समस्या से जूझना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पहले ही नगदी नहीं होने की परेशानी, ऊपर से कर्मचारी भी समय पर नहीं आते। लाइन में ही पूरा दिन बीत जाता है, अन्य कोई काम नहीं कर पाते। ग्रामीणों ने नारेबाजी कर रोष जताया। ग्रामीण अमित भाटी, सुनील रोहिल्ला, अजीत, नफेराम,  संजय, ओमप्रकाश आदि  ने बताया कि स्टाफ पौने एक बजे आया और जवाब दिया कि कैश नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि वे इसकी सीएम विंडो व मुख्य शाखा प्रबंधक को भी शिकायत करेंगे।
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सरकारी विभागों में अभी पांच सौ का नोट चल रहा है। अगर कोई नहीं लेता है तो उसकी शिकायत उपायुक्त कार्यालय में की जा सकती है। उपायुक्त कार्यालय से ही कार्रवाई की जाएगी।
कुलजीत सिंह, अग्रणी बैंक प्रबंधक
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