चरखी दादरी के गांव चरखी में एक साल से पेयजल और छह महीने से बिजली किल्लत झेल रहे ग्रामीणों ने रविवार सुबह दादरी-भिवानी मुख्यमार्ग को जाम कर जमकर बवाल काटा। गुस्साएं ग्रामीणों ने करीब ढाई घंटे तक प्रशासनिक अधिकारियों की एक न सुनी। इस दौरान मौके पर पहुुंचे भी अधिकारियों को ग्रामीणों ने परेशानियों का हवाला देते हुए खरीखोटी सुनाई। चरखी पंचायत ने निगम अधिकारियों व कर्मचारियों पर जानबूझकर उन्हें कम बिजली सप्लाई देकर परेशान करने का आरोप भी लगाया है। निगम के अधिकारियों ने ग्रामीणों को सोमवार से पूरे गांव की कंडम तारें बदलने, नए ट्रांसफार्मर रखवाने व 16 घंटे बिजली सप्लाई देने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर 20 दिन बाद उनके गांव में 22 घंटे बिजली सप्लाई नहीं पहुंची तो इस बार पूरी तैयारी के साथ आंदोलन का रास्ता इख्तियार करेंगे। जाम लगाने से सड़क के दोनों और करीब चार किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतारें लग गई और सैकड़ों भारी वाहन जाम में फंसे रहे।
दादरी-भिवानी मुख्यमार्ग स्थित गांव चरखी में पेयजल व बिजली संकट झेल रहे ग्रामीणों का सब्र का बांध रविवार सुबह टूट गया। पंचायत पदाधिकारियों को साथ लेकर सैकड़ों ग्रामीण सुबह करीब दस बजे दादरी-भिवानी मुख्यमार्ग पर उतर आए। ग्रामीणों ने बीचोंबीच अवरोधक डालकर मुख्यमार्ग को जाम कर दिया और महिलाओं सहित पुरुष वहीं बैठ गए। पंचायत के आरोप है कि बीते पांच माह से सरकार की सरचार्ज माफी योजना स्कीम से जुड़ने के बाद भी उनकी बिजली सप्लाई में भारी कटौती की गई है। पंचायत ने आरोप लगाए है कि पिछले करीब पांच माह से तो बिजली सप्लाई बेहद ही कम दी जा रही है। निगम दिनभर में महज चार घंटे ही बिजली सप्लाई दे रहा है और उस दौरान भी दो से तीन कट लगा दिए जाते हैं। ऐसे में उनका कृषि कार्य के साथ-साथ घरेलू कारोबार प्रभावित है। इधर, जाम की सूचना पाकर पहले सदर थाना एसआई गल्ला राम अपनी टीम सहित मौके पर पहुंचे। उन्होंने जब ग्रामीणों को समझाना चाहा तो बिजली निगम के अधिकारियों को मौके पर बुलाने का तर्क दिया गया। इसके बाद मौके पर पहुंचे बिजली निगम के एसडीओ से भी ग्रामीणों ने सीधे मुंह बात न कर एक्सईएन को ही मौके पर बुलाने की मांग की। इसी दौरान तहसीलदार राजकुमार अरोड़ा व डीएसपी सुरेश हुड्डा भी मौके पर पहुंच गए। इनके समझाने पर भी ग्रामीणों ने एक न सुनी और परेशानियों का हवाला देते हुए तुरंत प्रभाव से समस्या का समाधान करवाने की मांग की। इसके बाद निगम के एक्सईएन बिजेंद्र लांबा मौके पर पहुंचे और करीब आधे घंटे तक चले ड्रामे के बाद आश्वासन पाकर ही ग्रामीणों ने जाम खोला।
गांव की 11 सदस्यीय टीम लेगी अधिकारियों के आश्वासन पर अपडेट
जाम लगने के दौर मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने सरपंच गुलजारी को जल्द से जल्द समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। इसमें गांव की कंडम तारों को बदलना, तीन नए ट्रांसफार्मर लगवाना, गांवों में लगे लोहे के बिजली पोल हटवाना, बिना बिजली केबल वाले खंभों पर नई लाइन डालने सहित गांव में 22 घंटे बिजली सप्लाई मुहैया करवाना शामिल थे। 22 घंटे बिजली सप्लाई की मांग को छोड़कर बाकी मांगों पर निगम अधिकारियों ने तत्परता से काम शुरू करने का आश्वासन दिया। सरपंच ने इस आश्वासन पर अधिकारियों के सामने ही आश्वासन की अपडेट लेने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी गठित कर दी।
मासिक बिल भेजने से लेकर नए मीटर की फाइल तैयार करने में गड़बड़ी के आरोप
सरपंच गुलजारी ने बताया कि गांव में करीब दो सौ नए मीटर लगवाए गए हैं। इनका मासिक बिल में चार-महीनों तक तो निगम अधिकारी जीरो यूनिट दर्शाकर न्यूनतम बिल भरवाते हैं और एकाएक किसी बिल में एक हजार यूनिट तो किसी के पास दो हजार यूनिट का बिल भेज देते है। समाधान के नाम पर शिकायतकर्ता के चक्कर कटवाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 30 नए मीटर लगवाने की फाइलें लेकर निगम अधिकारियों ने इन्हें गुम कर दिया। अब जो उपभोक्ताओं ने 1360 रुपये की सिक्योरिटी राशि भरी है, उसका कोई ब्यौरा ही नहीं है।
गांवों के घरों में आटा व पानी तक नहीं है। इस बार अगर समाधान नहीं हुआ तो पूरे बंदोबस्त के साथ सड़क पर उतरेंगे। गांव में चार बार खुला दरबार लगाकर नए बिजली कनेक्शनों की फाइल अधिकारियों को सौंपने के साथ-साथ करीब दो सौ डिफॉल्टर उपभोक्ताओं का बिल भी भरवाया जा चुका है। तब भी बिजली किल्लत से हम दो-चार हो रहे हैं। जन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से पिछले एक साल से ट्यूबवेल का पानी पीने को ग्रामीण मजबूर है। दोनों ही विभागों की लापरवाही अब बर्दाश्त से बाहर है। कंडम तारें टूटकर गिरने से आधा दर्जन पशुओं की मौत हो चुकी है।
गुजलारी सिंह, सरपंच चरखी
चरखी में लाइन लॉस 80 प्रतिशत से अधिक है। करीब चार करोड़ की बकाया राशि में से व्यूवर स्कीम का लाभ उठाकर ज्यादातर ने बिल भर दिया था। हमारे स्तर की मांगों पर तुरंत प्रभाव से काम करेंगे। अगर 22 घंटे बिजली चाहिए तो जगमग योजना से गांव को जुड़ना होगा। इसके लिए पंचायत एक कमेटी गठित करे तो उच्चाधिकारियों से मिलकर जगमग योजना में जुड़ने व कार्रवाई बारे बातचीत करें।
बिजेंद्र लांबा, एक्सईएन