पीजीआई रोहतक के खाते में 5166 की राशि के पीछे 50 और लिख 516650 रुपये बना दिया। इसी बढ़ाई गई राशि के आधार पर कर्मचारी (स्पेशल वार्ड कैशियर) की तरफ 1969197 रुपये बकाया बताकर जमा कराने के आदेश दिए गए। आगामी 31 जनवरी को रिटायर होने वाले कैशियर ने राहत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
जगत कॉलोनी में रहने वाले कैशियर हरीश कुमार पीजीआई रोहतक में तैनात हैं। हरीश कुमार ने बताया कि दो मई 2011 से 20 दिसंबर 2014 तक उसकी ड्यूटी स्पेशल वार्ड कैशियर की थी। बाद में उसे अकाउंट ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया गया। 31 जनवरी को उसकी रिटायरमेंट है। अब 23 दिसंबर 2016 को पीजीआई अधिकारियों की ओर से उसे पत्र दिया गया कि आप की ओर 1969197 रुपये बकाया हैं। यह पत्र देख वह भी हैरान रह गया। जब ऑडिट ब्रांच से बकाया के बारे में जानकारी मांगी तो अकाउंट ऑफिसर की ओर से दी गई जानकारी में भारी छेड़छाड़ पाई गई। 5166 को बदलकर 516650 बना दिया है। 1354 को 13540 बना दिया गया है। 5222 को 522205 बना दिया गया है। इस तरह करीब 89464 की राशि को 1290079 बना दिया गया है। हरीश कुमार ने बताया कि उसके द्वारा जमा कराई गई राशि को भी नहीं दिखाया गया जबकि उसके द्वारा जमा कराई गई राशि की रशीदें भी उसके पास हैं। अब शुक्रवार को एक और पत्र मैनेजमेंट की ओर से दिया गया है, जिसमें उसे तुरंत यह राशि जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। उसे मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। अब उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
हरीश कुमार के अधिवक्ता कृष्ण कुमार भाटिया ने बताया कि अकाउंट में भारी छेड़छाड़ की गई है और ये ही घोटाला किया गया है। जांच करवाई जाए तो बड़ा घोटाला मिलेगा। मामले में पीजीआई के अकाउंट ऑफिसर से संपर्क करने का प्रयास किया गया मगर संपर्क नहीं हो पाया।
कमरे में ठहरने के बदले कौन देगा पांच लाख 22 हजार
बकाया राशि दर्शाई गई है, उसे देख सभी हैरान हैं। हरीश कुमार स्पेशल वार्ड कैशियर थे। यानी स्पेशल कमरे देने, उनका किराया वसूलने की जिम्मेवारी। एसी कमरे का एक दिन का चार्ज 800 रुपये और नॉन एसी का 600 रुपये। खाने के 180 रुपये। सिक्योरिटी के तौर पर 5180 रुपये जमा किए जाते हैं और ठहरने वाले को छोड़ते के समय बकाया वापस लौटाना पड़ता है। अब सवाल यह है कि 555205 रुपये राशि कौन देगा। 5222 की राशि को 522205 दिखाया है।