भिवानी में कैशलेस की ओर से शहर की मार्केट ने भी कदम बढ़ा दिए है। 150 से अधिक दुकानदारों ने विभिन्न बैंकों में प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन के लिए आवेदन किया है। सर्राफा मार्केट समेत बड़े दुकानदारों ने मशीन ले ली है। इनके अलावा काफी दुकानदार आवेदन की प्रक्रिया पूरी करने में लगे है। पीओएस मशीन ही नहीं यूपीआई ऐप से भी खरीद-फरोख्त की तैयारी हो गई है।
नोटबंदी के बाद आमजन ही दुकानदार भी परेशान है। दुकानदारी खासी प्रभावित हो रही है। आमजन के पास नगदी नहीं है। बैंक, एटीएम के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी है। सर्राफा बाजार 80 प्रतिशत तो अन्य बाजारों में भी काफी गिरावट आई है। आमजन की परेशानी को देखते हुए अब दुकानदारों ने ही कैशलेस की ओर कदम बढ़ाए है। शहर के 150 से अधिक दुकानदारों ने अलग-अलग बैंकों में प्वाइंट ऑफ सेल मशीन (पीओएस) के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा करीब इतने ही दुकानदार और आवेदन की तैयारी कर रहे है। शहर के कुछ बड़े दुकानदारों ने पहले ही पीओएस मशीन ले ली है और अब लेन-देन इसी मशीन के माध्यम से किया जा रहा है। आवेदन करने वाले अधिकतर दुकानदारों में सर्राफा व्यापारी, पेट्रोल पंप संचालक है। पीओएस मशीनों की बढ़ी मांग के कारण एक साथ इतनी मशीनें मुहैया करवा पाना भी बैंकों के लिए परेशानी भरा है। इस कारण आवेदन करने वाले दुकानदारों को कम से कम चार से पांच दिन तक मशीन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। मशीन दुकानदार को उनके अकाउंट के आधार पर मिलेगी। मशीन में डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड स्वाइप करते ही मशीन में भरी राशि खाते कट जाएगी। जिन दुकानदारों ने मशीन ले ली हैं, उन्होंने अपनी दुकानों के बाहर नोटिस चस्पाए है कि यहां डेबिट, क्रेडिट कार्ड स्वीकार किए जाते हैं।
मैरिज सीजन में भी दुकानों से ग्राहक गायब
नोटबंदी के बाद आमजन ही नहीं दुकानदार भी खासे परेशान है। दरअसल आमजन के पास नगदी नहीं है, जिस कारण बाजार में खरीददारी नहीं हो रही। अधिकतर दुकानदारों के पास पीओसी मशीन या ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का कोई अन्य माध्यम नहीं है। ऐसे में दुकानदारी खासी प्रभावित हो रही है। सर्राफा दुकानदारों की माने तो 90 फीसदी तक मार्केट ठप है। छोटे-बड़े सभी दुकानदार खाली है और मैरिज सीजन में भी ग्राहक नहीं आने के कारण परेशान है। दुकानदारों का कहना है कि आज भी 70 फीसदी से अधिक आबादी गांवों में बसती है। ग्रामीणों के पास न क्रेडिट कार्ड है न डेबिट कार्ड। उन्हें ऑनलाइन बैंकिंग या डेबिट कार्ड से खरीददारी की कोई जानकारी नहीं।
ज्यादातर बैंकों में सुबह ही कैश खत्म
नोटबंदी के 25 दिन बाद भी समस्या जस की तस बनी है। शनिवार को भी बैंकों, एटीएम के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ी और लंबी-लंबी कतारें बनी। मगर दोपहर तक अधिकतर बैंकों में नगदी बिल्कुल खत्म हो गई। जिसके बाद उपभोक्ता निराश लौटे। दोपहर के समय अधिकतर बैंकों के बाहर लाइन तो दूर एक-दो आदमी भी नजर नहीं आ रहे थे।