भिवानी में कैश की तंगी से बैंक मंगलवार को भी जूझते रहे तो आज जन को धैर्य भी जवाब देने लगा है। पीएनबी की शाखाओं में कैश की स्थिति ठीक रही तो दूसरे बैंकों में कैश की किल्लत दिखी। बैंक ऑफ इंडिया में लोगों ने कुछ देर हंगामा किया। एक-दो को छोड़कर लगभग सभी एटीएम बंद रहे। उधर, चहेतों को पैसे देने का आरोप लगाते हुए बाढ़डा में ग्रामीणों ने बैंक में हंगामा किया। भाकियू ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
मंगलवार को भी कैश के लिए बैंकों के अंदर व बाहर मारामारी की स्थिति रही। लगभग सभी बैंकों के बाहर लाइनें दिखीं। पिछले तीन दिन से कैश की कमी से जूझ रहे पीएबी के बाहर लंबी कतार रही। मुख्य ब्रांच के बाहर दोपहर बाद तक लोग कतार में खड़े रहे। विजया बैंक के बाहर सुबह से ही नो कैश का बोर्ड लगा रहा तो स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में कैश न होने की वजह से ग्राहकों को निराश लौटना पड़ा।
बैंक ऑफ इंडिया में दोपहर कैश की कमी हुई तो लोगों ने हंगामा किया। करीब 15 मिनट अफरा-तफरी मची रही। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन सिस्टम शुरू किया गया।
भीड़ में खड़े लोगों में उबाल आया तो दस-दस हजार देकर शांत किया
बाढ़डा कस्बे के सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में उपभोक्ताओं ने रुपये न मिलने पर हंगामा किया। इसके बाद बैंक प्रबंधन ने लाइन में लगे हुए उपभोक्ताओं को दस-दस हजार रूपये की राशि देकर शांत किया।
उपभोक्ता गोपीराम, सुखबीर, राजपाल, उमेद, रणवीर, कृष्ण कुमार, जयवीर आदि ने बताया कि वे सुबह से सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में अपने खाते से राशि निकलवाने के लिए पहुंच गए थे। लेकिन बैंक कर्मचारियों ने बैंक में कैश होते हुए भी लाइनों में लगे उपभोक्ताओं को नहीं दिया। कुछ ने अपने चहेतों को कैश देने का आरोप लगाया और लोग भड़क गए व हंगामा शुरु कर दिया। उपभोक्ताओं ने बैंक प्रबंधक से नोक-झोंक कर उन पर रुपये वितरण में भेदभाव करने के आरोप लगाए।
बैंक प्रबंधक रमेश बूरा ने चहेते को रुपये देने के आरोपों से इनकार किया और कहा कि पीछे से ही कैश कम आ रहा है। फिर भी हंगामा कर रहे लोगों को दस-दस हजार रुपये देकर संतुष्ट कर दिया गया।
भाकियू ने दी आंदोलन की चेतावनी
बाढ़डा कस्बे के किसान भवन में जिलाध्यक्ष की अध्यक्षता में बैठक कर भारतीय किसान यूनियन ने सहकारी बैंकों में पुराने नोट न लेने के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है।
मंगलवार को भिवानी-महेंद्रगढ़ भाकियू जिलाध्यक्ष धर्मपाल बाढ़डा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारी बैंकों में पुराने नोट से लेनदेन बंद के फैसले ने किसानों के मुश्किलें खड़ी कर दी है। ज्यादातर किसानों का लेनदेन सहकारी बैंकों में है।
जिलाध्यक्ष ने कहा सहकारी बैंकों में नोटबंदी का फैसला किसान विरोधी है। जिसके कारण गेंहू की बुआई का समय निकलता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सहकारी बैंकों में पुराने नोटों से लेनदेन शीघ्र शुरु नहीं किया गया तो भाकियू इस किसान विरोधी फैसले के खिलाफ आंदोलन करेगी। इस मौके पर राजकुमार हड़ौदी,दिलबाग गोपी,प्रदीप प्रधान,कमल सिंह, मीर सिंह,उमेद जेवली,हरपाल भांडवा आदि मौजूद रहे।
अनाजमंडी का कारोबार आधा हुआ
नोटबंदी की मार से आम आदमी ही नहीं व्यापारी वर्ग भी खासा परेशान है। भिवानी स्थित नई अनाजमंडी में किसानों द्वारा फसल न ले आ पाने के कारण अनाजमंडी में विरानी छाई हुई है। अनाजमंडी के व्यापारी हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं। आढतियों की माने तो मंडी में फसली सीजन होने के बावजूद उनके पास काम नहीं है। किसानों ने नोटबंदी के कारण मंडी में आना बंद कर दिया है।
500-1000 के नोट देकर किसानों ने खरीदा खाद-बीज
भिवानी की नई अनाज मंडी में किसानों ने मंगलवार को पुरानी करेंसी के बदले खाद-बीज खरीदे। बड़ी संख्या में किसानों ने आधार कार्ड की फोटो कॉपी देकर खाद व बीज की खरीददारी की। सुबह से लेकर दोहपर तक किसानों ने खाद व बीज खरीदे।
क्रशर बाजार का टर्नओवर ढाई करोड़ से घटकर 50 लाख हुआ
तोशाम के क्रशर बाजार पर नोटबंदी का भारी असर देखने को मिल रहा है। नोटबंदी के चलते क्रशर बाजार का करीबन 80 प्रतिशत लेनदेन ठप हो गया है। रोजाना करीबन ढ़ाई करोड़ का टर्न ऑवर पचास लाख तक सिमट गया है। इसमें भी उधार का लेनदेन हो रहा है। क्रशर मालिकों के पास लेबर को दिहाड़ी देने के लिए पैसों का भी टोटा है। इन हालातों में क्रशर मालिक मजदूरों को भी काम से हटाने लगे हैं।
खानक-डाडम क्षेत्र में करीबन तीन सौ क्रशर इकाइयां चल रही हैं। क्रशर मालिकों की माने तो 16 सौ के करीब गाडिय़ां हर रोज खानक से बाहर निकलती हैं। इस आंकड़े को लेकर चलें तो 12 लाख 80 हजार फीट क्रशर-रोड़ी हर रोज खानक के क्रशर जोन से निकलती हैं। इस हिसाब से करीबन ढ़ाई करोड़ का टर्न ऑवर बनता है। नोटबंदी के चलते क्रशर बाजार पर भारी असर दिखाई दे रहा है। नोटबंदी का ही प्रभाव है कि अब मुश्किल से हर रोज पचास लाख का टर्न ऑवर रह गया है। हालात ये हैं कि क्रशर मालिकों के पास लेबर को पैसे देने तक के लिए नहीं हैं। जो माल बिक रहा है। वह भी उधार में ज्यादा बिक रहा है। विभिन्न विभागों में कार्यरत ठेकेदार ज्यादातर माल उठा रहे हैं। जो अधिकतर उधार में ले जा रहे हैं। इन हालातों में क्रशर मालिक मजदूरों की संख्या कम करने के मजबूर हैं।
क्रशर मालिक अनिल जैन का कहना है कि नोटबंदी का क्रशर बाजार पर भारी असर है। क्रशर बाजार का लेनदेन करीबन 80 प्रतिशत ठप हो गया है। नोटबंदी के बाद 15 नवंबर तक खनन कार्य बंद था। 16 नवंबर से यह स्थिति बनी हुई है। क्रशर मालिक डाडम पहाड़ ठेकेदार से पत्थर लेते रहे हैं उसमें नकदी का लेनदेन होता है। नोटबंदी के कारण अब क्रशर मालिकों के पास नई करेंसी नहीं होने के कारण पत्थर की खरीद नहीं हो पा रही। ऐसे में पहाड़ ठेकेदार भी नोटबंदी के कारण काफी प्रभावित है।