भिवानी। कंडम घोषित हो चुके जोन में भी विद्यार्थी जान जोखिम में डालकर परीक्षा दे रहे हैं, लेकिन कॉलेज प्रशासन अनजान बन रहा है। भूगोल और मनोविज्ञान विभाग के विद्यार्थियों के सिर पर जर्जर भवन के गिरने का खतरा मंडरा रहा है। भवन के अधिकतर हिस्सों का मलबा भी टूटकर नीचे गिर चुका है। हम यहां बात कर रहे हैं भिवानी के संस्थापक के नाम से बने महाराजा नीमपाल सिंह राजकीय महाविद्यालय की।
यहां भवन का ऊपरी हिस्सा उचित रखरखाव के अभाव में गिरने के कगार पर पहुंच गया है। कॉलेज के द्वितीय तल के जर्जर कुछ हिस्से को कंडम घोषित किया गया है। इस हिस्से में तार भी लगाए गए हैं, ताकि छत पर कोई प्रवेश न कर सके। मगर यहां फिर भी बच्चों की परीक्षाएं कराई जा रही हैं। वहीं महाविद्यालय के द्वितीय तल पर भूगोल विभाग के भवन पर लगे मधुमक्खियों के छाते लगे हुए हैं। पिछले दिनों एक महिला प्रोफेसर सहित कई विद्यार्थी भी इसकी चपेट में आ चुके हैं।
पीने के लिए न पानी, शौचालय अव्यस्थित
कॉलेज में भूतल पर तीन वाटर कूलर लगवाए गए हैं, जिसका ठीक से रख-रखाव न होने की वजह से वे अक्सर बंद पड़े रहते हैं। तपती गर्मी में भी कॉलेज विद्यार्थी टंकी का पानी पीने को मजबूर हैं, जोकि बगैर फिल्टर का है। साथ ही कॉलेज में विद्यार्थियों के लिए बनाए शौचालयों की हालत भी काफी खराब है। अधिकतर में पानी की व्यवस्था नहीं है और न ही ठीक से सफाई होती है।
छत पर उगी घास, बैठने के लिए नहीं कॉमन रूम
कॉलेज भवन की छतों पर घास उगी हुई है, इस कारण बरसाती पानी छत पर ही जमा हो जाता है। यहां पर जमा हुआ पानी छतों से टपकता रहता है। वहीं दूसरी ओर पार्कों में भी बड़ी-बड़ी घास व झाड़ियां उगी हुई हैं, जिस पर बैठना मुश्किल हो चुका है। कॉलेज में विद्यार्थियों के फ्री समय में बैठने के लिए कॉमन रूम होता है, जोकि यहां पर नहीं है। ऐसे में विद्यार्थी फ्री समय में कैंटीन या फिर यहां-वहां टहलते रहते हैं।
80 के दशक में बना था कॉलेज
एमएनएस राजकीय कॉलेज का निर्माण 80 के दशक में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी बंसीलाल ने करवाया था। शुरुआत में 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की कक्षा भी कॉलेज में ही लगती थी, जिसे राजकीय कॉलेज का नाम दिया था। वर्तमान सरकार ने इस कॉलेज का नाम बदलकर भिवानी के संस्थापक महाराजा नीमपाल सिंह के नाम पर किया। ऐसे में जर्जर पड़े भवन की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
पांच हजार से अधिक विद्यार्थी कर रहे पढ़ाई
एमएनएस राजकीय महाविद्यालय भिवानी में मौजूदा सत्र में 5149 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से करीब 40 प्रतिशत छात्राएं हैं। इनमें 1436 विद्यार्थी साइंस संकाय से पढ़ाई कर रहे हैं। कॉलेज में बीए, बीएससी, बीकॉम, एमए राजनीतिक शास्त्र, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान विषय के साथ एमकॉम है। कॉलेज मेें एक साल का पीजीडीसी डिप्लोमा भी करवाया जाता है। कक्षाएं सुबह और शाम दोनों शिफ्ट में लगती हैं, शाम के समय में एमए अंग्रेजी और राजनीतिक शास्त्र, बीए और बीकॉम की कक्षाएं लगती हैं।
कॉलेज का भवन कई जगह से जर्जर हो रखा है, जिसके कारण अक्सर हादसा होने का डर बना रहता है। बरसात के दिनों में तो छत में आई दरारों से पानी भी टपकने लगता है। दीवारों में भी दरारें आई हुई हैं, जोकि हादसे का कारण बन सकती है।
- सलीम, विद्यार्थी।
कॉलेज में विद्यार्थियों के फ्री समय में बैठने के लिए कोई विशेष कक्ष या हॉल नहीं है। साथ ही पार्क की हालत भी काफी खराब है। पार्क में उगी घास काफी बड़ी हो गई है, जिसकी वजह से वहां बैठना मुश्किल हो गया है। पानी पीने के लिए लगाए गए वाटर कूलर भी बंद पड़े रहते हैं।
- अंकित, विद्यार्थी
अक्सर लगने वाले बिजली कटों से विद्यार्थी काफी परेशान है। अब तक परीक्षा के दौरान भी बिजली के कट लग जाते हैं, जिसके कारण गर्मी के मौसम में काफी दिक्कतें रहती हैं। कॉलेज का भवन भी काफी जर्जर हो चुका है।
- सौरव, विद्यार्थी।
कॉलेज का भवन पुराना होने की वजह से कई जगह से जर्जर हो गया है, जिसके कारण छतों से मलबा गिरा हुआ है। भवन के जीर्णोद्धार और अधिक क्षतिग्रस्त हिस्से के नवनिर्माण के लिए दो-तीन बार कॉलेज प्रशासन की ओर से बीएंडआर विभाग को पत्र लिख चुके हैं मगर उनकी ओर से कोई प्रक्रिया नहीं आई है। जो हिस्सा अधिक जर्जर है वहां पर कॉलेज ने अपने स्तर पर लोहे के तार लगाए हैं ताकि कोई हादसा न हो।
- डॉ. सुरेश धायल, प्रिंसिपल,
एमएनएस राजकीय महाविद्यालय भिवानी।