आयुर्वेदिक पद्धति से कोई इलाज ले तो भी कैसे ले, जब आयुष विभाग के पास दवा ही नहीं हैं। विभाग की जरूरत की आधी दवा की सप्लाई रुकी हुई है। अस्पताल में 17 तरह की दवाओं का टोटा है। पथरी, गैस जैसी बीमारियों की दवा नहीं हैं। चिकित्सकों को 42 तरह की दवाओं की जरूरत है और उन्हें मिल रही हैं केवल 26 प्रकार की दवा। दवाओं के दो लैब से जांच के निर्णय के बाद दवाओं की सप्लाई अटकी हुई है। बताया जाता है कि जांच में करीब 15 दवाइयों के सैंपल फेल हो गए।
पिछले कुछ सालों से महज सात-आठ प्रकार की दवाइयों से ही स्वास्थ्य विभाग का आयुर्वेद विभाग चल रहा था। डॉ. साकेत कुमार आयुष विभाग के डायरेक्टर बनने के बाद 30 तरह की दवाइयां अस्पताल पहुंची। इसके बाद फिर दवाओं का टोटा हो गया। नियमानुसार कतरीब 42 तरह की दवाइयां अस्पताल में मिलनी चाहिए मगर यहां करीब 24 से 26 तरह की दवाइयां है। बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग ने एजेंसी से आने वाली दवाइयों की अपने स्तर पर भी लैब में जांच करवाने का निर्णय लिया। जिसके तहत करीब 15 प्रकार की दवाइयों के सैंपल फेल हो गए। इस कारण इन दवाइयों की सप्लाई रोकी गई। आयुर्वेद अस्पताल में फिलहाल त्रिफला चूर्ण, हिंग्वास्टिक चूर्ण, पत्थरी की दवाई, योगराज गूगल, वृषासिंदुक वटी, पूनर्वमंडूर, कुमारी आसावरिष्ठ, अशोकारिष्ट, खदिरारिष्ट जैसी दवाइयां खत्म है।
पंचकर्मा के लिए भी करना होगा इंतजार
सामान्य अस्पताल के आयुर्वेद विभाग में चार-पांच महीने पहले पंचकर्मा शुरू किया गया था। महिलाओं व पुरुषों के लिए अलग-अलग पंचकर्मा शुरू किया गया था। मगर स्टाफ की कमी के कारण सिर्फ पुरुषों के लिए पंचकर्मा सही तरह शुरू नहीं हो पाया है। फिजियोथेरपिस्ट, पुरुष थेरेपिस्ट, फार्मासिस्ट, कंपाउंडर की रिक्वायरमेंट भेजी हुई है मगर मुख्यालय से अभी मंजूरी नहीं मिली है। फिलहाल कुछ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के माध्यम से विशेष केसों में ही पंचकर्मा किया जाता है।
दवाइयों की कुछ दिन पहले कमी आई थी। अब शनिवार को कुछ सप्लाई आई है। हमारा प्रयास है कि मरीजों को हर तरह की दवाइयां अस्पताल से ही मिले। पंचकर्मा के स्टाफ की रिक्वायरमेंट भेजी हुई है।
डा. देवेंद्र शर्मा, इंचार्ज, आयुर्वेदिक विभाग