अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य भी रखा स्थगित, प्रधानमंत्री के नाम भेजा प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
भारतीय विधिक परिषद नई दिल्ली के आह्वान पर शुक्रवार को जिला बार एसोसिएशन ने अधिवक्ता अधिनियम 1961 में संशोधन के विरोध में अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य को स्थगित रखा। वहीं इस दौरान उन्होंने अधिवक्ता अधिनियम की प्रतियां भी जलाई। इसके बाद अधिवक्ताओं ने एसडीएम सुरेश कासवां के माध्यम से प्रस्ताव की एक प्रति देश के प्रधानमंत्री, विधि मंत्री, मुख्य न्यायाधीश, अध्यक्ष बार काउंसिल ऑफ इंडिया एवं अध्यक्ष बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा को भी भेजी गई है। इससे पूर्व अधिवक्ता दोपहर करीब 12बजे प्रस्तावित अधिवक्ता अधिनियम के विरोध में न्यायिक परिसर के बाहर एकत्रित होकर विधि आयोग के चेयरमैन बीएस चौहान के खिलाफ नारेबाजी की और अधिवक्ता अधिनियम की प्रतियां जलाईं।
बार एसोसिएशन के प्रधान मनीष वशिष्ठ एडवोकेट ने कहा कि विधि आयोग की संपूर्ण रिपोर्ट असंवैधानिक, व्यक्ति विरोधी, अधिवक्ता विरोधी एवं अलोकतांत्रिक है। यदि प्रधानमंत्री एवं विधि मंत्री एवं भारत सरकार उक्त रिपोर्ट एवं अनुसंशाओं को खारिज नहीं करते हैं तो व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा। प्रधान ने बताया कि जिला बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव पास करके भारत सरकार से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से विधि आयोग के अध्यक्ष बीएस चौहान को पदमुक्त करे। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन एवं बार काउंसिल में किसी भी तरह के बाहरी व्यक्तियों के हस्तक्षेप को बर्दास्त नहीं किया जाएगा। यदि सरकार 1 मई तक इस प्रस्तावित विधेयक को वापस नहीं लेती है तो 2 मई को नई दिल्ली में रैली आयोजित की जाएगी तथा उसके बाद जेल भरो आंदोलन किए जाएंगे।
इस अवसर पर बार एसोसिएशन के सचिव हरीश कुमार, उप प्रधान राजेंद्र सिंह, सह सचिव गजानंद दौचानिया, अनिल शर्मा बवानिया, महेश दीक्षित, विजयपाल सिंह, जयवीर यादव, यशवीर ढिल्लो, अरविंद यादव, सुभाष सैनी, वीरेंद्र सिंह सिहमा, भारत रत्न, ललित शर्मा, हुकुम चंद यादव, धर्मबीर गुलावला, सुशील सेहरावत, कैलाश चंद, राजेश सैनी, अजय खुड़ाना, दीपेंद्र गौड़, रवि शर्मा, रणधावा सिंह व हितेश यादव सहित अनेक अधिवक्तागण उपस्थित थे।