भिवानी। हांसी गेट के पास बैप्टिस्ट चर्च की करीब 200 करोड़ की भूमि की रजिस्ट्री घोटाले में वीरवार को चरखी दादरी की एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने तोशाम से रजिस्ट्री क्लर्क और भिवानी से एक नंबरदार को गिरफ्तार किया है। टीम दोनों को अपने साथ चरखीदादरी लेकर गई है।
घोटाले की जांच अब एसीबी चरखी दादरी ब्यूरो इकाई को सौंपी गई है। एसीबी के एडीजीपी आलोक मित्तल ने रजिस्ट्री क्लर्क और नंबरदार की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। इस मामले में भिवानी के तत्कालीन तहसीलदार रवींद्र मलिक व अन्य की पहले ही गिरफ्तारी हो चुकी है। मामला 2022 से स्टेट विजिलेंस के पास है।
बैप्टिस्ट चर्च की विवादित भूमि की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री मामले को अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इस प्रकरण में भिवानी के तत्कालीन तहसीलदार, रजिस्ट्री क्लर्क सहित नाै नामजदों व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हुआ था। विवादित भूमि के खरीदार जगजीत मलिक वासी पुट्ठी और गवाह राजेश फौगाट को पुलिस जेल भेज चुकी है।
बाद में इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार रवींद्र मलिक को बहादुरगढ़ से एसीबी की टीम ने पकड़ा था। इस प्रकरण में तत्कालीन भिवानी के उपायुक्त का भी नाम सामने आया था। इस मामले में रजिस्ट्री क्लर्क काफी अर्से से पुलिस के शिकंजे से बचता आ रहा था। उसने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका भी लगाई थी।
प्रशासनिक स्तर पर कराई गई जांच के बाद रजिस्ट्री क्लर्क को निलंबित कर दिया था, लेकिन अब उसे तोशाम में फिर से बहाल कर रजिस्ट्री क्लर्क लगाया गया था। वीरवार को चरखी दादरी के एसीबी के निरीक्षक कुलवंत की टीम ने तोशाम कार्यालय से रजिस्ट्री क्लर्क और नंबरदार को भिवानी से गिरफ्तार किया है।
दो साल बाद हुई रजिस्ट्री क्लर्क की गिरफ्तारी
बैप्टिस्ट चर्च भूमि फर्जी रजिस्ट्री प्रकरण में नामजद रजिस्ट्री क्लर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुए करीब दो साल हो गए हैं। इस मामले की शिकायत बैप्टिस्ट चर्च से जुड़े सदस्यों ने एसपी को दी थी। इसकी प्रारंभिक जांच तत्कालीन एसपी ने आर्थिक अपराध शाखा से कराई थी। आर्थिक अपराध शाखा की जांच के बाद एसपी के निर्देश पर इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार सहित नाै लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और बाद में मामला एबीसी के पास भेजा गया था, जिसकी जांच स्टेट विजिलेंस कर रही है।
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