आयुष्मान भारत योजना के प्रति अमर उजाला की ओर से चलाए जागरूकता अभियान के बाद अब अस्पताल में कार्ड बनवाने वालों की भीड़ उमड़ी। जितने लोग आयुष्मान का कार्ड बनवाने पहुंचे उससे कहीं ज्यादा जानकारी के लिए पहुंचे।
आयुष्मान भारत योजना के तहत भिवानी जिले में 54 हजार परिवारों को मुख्यमंत्री के पत्र भेजे गए थे। औसतन चार से पांच सदस्य प्रत्येक परिवार के माने जा रहे थे। जिसके तहत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को उम्मीद थी कि करीब 2.16 लाख गोल्डन कार्ड तो अवश्य ही बनेंगे। मगर ऐसा नहीं हो सका। जागरूकता के अभाव में महज 61 हजार ने ही गोल्डन कार्ड बनवाये। विभागीय सूत्रों की माने तो 54 हजार में से बमुश्किल 17 हजार परिवार ही योजना से जुड़े। जागरूकता के अभाव में लोगों को न गोल्डन कार्ड बनवाने की जानकारी थी और न ही गलतियां ठीक कराने का। अमन उजाला की ओर से लगातार प्रकाशित की जा रही आयुष्मान भारत योजना की जानकारी के बाद लोगों को इसके फायदे और खामियों को दूर करने संबंधित जानकारी मिली। जिसके बाद अब खासी संख्या में कार्ड बनवाने के लिए पात्र लोग पहुंच रहे है।
परिवार में सदस्य आठ, पत्र में सिर्फ दो का नाम
परिवार में सदस्य आठ है और पत्र में महज दो सदस्यों के ही नाम है। इस तरह की खामियां एक पत्र में नहीं बल्कि हजारों पत्रों में है। जानकारी के अभाव में लोग गलती ठीक कराकर अपने बाकी सदस्यों के नाम जुड़वाने की बजाए घर ही बैठे थे और अधिकतर पात्र परिवारों को इसका लाभ नहीं मिल रहा था। जागरूकता के बाद अब खासी संख्या में लोग इस तरह की खामियां दूर कराने भी पहुंच रहे है।
2005 से बीपीएल कार्ड है, फिर भी नहीं है लिस्ट में नाम
2005 से बीपीएल कार्ड, फिर भी लिस्ट में नाम नहीं है। यह आरोप है हालु बाजार वासी हरिराम के। हरिराम ने बताया कि आर्थिक हालत ठीक नहीं है और अब आय के साधन भी नहीं है। इस तरह की समस्या लेकर अनेक लोग अस्पताल पहुंचे। बीपीएल कार्ड होने का हवाला भी दिया। बावजूद इसके गोल्डन कार्ड नहीं बना है। लोगों ने इस पर आपत्ति भी जताई।
आयुष्मान भारत योजना बेहद ही कारगर और फायदेमंद योजना है। सभी पात्र परिवारों को इसका लाभ उठाना चाहिए। जिनके घर भी योजना के तहत पीएम के पत्र आए हुए है, उन सभी को अपने गोल्डन कार्ड बनवाने चाहिए। परिवार के सदस्यों के नाम नहीं होने जैसे खामियों को दूर किया जा रहा है।
डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता
सिविल सर्जन