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आयुष्मान : विशेष अभियान चलाकर बनाए जाएंगे गोल्डन कार्ड

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ayushman - फोटो : Bhiwani
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भिवानी। प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी योजना आयुष्मान भारत अभियान जागरूकता के अभाव में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को जोड़ने में पूरी तरह कारगर नहीं हो पाया। कारण रहा जागरूकता का अभाव। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में 54 हजार परिवारों को पीएम के लेटर भेजे गए थे। जिनके आधार पर अनुमान लगाया जा रहा था कि प्रथम चरण में करीब दो लाख 16 हजार लोग कार्ड बनवा कर फायदा उठाएंगे। मगर जागरूकता के अभाव में महज 61 हजार लोगों ने ही गोल्डन कार्ड बनवाये। यानी 54 हजार परिवारों में से बमुश्किल 20-22 हजार परिवार ही इससे जुड़ पाए। अब स्वास्थ्य विभाग ने सभी पात्रों को योजना से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने की योजना बनाई है।
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योजना के तहत 15 से 30 सितंबर तक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान आशा वर्कर डोर टू डोर पहुंचकर लोगों को योजना के प्रति जागरूक करेंगी। प्रभात फेरी निकाली जाएगी और स्कूली स्तर पर कार्यक्रम होंगे। इतना ही नहीं जिलेभर में योजना से संबंधित होर्डिंग, बैनर, पोस्टर लगाए जाएंगे। जिला अस्पताल के अलावा सभी सीएचसी, पीएचसी और सब सेंटरों पर जागरूकता कार्यक्रम किए जाएंगे।
यहां लोगों में नाराजगी भी
कुछ लोगों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत कार्ड बनने के बावजूद लाभ नहीं मिलने के आरोप लगाए है। लोगों का आरोप है कि भिवानी में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है और दूसरे जिलों के अस्पताल मोटी फीस वसूलते है।
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कर्ज लेकर 60 हजार में कराया इलाज
मैं मील से रिटायर्ड हूं और करीब ढाई हजार रुपये पेंशन मिलती है। उसकी पेंशन, बुढ़ापा पेंशन और पत्नी की बुढ़ापा पेंशन के सहारे घर चलता है। शुगर की बीमारी थी। सरकारी अस्पताल में इलाज कराया। हालत सुधरने की बजाए बिगड़ती गई। इस कारण लीवर इंफेक्शन हो गया। कीडनी भी क्षतिग्रस्त हो गई। चार बेटियां है, जिनकी शादी कर चुका हूं। अब कुछ रुपये उधार लिए, कुछ बेटियों ने सहारा दिया, तब जाकर हिसार में इलाज हुआ। आयुष्मान भारत का कार्ड बना हुआ हैमगर अस्पताल संचालकों ने इंकार कर दिया। यह कहना हैलेबर कॉलोनी वासी बुजुर्ग रामकिशन (63) का। रामकिशन ने बताया कि अब तक उन्हें इस कार्ड का कोई लाभ नहीं मिला। सरकार को चाहिए कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि सभी को इसका लाभ मिले।
दामादों ने कराया इलाज, नहीं तो हो रही थी परेशानी
चिरंजीव कॉलोनी निवासी राजबीर भाटी ने बताया कि उसकी चार बेटियां है, जिनकी शादी हो चुकी है। वह मिल से रिटायर है और पेंशन के सहारे ही घर चलता है। जनवरी माह के पहले सप्ताह में उसे लकवे की शिकायत हुई। उसने भिवानी व हिसार में जांच करवाई मगर इलाज नहीं हुआ। उसकी आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है। ऐसे में आयुष्मान भारत के कार्ड से इलाज कराना चाहा मगर कोई राहत नहीं मिली। बाद में दो दामादों ने हिसार के एक निजी अस्पताल में उसका इलाज कराया। इलाज पर करीब 36 हजार रुपये खर्चा आया। दवाइयां अभी भी चल रही है। जिस उम्मीद के साथ आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना का कार्ड बनवाया था, उसमें यह कार्ड कोई काम नहीं आया।
आयुष्मान भारत योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेहद ही फायदेमंद योजना है। पहले भी लोगों को इस योजना के बारे में काफी जागरूक किया है। अब 15 से 30 सितंबर तक विशेष अभियान चलाकर लोगों को इस योजना के बारे में जागरूक किया जाएगा।
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-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
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