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पुराने कॉमर्शियल वाहनों को एनसीआर में चलाने से बचें : डीसी

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भिवानी। डीसी साहिल गुप्ता ने निजी बस, ट्रक और माल वाहन मालिकों से पुराने कॉमर्शियल वाहनों को एनसीआर में चलाने या लेकर आने से बचने की अपील की है। उन्होंने निर्धारित समय सीमा और प्रदूषण मानकों के दायरे में आने वाले वाहनों को सरकार की परिवर्तन योजना के तहत बदलने को कहा।
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डीसी ने लघु सचिवालय स्थित डीआरडीए हॉल में रोड सेफ्टी की समीक्षा बैठक में कहा कि वाहन मालिक पुराने वाहन चलाने के बजाय योजना का लाभ लेकर नए और कम प्रदूषण वाले वाहन अपना सकते हैं। इससे नियमों के उल्लंघन से बचने के साथ आर्थिक लाभ भी मिलेगा। उन्होंने अधिकारियों को योजना की जानकारी अधिक से अधिक वाहन मालिकों, स्कूल संचालकों और ट्रांसपोर्टरों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एनसीआर में चलने वाले पुराने और प्रदूषण फैलाने वाले ट्रकों व बसों को बदलने के लिए यह योजना शुरू की है। इसके तहत बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 और बीएस-4 श्रेणी के पुराने वाहनों की जगह बीएस-6 मानक वाले या इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने पर प्रोत्साहन दिया जाएगा।
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डीसी ने कहा कि पुराने प्रतिबंधित वाहन चलाकर परेशानी उठाने के बजाय समय रहते उन्हें बदलना बेहतर विकल्प है। इससे वायु प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी और वाहन मालिक योजना का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने कहा कि योजना पर्यावरण संरक्षण के साथ वाहन मालिकों को आर्थिक रूप से भी लाभ पहुंचाएगी।

स्क्रैप कराने पर टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट
डीसी ने बताया कि बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 श्रेणी के पुराने वाहन अधिकृत स्क्रैपिंग केंद्र में जमा कराने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार वाहन मालिकों को 10 वर्ष तक मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत और पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत छूट मिल सकती है। वाहन निर्माता की ओर से वाहन की कीमत में आठ प्रतिशत तक अतिरिक्त छूट और पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान समेत अन्य लाभ भी मिल सकते हैं। बैठक में एसडीएम महेश कुमार, डीडीपीओ सोमबीर कादयान, डीएसपी अनूप और डीईओ निर्मल दहिया मौजूद रहे।
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