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दिखाने के लिए प्रबंध, बेसहाराओं के प्रवेश पर प्रतिबंध

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01 फोटो रेलवे स्टेशन के बाहर खुले आसमान के नीचे फुटपाथ पर बिस्तर लगाकर सो रहे लावारिस लोग। सर्दी मे - फोटो : Bhiwani
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संजय वर्मा
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भिवानी। बेसहाराओं को कंपकंपाती सर्दी से बचाने के लिए नगर परिषद ने शानदार प्रबंध किए हैं। नगर परिषद के कॉन्फ्रेंस हॉल के अंदर बिस्तर, रजाई और रूम हीटर की व्यवस्था की हुई है। फर्स भी चकाचक दिखता है। ये सारे प्रबंध सिर्फ दिखावे के लिए किए गए हैं, क्योंकि बेसहारा लोगों को उसमें प्रवेश देने पर प्रतिबंध लगा रखा है। कहीं सहारा नहीं मिलने के कारण एक सप्ताह में शहर में तीन लावारिस लोगों की मौत भी हो चुकी है।
हमारी टीम ने रेलवे स्टेशन रोड, स्टेशन के अंदर, नागरिक अस्पताल, वैश्य महाविद्यालय के आसपास आदि क्षेत्रों का जायजा लिया तो खुले आसमान और बरामदों के नीचे कई लावारिस सोते हुए मिले। इन लोगों से जब पूछा गया कि आप रैन बसेरों में क्यों नहीं जाते हो तो उन्होंने जवाब दिया कि हमें वहां अंदर घुसने नहीं दिया जाता है।
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खुले में सो रहे लावारिस लोगों के पास ठिकाना तलाशते हैं पशु
दिन और रात का तापमान काफी कम है। पारा जमाव बिंदु के करीब है। रेलवे स्टेशन के फुटपाथ पर काफी लावारिस लोग सिर्फ एक कंबल को ओढ़े खुले आसमान के नीचे जमीन पर पड़े दिखे। इनके पास आसपास ही लावारिस कुत्ते और लावारिस सांड़ भी घूमते रहे। वे भी ठंड से निजात पाने का ठिकाना तलाश रहे थे।
बेरहम ठंड ने लावारिस पशुओं और लावारिस लोगों को एक ही जगह पर ला खड़ा कर दिया। मगर ये जगह भी सुरक्षित आशियाना तो कतई नहीं कहा जा सकता है। पिछले एक सप्ताह में शराब के नशे और खुले में फुटपाथ पर रात को सो रहे तीन लावारिस लोगों की मौत हो चुकी है। इन मामलों में पुलिस ने भले ही उनकी गुमनाम मौत हो कागजों में दफन कर दिया
भिवानी नगर परिषद ने नप कार्यालय के अंदर हॉल ही में बनकर तैयार हुए कॉन्फ्रेंस हॉल को रैन बसेरा बनाया है। यहां अंदर का नजारा किसी अस्पताल के वार्ड से कम नहीं हैं, जहां सर्दी से बचाव के लिए रूम हिटर तक लगे हैं और बिस्तरों का भी अच्छा खासा इंतजाम हैं, मगर इन बिस्तरों पर कुछ ही लोगों को सुकून से रात बिताने का मौका मिल रहा है, जबकि लावारिस घूमने वालों के लिए यहां प्रवेश पर भी प्रतिबंध है।
इसकी एक वजह यह भी मानी जा रही है कि लावारिस लोग शराब के नशे में व बिस्तरों को गंदा कर जाते हैं, जिसकी वजह से कर्मचारी उनको अंदर आने से रोक देते हैं। ऐसे में जमा देने वाली ठंड में भी लावारिस लोग दुकानों के गलियारों व खुली फुटपाथ पर ही ठंडी रात बिताने पर विवश हो गए हैं। दिनभर खानाबदोश की तरह इधर उधर घूमकर पेट भरने वाले लोग सर्द रात में जब सोने का ठिकाना ढूंढते हैं तो उन्हें सिर्फ रेलवे स्टेशन का खुला फुटपाथ और बंद दुकानों के आगे खाली पड़े गलियारे ही नजर आते हैं, यहां पर भी उन्हें चैन इसलिए नहीं मिलता है, क्योंकि लावारिस कुत्ते और पशु भी उनके पास ही ठंड से बचाव के लिए पहुंच जाते हैं। अंधेरे में ये पशु ऐसे लोगों को चोटिल करने से भी नहीं चूकते। ठंड से बचाव के लिए यहां अलाव की भी कोई व्यवस्था नहीं हो पाती।
साहब पैरों से चला नहीं जाना, रैन बसेरा का भी नहीं पता
फुटपाथ पर रात बिता रहे रामलला, बच्चू सिंह, रामभूल ने बताया कि हमारे पास रात बिताने के लिए कोई ठिकाना नहीं है। रामलला ने तो बताया कि वह दिव्यांग है, उसके पैर नहीं होने के कारण चला भी नहीं जाता है। मुझे यह भी नहीं पता है कि रैन बसेरा कहा हैं। जहां जगह मिली वहीं रात बिता ली। हमारी जिंदगी भी कोई जिंदगी है। हमें तो सब दुत्कार देते हैं, इसलिए ज्यादा कुछ कह भी नहीं सकते हैं। हमें कोई खाने को दे दे तो खा लेते हैं, नहीं मिला तो भूखे पेट ही सो जाते हैं। ठंड ज्यादा है। साहब इसलिए रात रात भर जागते हैं, क्योंकि ठंड की वजह से रात भर कंपकंपी बंद नहीं होती, कई बार तो बुखार भी आ जाता है। हम मर भी गए तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लोगों की जिंदगी यूं ही चलती रहेगी।
इन जगहों पर खुले में सो रहे लावारिस
रेलवे स्टेशन रोड, वैश्य कॉलेज के पास, नागरिक अस्पताल के सामने दुकानों के गलियारे, घंटाघर, रेलवे स्टेशन के बाहर, रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म के अंदर, रेलवे वेटिंग हॉल, नगर परिषद कार्यालय के बाहर दुकानों के सामने लावारिस लोग खुले में रात बिताने को मजबूर हैं।
खुले में सोना जानलेवा
ज्यादा ठंड के दौरान अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त गर्म कपड़े व बिस्तरों का इस्तेमाल नहीं करता है तो उसे हाईपोथर्मियां होने का खतरा अधिक रहता है। जिसकी वजह से हार्ट बीट पर भी बुरा असर पड़ता है। ठंड के मौसम में अधिक उम्र दराज लोगों को भी ज्यादा खतरा बना रहता है। खुले आसमान के नीचे ठंडी रात में सोना भी मौत की वजह बन सकती है। बचाव के लिए गर्म कपड़ों के इस्तेमाल के साथ-साथ पर्याप्त ऊर्जा देने वाला भोजन भी जरूरी है। किसी तरह की परेशानी में सेहत की नियमित जांच भी कराएं।
-डॉ. यतीन गुप्ता, सीनियर फिजिसियन, नागरिक अस्पताल भिवानी।
किसी के लिए प्रतिबंध नहीं, खुद लूंगा जायजा
प्रशासन के निर्देश पर सभी जरूरतमंदों के लिए रैन बसेरे बनाए गए हैं। इनमें किसी के रात बिताने पर कोई प्रतिबंध नहीं हैं। रैन बसेरों के रखरखाव के लिए भी कर्मचारियों की व्यवस्था कराई गई है। मैं खुद रात के समय हालातों का जायजा लूंगा और जरूरत के अनुसार उचित व्यवस्था भी कराई जाएगी।
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-महेश कुमार, नगराधीश भिवानी।
20 मुसाफिरों के लिए कराई है अच्छी व्यवस्था
हमने नगर परिषद की तरफ से रैन बसेरे में 20 मुसाफिरों के ठहरने की अच्छी व्यवस्था कराई है। रूम हीटर भी लगाए गए हैं। किसी के प्रवेश पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन रैन बसेरे में व्यवस्था बनाना भी जरूरी है। मैं इस संबंध में सफाई निरीक्षक को भी जरूरी हिदायतें दूंगा, जिससे लावारिस लोगों को अधिक से अधिक यहां ठहरने की उचित व्यवस्था बन सके।
-मनेंद्र श्योकंद, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद भिवानी।
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