भिवानी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा धान के फसल अवशेषों के प्रबंधन हेतु सप्लाई चेन स्थापित करने के लिए 15 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए हैं। यह आवेदन एग्रीहरियाणा पोर्टल (agrimachineryhry.gov.in) पर किए जा सकते हैं। योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट घटक में लागू की जा रही है।
उप कृषि निदेशक डॉ. विनोद फोगाट ने बताया कि 1 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट बनाए जा सकते हैं। इसमें कृषि विभाग प्रोजेक्ट लागत का 65 प्रतिशत अनुदान देगा। शेष राशि में से 25 प्रतिशत खर्च संबंधित उद्योग द्वारा और 10 प्रतिशत एग्रीगेटर द्वारा वहन किया जाएगा। कोई एग्रीगेटर यदि सीधे आवेदन करता है, तो उसे प्रोजेक्ट लागत का 35 प्रतिशत वहन करना होगा और शेष के लिए बैंक से वित्तीय सहायता लेनी होगी।
सहायक कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने बताया कि भिवानी जिले में हर वर्ष करीब एक लाख टन धान का फसल अवशेष उत्पन्न होता है। योजना का उद्देश्य पराली प्रबंधन को बढ़ावा देना और आगजनी की घटनाओं को रोकना है। कोई भी बायोमास उद्योग, एफपीओ, किसान समूह या व्यक्तिगत किसान आवेदन कर सकता है। द्विपक्षीय समझौते वाले एग्रीगेटर, 100 प्रतिशत पराली आधारित उद्योग और पिछले दो वर्षों में पराली क्रय करने वाले एग्रीगेटर्स को प्राथमिकता दी जाएगी। योजना की शर्त है कि लाभार्थी को प्रति सीजन 3000–4500 टन फसल अवशेषों का प्रबंधन करना होगा।
आवेदनकर्ता इन बातों का रखें ध्यान
आवेदन की अंतिम तिथि: 15 जुलाई
आवेदन पोर्टल: agrimachineryhry.gov.in
जरूरी दस्तावेज: बैंक अप्रूवल, प्रोजेक्ट रिपोर्ट आदि
समीक्षा तिथि: 21 जुलाई को जिलास्तरीय समिति द्वारा परीक्षण
अंतिम स्वीकृति: राज्य स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदन के बाद
अनुदान पर मिलने वाले प्रमुख यंत्र
200–500 किलो क्षमता वाले बेलर
हे-रेक व टेडर मशीन
रोटरी स्लेशर व ऑटोमेटिक ट्रॉली
टेली हैंडलर
नमी मापक यंत्र
वाटर टैंक व अग्निशामक
ट्रैक्टर