भिवानी। नगर परिषद में फर्जी दस्तावेज से प्रॉपर्टी आईडी बनवाकर भूमि रजिस्ट्री कराने के मामले में आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार की अदालत ने आरोपी महिला की अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के बाद उसे खारिज किया है। आरोपी महिला राजबाला सहित नगर परिषद के कनिष्ठ अभियंता आबिद हुसैन, लिपिक नीरज के खिलाफ शहर थाना पुलिस में 17 फरवरी को धोखाधड़ी की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज है। हालांकि इस मामले में आरोपी नगर परिषद के कनिष्ठ अभियंता की तरफ से भी अग्रिम जमानत के प्रयास किए जा रहे हैं।
दरअसल मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रोहतक के निरीक्षक सुनील कुमार की शिकायत पर शहर थाना पुलिस भिवानी में आरोपी महिला राजबाला, नगर परिषद के कनिष्ठ अभियंता आबिद हुसैन व लिपिक नीरज के खिलाफ धोखाधड़ी की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही हड़कंप मचा है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता की तरफ से पुलिस अधीक्षक कार्यालय को ये शिकायत 12 फरवरी को दी गई थी। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रोहतक को 25 सितंबर 2025 को शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसमें परशुराम कॉलोनी में भूमि मालिकों ने नगर परिषद, तहसील के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत करके दस्तावेजों में छेड़छाड़ की गई और फिर संपत्ति आईडी की श्रेणी बदलकर अनधिकृत क्षेत्र को अधिकृत क्षेत्र दिखाया गया। नगर परिषद से गलत दस्तावेजों के सहारे धोखाधड़ी से एनडीएस (नो ड्यूज सर्टिफिकेट) प्राप्त किया गया और विक्रय दस्तावेज को अनधिकृत तरीके से पंजीकृत कराया गया।
आरोपी महिला राजबाला ने जानबूझकर वर्ष 2021-22 की जमाबंदी, राजस्व रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की और एनडीसी के लिए पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेजों में गलत तरीके से एक अन्य खसरा संख्या दर्ज की गई। इसके बाद नगर परिषद के लिपिक नीरज और नगर परिषद के कनिष्ठ अभियंता आबिद हुसैन ने भौतिक निरीक्षण किए बिना और आधिकारिक अभिलेखों की अनदेखी करते हुए उपर्युक्त संपत्ति आईडी की श्रेणी को अनधिकृत क्षेत्र से अधिकृत क्षेत्र में बदल दिया और एनडीसी जारी कर डाली। इन एनडीसी के आधार पर राजस्व विभाग के तत्कालीन डीआरओ सुरेश ने 30 सितंबर 2024 को दो अलग-अलग वसीका पंजीकृत कर दी गई। इसी तरह तत्कालीन डीआरओ राजकुमार ने भी 25 सितंबर 2025 वसीका पंजीकृत कर डाली।
इस संबंध में शहर थाना पुलिस में दर्ज धोखाधड़ी की प्राथमिकी में गिरफ्तारी की आशंका के चलते आरोपी महिला राजबाला ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन दायर किया। जिसकी सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मनीष कुमार ने 25 फरवरी को सुनवाई की। इस दौरान जांच एजेंसी ने प्रस्तुत जमानत आवेदन के जवाब में बताया कि मामले में अभी तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। मामले की उचित जांच के लिए याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। इस पर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने राजबाला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दिया।