भिवानी। जिले का गांव अलखपुरा जहां हर घर से बेटी फुटबाल को पैरों पर नचाने में माहिर है। इन बेटियों की बदौलत गांव अलखपुरा को विश्व पटल पर मिनी ब्राजील की पहचान मिली हुई है। गांव में करीब 200 से अधिक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय महिला फुटबाल खिलाड़ियों सहित स्कूली लड़कियां रोजाना गांव के खेल मैदान में सुबह शाम अभ्यास करती हैं।
गांव की बेटियों को खेल के दम पर सेना, सीआरफीएफ, रेलवे, अध्यापक, क्लर्क, ग्रुप डी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी हासिल कर चुकी हैं। जानकारी देते हुए नर्सरी कोच बनीता ने बताया कि फिलहाल गांव की 35 बेटियों को सरकारी नौकरी मिल चुकी है। गांव की 25 महिला खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय व फुटबाल विश्व कप मैच खेल चुकी हैं।
गांव की 80 महिला खिलाड़ी इंडियन वुमन लीग का हिस्सा हैं। गांव की बेटी खेल में ही नहीं बल्कि सेना में भर्ती होकर देश सेवा भी कर रही हैं। गांव में हर घर में बेटियां फुटबाल की राज्य स्तर, नेशनल स्तर व अंतर राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी हैं। अलखपुरा की महिला फुटबाल टीम ने 2014 में सुब्रतो चैंपियनशिप जीती थी। इसके बाद 2016 में भी फिर से जीत दर्ज कराई। हाल में मद्रास सुपर कप में भी स्वर्ण पदक हासिल किया है। इसमें खिलाड़ी खुशबू को बेस्ट स्कोर के अवार्ड से नवाजा गया।
महिला खिलाड़ियों को मिली नौकरी का विवरण
एसएसबी : समीक्षा, पूजा, सुषमा, ममता, मंजू, पूनम शर्मा।
सीआरपीएफ : निशा, ज्योति यादव, जूनियर कोच दीपिका, पूजा यादव, मुनेश रानी, रीतू रानी, पूनम यादव।
रेलवे : संजू यादव, कविता यादव, रवीना यादव।
असम राइफल : नीलम, पूजा, संतोष।
ग्रुप डी : प्रमिला, शारदा, ज्योति यादव, वर्षा यादव, संजू रानी।
ग्रुप सी : तनूजा।
दिल्ली पुलिस : ज्योति यादव।
नर्सरी कोच : बनीता।
ऐसे हुई थी गांव में लड़कियों की फुटबाल खेल की शुरुआत
गांव के हाईस्कूल में को एजुकेशन थी। 2006 में गांव के लड़कों के लिए कबड्डी खेल की शुरुआत हुई थी। लड़कों को खेलते हुए देख लड़कियों के मन में भी खेल की जिझासा जागी। स्कूल में फुटबाल खेल का सामान आया था। पीटीआई गोवर्धन ने लड़कियों को फुटबाल खेल से अभ्यास की अनुमति दे दी। शुरुआत में लड़कियों ने अच्छा प्रदर्शन किया। इसके बाद लड़कियों की टीमें स्कूली खेलों में अव्वल आने लगी। इसके बाद तो फिर लड़कियों ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और गांव के हर घर से लड़की इस खेल में शामिल होने लगी।
गांव अलखपुरा मैदान में हर घर से बेटियां फुटबाल खेल अभ्यास के लिए आ रही हैं। गांव की लड़कियों में खेल के प्रति उत्साह बहुत ज्यादा है। भारतीय महिला फुटबाल में भी गांव की बेटियों ने अपनी जगह बना रखी है। इसी वजह से इस गांव को मिनी ब्राजील के नाम से जाना जाता है।
- सुरेश कुमार, प्रधान अलखपुरा फुटबाल कल्ब।
खेल विभाग ने मुझे 2014 से यहां तैनात किया हुआ है। अब तक काफी अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय स्तर की महिला फुटबाल खिलाड़ी खेल स्पर्धाओं में जीत दर्ज करा चुकी हैं। खेल मैदान में अभ्यास कर महिला खिलाड़ी सरकारी नौकरी भी हासिल कर चुकी हैं। फुटबाल क्लब अलखपुरा की टीम विश्व स्पर्धाओं में भी मुकाम हासिल कर चुकी हैं।
- सोनिका बिजारनिया, महिला फुटबाल खेल प्रशिक्षक गांव अलखपुरा