शहर की हवा एक बार फिर खतरनाक हो गई है। शहर का वायु प्रदूषण 362 एक्यूआई तक पहुंच गया है। आसमान में लगातार दूसरे दिन स्मॉग की चादर छाई रही। खतरनाक हुई हवा का लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ज्यादा समय तक ऐसी हवा में सांस लेना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। चिकित्सकों ने सभी लोगों को घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाने की सलाह दी है।
शनिवार ही नहीं शुक्रवार को भी प्रदूषण का स्तर 362 एक्यूआई दर्ज किया गया था। आसमान में सुबह और शाम के समय स्मॉग की चादर देखी गई। प्रदूषण के कारणों में भले ही पराली जलाना या पटाखे चलाना बताया जा रहा हो मगर विशेषज्ञों के अनुसार इंडस्ट्रीज एरिया में फैक्ट्रियों का धुआं, शहर में जगह-जगह जलता कचरा, जनरेटर से निकलता धुआं और वाहनों की बढ़ती संख्या भी प्रदूषण बढ़ाने का बड़ा कारण है।
पीएम 2.5 की मात्रा पहुंची 399 पार, पीएम 10 भी हुआ 313 : प्रदूषण में पार्टिकल पीएम 2.5 और पीएम 10 का अहम रोल होता है। शनिवार को पीएम 2.5 की मात्रा 399 तक पहुंच गई जबकि पीएम 10 भी 313 दर्ज किया गया। यह आंकड़ा खतरनाक माना जाता है।
सांस के मरीजों के लिए घातक है प्रदूषण का बढ़ता स्तर : प्रदूषण सांस के मरीजों के लिए घातक है। पिछले माह भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा तो सांस के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई थी। अब फिर से वहीं हालात बनते जा रहे है। बच्चों को भी सांस संबंधित समस्याएं सामने आ रही है।
नवंबर माह में आफत बना रहा प्रदूषण
नवंबर माह में प्रदूषण का स्तर 500 एक्यूआई के आंकड़े को पार गया था। करीब 15 दिन प्रदूषण का बढ़ा स्तर लोगों के लिए परेशानी बना। मजबूरन स्कूलों में बच्चों की छुट्टियां तक करानी पड़ी और शहर के मुख्य मार्गों पर पानी का छिड़काव भी करवाया गया। शनिवार को भी शहर के कुछेक मार्गों पर पानी का छिड़काव करवाया गया।
प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। इसके अनेक कारण है। बारिश की संभावनाएं जताई जा रही है। जिसके बाद प्रदूषण के स्तर में सुधार होगा।
हरीश कुमार, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
प्रदूषण का बढ़ना बच्चों और ज्यादा उम्र के लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है। सांस के मरीजों को सांस लेने में ज्यादा तकलीफ हो जाती है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि जहां तक जरूरी न हो घर से बाहर न निकले और निकलते समय मुंह पर मास्क पहनकर निकले।
डॉ. राज महता, बाल रोग विशेषज्ञ