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सांस लेना हुआ मुश्किल, 477 पहुंचा एक्यूआई

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28 फोटो शाम छह बजे हांसी रोड ओवरब्रिज पर छाई स्मॉग के बीच लाइट जलाकर गुजरते वाहन - फोटो : Bhiwani
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लगातार दूसरे दिन शहर की हवा बेहद खतरनाक स्तर पर रही। प्रदूषण का स्तर 477 एक्यूआई रहा। दिनभर सामान्य तौर पर प्रदूषण घटता-बढ़ता रहता है। मगर बुधवार को प्रदूषण सुबह नौ से दोपहर बाद तीन बजे तक यानी लगातार छह घंटे 477 एक्यूआई रहा। जो कि चिंता का विषय है। प्रदूषण के पार्टिकल पीएम 2.5 की मात्रा 500 के आंकड़े को पार गई वहीं पीएम 10 भी 480 रहा। यह बेहद खतरनाक स्तर है और इतने प्रदूषण में सांस लेना शरीर के लिए काफी नुकसानदायक है। लोगों एलर्जी, सांस लेने तक तकलीफ, गले में दिक्कत की समस्या से जूझते रहे। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 14 नवंबर की शाम से प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी।
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दिवाली के बाद से ही पर्यावरण का स्तर बिगड़ा हुआ है और प्रदूषण बहुत ज्यादा बढ़ गया है। बिगड़ा प्रदूषण लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। दिवाली के बाद करीब एक सप्ताह तक प्रदूषण का स्तर बेहद खराब रहा और एक्यूआई पांच सौ तक पहुंच गया था। इसके बाद करीब सप्ताहभर तक राहत रही मगर पिछले तीन दिन से यह एक बार फिर खतरनाक हो गया है। मंगलवार को जहां प्रदूषण का स्तर 424 एक्यूआई दर्ज किया गया था वहीं बुधवार को यह 477 एक्यूआई तक पहुंच गया। दिनभर आसमान में स्मॉग की सफेद चादर छाई रही और धूप भी बेहद कम रही। इतना ही नहीं चार बजे ही दिन ढलने लगा था और ऐसे लगने लगा था मानो छह-सात बज चुके हों।
खतरनाक हुई हवा में सांस लेना भी लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। ओपीडी में सांस लेने में तकलीफ के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई है। ज्यादातर बच्चे और बुजुर्ग है। अनेक लोग आंखों में जलन, खांसी, नाक और गले में इंफेक्शन की समस्या से भी पीड़ित हो गए है। बुजुर्गों और बच्चों में सांस लेने की समस्या रही। ओपीडी के बाद इमरजेंसी में भी मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे है।
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पीएम 2.5 की मात्रा पहुंची 500
प्रदूषण में पार्टिकल पीएम 2.5 और पीएम 10 का अहम रोल होता है। इनकी मात्रा भी लगातार बढ़ रही है। मंगलवार को पीएम 2.5 की मात्रा 480 दर्ज की गई थी, जो बुधवार को 500 के आंकड़े को पार गई। पीएम 10 की मात्रा भी बढ़कर 480 तक पहुंच गई है।
सांस लेना हो रहा मुश्किल
प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। विशेषज्ञों की माने तो इतने प्रदूषण में सांस लेने का मतलब करीब 10 सिगरेट पीने के समान है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदूषण का बढ़ा स्तर स्वास्थ्य के लिए कितना घातक साबित हो रहा है। सांस के साथ प्रदूषण के कण नाक से शरीर में प्रवेश कर रहे है। लोगों को सांस लेने में समस्या हो रही है वहीं नाक और गले में इंफेक्शन के केस भी बढ़ गए है। आंखों में जलन हो रही है।
पिछले कुछ दिनों का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडक्स)
तिथि एक्यूआई
13 नवंबर 477
12 नवंबर 424
11 नवंबर 271
10 नवंबर 185
09 नवंबर 179
08 नवंबर 214
07 नवंबर 211
06 नवंबर 196
05 नवंबर 200
04 नवंबर 359
03 नवंबर 409
02 नवंबर 500
01 नवंबर 500
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क्या है एक्यूआई के मापदंड
एक्यूआई प्रभाव
0-50 अच्छा
51-100 औसत
101-200 मॉडरेट
201 से 300 खराब
301 से 400 ज्यादा खराब
400 से ज्यादा बेहद खतरनाक
प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। इसके कई कारण है, जिनमें धूल, कचरा जलाना, पराली जलाना, पटाखे चलाना, ज्यादा व्हीकल चलना आदि। 14 नवंबर की शाम से प्रदूषण के स्तर में सुधार होगा।
- हरीश कुमार, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
प्रदूषण का बढ़ता स्तर सभी के लिए नुकसानदायक है। लंबे समय तक यह रहता है तो ज्यादा नुकसानदायक रहेगा। बच्चों में सांस लेने में तकलीफ की समस्या बढ़ रही है। इसके अलावा यह दमा मरीजों के लिए भी खतरनाक है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि जहां तक संभव हो घर के अंदर ही रहे। बाहर जाना पड़े तो मास्क का प्रयोग करें। आंखों के बचाव के लिए बार-बार आंखों को धोये।
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- डॉ. राज महता, बाल रोग विशेषज्ञ
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