एडीजीपी वाई पूरण कुमार और मनीषा की फाइल फोटो
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अपनी कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में रहने वाले एडीजीपी वाईपूर्ण कुमार मनीषा मामले भी सुखिर्यों में रहे थे। मामले में वे तब सुर्खियों में आ गए थे जब उन्होंने इस मामले को आत्महत्या बताया था। उस वक्त वाई पूर्ण कुमार रोहतक रेंज के आईजी थे।
19 अगस्त को रोहतक पीजीआई से दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उन्होंने भिवानी रेस्ट हाउस में प्रेस वार्ता कर बताया था कि मनीषा की मौत आत्महत्या है। इसी दौरान उन्होंने यह भी बताया था कि पुलिस को मनीषा का सुसाइड नोट मिला है। वाई पूर्ण कुमार के इस बयान के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया और हरियाणा समेत दूसरे राज्यों में भी न्याय की मांग तेज हो गई। विरोध बढ़ता देख 20 अगस्त की देर रात मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की घोषणा की।
19 वर्षीय प्ले स्कूल शिक्षिका मनीषा की मौत के बाद आईजी वाई पूर्ण कुमार ने कहा था कि भिवानी पुलिस ने मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच की है। दो बार शव का पोस्टमार्टम कराया गया और चिकित्सकों की ओपिनियन रिपोर्ट में मौत के कारणों का विस्तृत उल्लेख किया गया है। आईजी ने बताया था कि 13 अगस्त को सीन ऑफ क्राइम के दौरान ही पुलिस को सुसाइड नोट बरामद हुआ था।
शरीर के कुछ अंग गायब होने के सवाल पर आईजी ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जो अंग नहीं मिले वे पहली पोस्टमार्टम के दौरान विसरा जांच के लिए निकाले गए थे। इसलिए वे शरीर में नहीं थे। हालांकि वाई पूर्ण कुमार के इस खुलासे ने लोगों को चौंका दिया और ग्रामीणों में आक्रोश भड़क उठा। गुस्साए ग्रामीणों ने 19 अगस्त को ढिगावामंडी में धरना देकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान आईजी वाई पूर्ण कुमार, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और भारी पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे। वाई पूर्ण कुमार पूरी रात ढिगावा रेस्ट हाउस में ही रुके और स्थिति की निगरानी करते रहे।
प्रशासन द्वारा ग्रामीणों और परिजनों को समझाने के प्रयास किए गए लेकिन जब स्थिति नहीं संभली तो अगले दिन तत्कालीन डीजीपी को भिवानी पहुंचकर पूरे मामले पर सफाई देनी पड़ी। इसके बावजूद विरोध थमा नहीं जिसके बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 20 अगस्त की रात करीब डेढ़ बजे मामले को सीबीआई को सौंपने की घोषणा की। इसके अगले दिन 21 अगस्त को मनीषा का अंतिम संस्कार किया जा सका।