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हर रोज हादसों का सबब बन रहे हैं लावारिस पशु

Wed, 17 May 2017 12:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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लावारिस पशुओं को लेकर अदालत की चिंता और कड़े रुख के बाद अब समस्या के समाधान की उम्मीद जागी है। अदालत का फैसला ऐसे समय आया है, जब शासन-प्रशासन के लचर रवैये की वजह से लोग निराश हो चुके हैं। इस समस्या से लोग इतने त्रस्त हैं कि हर दूसरे-तीसरे दिन लावारिस पशु हादसों का सबब बनते हैं। पिछले तकरीबन दो साल के दौरान एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल समेत तीन लोग मौत के मुंह में जा चुके हैं।
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आए दिन शहर के किसी न किसी बाजार व मार्ग पर लावारिस पशु हादसे का कारण बनते हैं। लावारिस सांडो का आतंक दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। अब तक करीब तीन लोगों की जान ले चुके ये सांड़ अनेक लोगों को अस्पताल भी पहुंचा चुके है। अब कोर्ट के आदेश के बाद शहर वासियों को कुछ राहत की उम्मीद है।
शहर में फिलहाल साढ़े तीन हजार से अधिक लावारिस पशु है। जिले की बात की जाए तो यह आंकड़ा साढ़े नौ हजार के करीब है। लावारिस पशु हर किसी के लिए परेशानी बने है। खासकर बाजारों में दुकानदारों के लिए। अब कोर्ट के एक महीने के अंदर लावारिस पशुओं की समस्या के समाधान के निर्देश के बाद उम्मीद है कि जिला प्रशासन कुछ कदम उठाएगा और लोगों को निजात मिलेगी।
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अमर उजाला ने शिद्दत से उठाया मामला
अमर उजाला ने लावारिस पशुओं से आमजन को हो रही परेशानी को लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया। कोर्ट केस में भी अधिवक्ता ने अमर उजाला समाचार पत्र की प्रतियां दिखाई और दिखाया कि धरातल पर कितनी परेशानी है। जिला प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए कितना गंभीर है। अधिवक्ता प्रवीण अत्री ने बताया कि अमर उजाला समाचार ने इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित कर लोगों की परेशानी को दिखाया। कोर्ट ने भी माना कि लावारिस पशु गंभीर समस्या है।

और कोई सुविधा दो या ना दो बस सांड़ों से निजात दिला दो
जैन चौक मार्केट के दुकानदार सांड़ों से बहुत परेशान है। दो दफा पूर्व मंत्री व विधायक घनश्याम सर्राफ को मार्केट में बुलाकर अपनी समस्या दिखा चुके हैं। जैन चौक के दुकानदारों का कहना है कि उन्हें कोई सुविधा दो या ना दो बस इस मार्केट के दुकानदारों को सांडों की समस्या से निजात दिला दो। मार्केट प्रधान गिरधारी लाल ने बताया कि मार्केट में सांड़ों की बड़ी समस्या है। सांड लड़ते है तो दुकानदारों को भारी नुकसान पहुंचाते है। डर रहता है कि कहीं ये किसी की जान ना ले ले।      

किसानों को पहुंचाते हैं मोटा नुकसान
लावारिस पशु जितना सिरदर्द शहर के लोगों के लिए बने हैं, उससे कहीं ज्यादा किसान परेशान हैं। फसल की बुआई से लेकर कटाई तक लावारिस पशुओं से फसल बचाना किसान के लिए बड़ी चुनौती है। लावारिस पशुुओं से फसल बचाने के लिए आधे से ज्यादा किसान को मजबूरन अपने खेतों की तारबंदी करानी पड़ी। जिन किस ानों ने तारबंदी नहीं कराई, उनको मोटी चपत लग रही है। हालत यह हो गई कि जिस खेत की तारबंदी नहीं, उसे किसान ठेके पर नहीं लेते।
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