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Bhiwani News: एक साल जांच.... शुरू से आखिर तक आत्महत्या पर टिकी रही सुई

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भिवानी। मनीषा मौत मामले में एक साल बाद भी जांच की सुई आत्महत्या पर ही टिकी रही। भिवानी पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की शुरुआती जांच से लेकर क्लोजर रिपोर्ट तक जांच की थ्योरी एक ही रही। शुक्रवार को पंचकूला की सीबीआई अदालत में क्लोजर रिपोर्ट में मनीषा की मौत को आत्महत्या बताया गया। पिता संजय ने कहा कि वे कभी नहीं मान सकते कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की।
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सुनवाई के दौरान कोर्ट कक्ष में संजय के अलावा पूर्व सरपंच महाबीर सिंह, सुरेश कुमार, संजय के चचेरे भाई रवींद्र और भाई संदीप उपस्थित रहे। बैरागी सभा हरियाणा के प्रधान शिव कुमार बैरागी ने बताया कि 10 अगस्त को मनीषा के घर सीबीआई की ओर से नोटिस भेजा गया था जिसमें 12 अगस्त को सीबीआई द्वारा अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की जानकारी दी गई थी। उन्होंने बताया कि क्लोजर रिपोर्ट अधूरी है और इसमें कई तथ्य अभी कोर्ट के समक्ष नहीं रखे गए हैं। संजय ने बताया कि न्यायाधीश ने उन्हें पैरवी के लिए अच्छा वकील करने की सलाह दी है। (संवाद)
रोहतक रेंज के तत्कालीन आईजी ने भी बताया था आत्महत्या
मनीषा मौत मामले में रोहतक रेंज के तत्कालीन आईजी वाई. पूरन कुमार ने 19 अगस्त 2025 को बताया था कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में मृतका के पेट, आंतों और किडनी में ऑर्गेनोफॉस्फोरस (कीटनाशक) पाया गया था। मृतका के शरीर पर संघर्ष, यौन उत्पीड़न या दुष्कर्म के कोई साक्ष्य नहीं मिले थे। भिवानी और पीजीआई रोहतक में पोस्टमार्टम के बाद गठित विशेष मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में भी मनीषा के शरीर में ऑर्गेनोफॉस्फोरस मिलने की पुष्टि हुई थी जो मौत का कारण बना। शरीर के कुछ हिस्सों के क्षतिग्रस्त होने के संबंध में स्पष्ट किया गया कि ये वे अंग थे जिनमें जहर फैला था।
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अंग गायब होने पर दिया था यह तर्क
शुरुआती जांच में एसआईटी ने तर्क दिया था कि शव कई दिन पुराना होने के कारण सड़-गल (डीकंपोज) गया था। मनीषा की मौत 11 अगस्त 2025 को ही हो गई थी और शव दो दिन बाद 13 अगस्त को मिला था। पुलिस का तर्क था कि फॉरेंसिक जांच और विसरा के लिए कुछ अंग निकाले गए थे जबकि अन्य अंगों की क्षति जंगली जानवरों (कुत्तों) द्वारा शव नोचने के कारण हुई। शव का तीन बार पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई थी जिसने पूरी घटना को आत्महत्या से जुड़ा मामला माना है। मनीषा के पिता ने इस निष्कर्ष पर असंतोष जताया था।
अब तक क्या-क्या हुआ
- 11 अगस्त 2025 को सुबह मनीषा घर से स्कूल जाने के लिए निकली थी।
- 13 अगस्त को सिंघानी के खेतों में उसका क्षत-विक्षत शव मिला।
- 14 अगस्त को जिला नागरिक अस्पताल में धरना देकर परिजनों ने हत्या की आशंका जताई।
- 19 अगस्त को पुलिस ने मामला आत्महत्या का बताया तो परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। रोहतक पीजीआई के बाद एम्स दिल्ली में तीसरी बार शव का पोस्टमार्टम किया गया।
- 20 अगस्त को मुख्यमंत्री ने मामला सीबीआई को सौंपने का आश्वासन दिया।
- 21 अगस्त को मनीषा के शव का अंतिम संस्कार किया गया।
- 26 अगस्त को मामला सीबीआई को सौंप दिया गया।
- 3 सितंबर को जांच के लिए सीबीआई की छह सदस्यीय टीम पहली बार गांव सिंघानी पहुंची।
- 12 अगस्त 2026 को सीबीआई ने पंचकूला की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।

मेरी बेटी को जब तक न्याय नहीं मिलता, चुप नहीं बैठूंगा। मुझे सीबीआई की आत्महत्या की थ्योरी पर कोई विश्वास नहीं है। मेरी बेटी की हत्या हुई है। सीबीआई अब तक आत्महत्या के तथ्य भी नहीं जुटा पाई है और न ही कुछ साबित कर पाई है। कोर्ट में जज ने अच्छा वकील करने की सलाह दी है।
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- संजय, मनीषा के पिता
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