इस पर उपायुक्त ने कहा कि यदि सभी ग्रामीण पर्दा प्रथा को मिटाने का प्रण लेते हैं और सरपंच घूंघट से बाहर आकर समस्याएं रखती हैं तो यह प्रदेश के लिए एक मिसाल बनेगा। उपायुक्त की इस बात का ग्रामीणों ने समर्थन किया। कविता देवी उठकर आगे आईं और घूंघट उठाकर पूरे गांव में भी पर्दा प्रथा को समाप्त करने में अपना भरपूर सहयोग देने की बात कही। वहां मौजूद गणमान्य लोगों, बुजुर्गों ने भी इस पहल के हक में हां भरी। बुजुर्गों ने कहा कि बदलते दौर के साथ कुछ बदलाव समाज में लाना बेहद जरूरी है। ग्रामीणों ने उपायुक्त को आश्वासन दिया कि वे पर्दा प्रथा को खत्म करने में पूरा सहयोग करेंगे। उपायुक्त ने कहा कि गांव ढाणी बीरन का यह संदेश देशभर की अन्य महिला पंचायत प्रतिनिधियों के लिए मिसाल बनेगा।
मैंने जेबीटी तक पढ़ाई की हुई है। इसके बाद मेरी शादी हो गई। मैं अपनी ससुराल में आने के बाद से ही यहां घूंघट में रही हूं। चुनाव के दौरान भी मैंने गांव के बड़े-बुजुर्गों के सामने घूंघट नहीं खोला। रात्रि ठहराव कार्यक्रम में डीसी साहब की प्रेरणा और बड़े-बुजुर्गों के आह्वान के बाद मैंने घूंघट हटाया है। अब मैं इस प्रथा के खिलाफ अन्य महिलाओं को भी जागरूक करूंगी। गांव की महिला पंच भी घूंघट नहीं करेंगी।