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ठगों का बिछा जाल, साइबर सेल बनीं ढाल

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भिवानी। आज साइबर क्राइम तेजी से बढ़ रहा है। साइबर ठगों का जाल बिछा है। ठग लोग लोगों को ठगने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। औसतन हर रोज जिले में दो से तीन लोगों के साथ ऑनलाइन ठगी हो रही है। कुछ पीड़ित पुलिस के पास पहुंच रहे हैं तो काफी ऐसे भी है, जो शिकायत नहीं करते। मगर अब ठगों के शिकार पीड़ितों की ढाल बनी है भिवानी पुलिस की साइबर सेल।
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साइबर सेल कर्मचारियों की मेहनत का ही परिणाम है कि ठगी के 101 मामलों में ठगों द्वारा ठगी गई राशि पीड़ितों को वापस दिलाई गई है। अब तक 12.42 लाख रुपये की ठगी की राशि रिकवर करवाई जा चुकी है। जिस कारण अब ठगी के शिकार लोग ये ही बोल रहे है कि पुलिस तो भगवान बनकर आई और डूबे हुए रुपये दिला दिए। ठगी होने पर 1930 टोल फ्री नंबर, साइबर सेल के नंबर 8814011488, 8814011496 पर सूचना दें। पुलिस अधीक्षक ने आमजन से आह्वान किया है कि वे अपने अकाउंट संबंधित जानकारी किसी को न दे और ठगी होने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें।
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केस एक : सरकारी स्कूल का शिक्षक बन ठगे 54 हजार, वापस मिले तो मिली राहत
गांव ढाणीमाहू वासी संदीप ने बताया कि मेरे पिता की किराना की दुकान है। मैं पढ़ता हूं और दुकान पर पिता का सहयोग भी करता हूं। 30 अगस्त को मेरे पास शाम के समय फोन आया कि गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से बोल रहा हूं। हमारे स्कूल में तुम्हारे यहां से मिड डे मील का राशन आता है। तुम्हारी पेमेंट करनी है और मोबाइल पर नहीं डाल रहे। पेमेंट के लिए अपना बार कोड डाल दो। फोन करने वाले ने शिक्षक धर्मबीर का भी नाम लिया। जिसके बाद मैने बार कोड भेज दिया। मेरे खाते से चार बार में 54 हजार रुपये कट गए। जिसके बाद मैने इसकी सूचना पुलिस को दी। टोल फ्री नंबर 1930 पर भी शिकायत की। धर्मबीर शिक्षक से बात की तो उन्होंने बताया कि उसके बेटे के साथ भी ठगी हुई है। साइबर सेल की मदद से मुझे तीन दिन बाद ही पूरे रुपये मिल गए।
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केस दो : एटीएम कार्ड शुरू करने के लिए मिलाया नंबर, खाते से उड़ गए 68 हजार
ढाणीमाहू वासी शिक्षा बोर्ड से सेवानिवृत्त डिप्टी सुपरिंटेंडेंट राजेंद्र सिंह से 12 मार्च को ठगी हुई। उन्होंने बताया कि मैं पंचायत भवन के पास एटीएम में रुपये निकालने गया। वहां एटीएम नहीं चला। जिसके बाद ऑनलाइन बैंक का मुंबई का नंबर ढूंढकर मिलाया। वहां बोलने वाले ने एप डाउनलोड करने को कहा। जिसके बाद उसे कोड व एटीएम नंबर बता दिया। जिसके तुरंत बाद खाते से 68 हजार रुपये कट गए। जिसके बाद मैं साइबर सेल पहुंचा। यहां पुलिस ने काफी सहयोग किया। पुलिस के सहयोग से एक सप्ताह के अंदर ही मेरे 60 हजार रुपये मिल गए हैं। बाकी आठ हजार की भी प्रोसेस चल रही है।
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केस तीन : सेवानिवृत्त फौजी के उड़ाए 92 हजार
सेवानिवृत्त फौजी राज कुमार के क्रेडिट कार्ड के कोड व सीएसवी नंबर का प्रयोग कर ऑनलाइन 92 हजार की ठगी की गई। राज कुमार ने भी तत्परता दिखाते हुए इसकी सूचना साइबर सेल को दी। जिसके बाद पुलिस ने तत्परता से ठग का पता लगाया और रुपयों की रिकवरी करवाई।
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केस चार : धोखाधड़ी से 80 हजार की खरीदारी की
ठगों ने लोहारू क्षेत्र वासी युवक अभिषेक को भी अपना निशाना बनाया और उसके क्रेडिट कार्ड के नंबरों का प्रयोग कर 80 हजार रुपये की खरीदारी कर ली। अभिषेक ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। जिसके बाद पुलिस ने 80 हजार की रिकवरी करवाई।
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एक्सपर्ट व्यू : एसआई रमेश कुमार, इंचार्ज साइबर सेल
- हमेशा सुरक्षित वेबसाइट का उपयोग करें।
- किसी भी ब्राउचर का उपयोग करने पर रीमेंबर पासवर्ड ऑप्शन का चयन न करें।
- किसी अनजान के कहने पर कोई भी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन न करें।
- साइबर कैफे में इंटरनेट का प्रयोग करने के बाद हिस्ट्री अवश्य डिलीट करें।
- कभी भी लॉटरी ईमेल का रिप्लाई न करें।
- अपना पासवर्ड एटीएम पिन आदि किसी को न बताएं। अपनी निजी जानकारी जैसे पासवर्ड नंबर, क्रेडिट/डेबिट कार्ड नंबर ई-मेल के माध्यम से या अन्य किसी माध्यम से प्रेषित न करें।
- अलग अलग एप्लीकेशन उपयोग करने के लिए अलग -अलग पासवर्ड का उपयोग करें।
- किसी भी अंजान व्यक्ति द्वारा भेजी गई ईमेल अथवा अन्य सामग्री को डाउनलोड न करें।
- ऑनलाइन लेन-देन के समय लैपटॉप अथवा मोबाइल पर खुली अन्य एप्लीकेशन को बंद कर दें।
- अपने लैपटॉप/मोबाइल/आईडी कार्ड आदि के खो जाने पर तत्काल पुलिस में शिकायत दें।
- व्हाट्सएप नंबर पर अनजान नंबर से आने वाली वीडियो कॉल को कभी ना उठाएं, अगर वीडियो कॉल उठाई तो आपकी पोर्न क्लिप तैयार की जा सकती है।
- किसी ऐसी वेबसाइट पर अपना डाटा अपलोड ना करें जो घर बैठे काम करने के एवज में आपको लुभावने ऑफर दे।
- अगर आपके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी या अन्य कोई साइबर अपराध होता है तो आप पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं या 1930 पर डायल करके भी अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
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साइबर क्राइम बढ़ रहा है। ऑनलाइन के ठगी के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि लोग जागरूक हो और अपने बैंक अकाउंट संबंधित जानकारी किसी से शेयर न करें। ऑनलाइन ट्रांजेक्शन भी सुरक्षित माध्यम से ही करें। बैंक अधिकारी कभी ऑनलाइन निजी जानकारी नहीं मांगते। ऐसे में किसी को मैसेज, क्यूआर कोड, ओटीपी आदि न बताये। हमने ठगी के अलग-अलग केसों में करीब 12.42 लाख की रिकवरी करके दी है। यह तभी संभव है जब हमें सहीं समय पर सूचना मिले। किसी के साथ ऑनलाइन ठगी हो तो तुरंत 1930 पर कॉल कर सूचना दें।
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- अजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक।
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