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सिविल जज जूनियर डिवीजन का फैसला, चौ. बंसीलाल की रजिस्टर्ड वसीयत सही

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भिवानी। पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल की वसीयत को लेकर चल रहे उनके पुत्र रणबीर महेंद्रा और उनकी पौत्री श्रुति चौधरी के विवाद में सिविल जज जूनियर डिवीजन आशुतोष शर्मा की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने चौ. बंसीलाल की 2005 में रजिस्टर्ड वसीयत को ही सही ठहराया है जिसमें मृत्यु के बाद उनकी पत्नी को मालिकाना हक दिया गया है। वसीयत में यह भी लिखा है कि चाहे तो ट्रस्ट भी बना सकते हैं। अदालत ने श्रुति चौधरी की याचिका को खारिज कर दिया है। पूर्व सांसद श्रुति चौधरी ने इस मामले में हाई कोर्ट में अपील करने की बात कही है।
चौ. बंसीलाल के 28 मार्च 2006 को निधन होने के बाद परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया था। चौ. बंसीलाल की पंजीकृत वसीयत को अदालत में चुनौती दी गई थी। चौ. बंसीलाल के निधन के बाद उनकी पत्नी विद्या देवी ने चौ. बंसीलाल की विजय नगर स्थित निवास को चौ. बंसीलाल स्मृति स्थल बनाने के लिए ट्रस्ट बनाया था। पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल की संपत्ति को लेकर 24 अगस्त 2006 को श्रुति चौधरी ने परिवार के सदस्यों के खिलाफ याचिका दायर की थी। इनमें चौ. रणबीर सिंह महेंद्रा, उनकी पत्नी निर्मल कांता, माता विद्या देवी, बंसीलाल की पुत्री डॉ. सुमित्रा, सरोज, सविता और सुनीता शामिल हैं। चौ. बंसीलाल की 19 जुलाई 2005 को चंडीगढ़ में एक वसीयत पंजीकृत हुई थी। श्रुति चौधरी ने इस वसीयत को अदालत में चुनौती दी थी। उन्होंने छह जून 2004 की एक वसीयत को पेश कर अदालत में मामला दायर किया था। करीब 12 वर्षों तक अदालत में मामला चला।
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शनिवार शाम को सिविल जज जूनियर डिवीजन आशुतोष शर्मा की अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने 2004 में रजिस्टर्ड वसीयत को ही सही ठहराया है। फैसले के समय दोनों पक्षों के समर्थक अदालत के बाहर मौजूद थे। एहतियात के तौर पर अदालत के बाहर पुलिस भी तैनात थी। रणबीर सिंह महेंद्रा की तरफ से पैरवी कर रहे एडवोकेट अविनाश सरदाना के साथ फैसला सुनने के लिए वेदप्रकाश दलाल, नरेंद्र शर्मा सहित अनेक अधिवक्ता मौजूद थे। जबकि श्रुति चौधरी की तरफ से एडवोकेट एसके गर्ग, एडवोकेट खुशीराम शर्मा, कुलदीप मौजूद थे। एडवोकेट खुशीराम शर्मा ने कहा कि सोमवार को अदालत में अपील दायर की जाएगी
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आज न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया है। यह असत्य पर सत्य की जीत है। - रणबीर सिंह महेंद्रा, पूर्व विधायक एवं बीसीसीआई के पूर्व चेयरमैन

मैंने दादा और पिता की मृत्यु के बाद से निरंतर अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया है। इस फैसले के बाद वह वे उच्च अदालत में अपील करेंगी। मुझे विश्वास है कि अंत में मुझे न्याय मिलेगा और न्याय की जीत होगी। - श्रुति चौधरी, पूर्व सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पौत्री
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