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बामला स्कूल की सुध लेने पहुंचे विधायक

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बामला स्कूल की सुध लेने पहुंचे विधायक
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भिवानी। केवल पांच कमरों में चल रहे साढ़े चार सौ विद्यार्थियों की क्षमता वाले बामला गांव के सरकारी स्कूल के बच्चों की परेशानी व बेबसी उजागर हुई तो विधायक घनश्याम सर्राफ शुक्रवार को स्कूल पहुंचे। स्कूल स्टाफ व ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि भवन निर्माण में जो तकनीकी अड़चन हैं, उन्हें शीघ्र दूर किया जाएगा। इस बारे में विधायक ने पंचकूला में शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों से बात कर जल्द नई इमारत का काम शुरू करने को कहा।
शुक्रवार को लगभग साढ़े 10 बजे विधायक घनश्याम सर्राफ ने गांव बामला के स्कूल के भवन का निरीक्षण किया। इस दौरान ग्रामीणों ने बताया कि पर्याप्त कमरे व चारदीवारी न होने की वजह से बच्चों और स्टाफ को परेशानी हो रही है।
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विधायक ने बताया कि स्कूल के भवन बनाने के लिए बजट पहुंच चुका है। प्रस्तावित इमारत के नक्शा के को लेकर कुछ तकनीकी अड़चन बनी हुई है। उसको शीघ्र दूर कर लिया जाएगा। इसके बाद विधायक श्री सर्राफ ने शिक्षा विभाग के मुख्यालय पंचकूला में आला अधिकारियों से बातचीत की और शीघ्र नक्शा की समस्या को दूर कराने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान विधायक ने कक्षाओं में जाकर बच्चों से सवाल पूछे। एक बच्चे से पुस्तक भी पढ़वा कर देखी। श्री सर्राफ चौथी कक्षा में पहुंचे और सबसे आगे डेस्क पर बैठे विद्यार्थी को उठाया और टीचर की स्पेलिंग पूछी। इस दौरान छात्र ने टीचर की स्पेलिंग सही बता दी। इससे पूर्व ग्रामीणों ने आयोजित कार्यक्रम में विधायक को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया।
इस अवसर पर बामला-द्वितीय के सरपंच पवन कुमार, स्कूल प्राचार्य मुकेश शर्मा, हेड मास्टर भीम सिंह शर्मा, एनसीसी अधिकारी मनोज ग्रेवाल, उर्मिला, मास्टर कृष्ण यादव, फूली मेंबर, राजकुमार मेंबर, राजपाल प्रजापत, नीरू वर्मा, बलबीर पूनिया, मेहर सिंह बिल्लू, आदि मौजूद रहे।
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एक्सट्रा क्लास लगाएं टीचर
विधायक ने शिक्षकों से कहा कि शिक्षक बच्चों को स्कूल टाइम के अलावा भी पढ़ाएं। उनके समक्ष आने वाली शिक्षा से संबंधित समस्याओं का निराकरण करवाएं ताकि बच्चों को बेहतरीन शिक्षा मिल सके। पढ़ाई के मामले में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं होगी।
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अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाई बच्चों की परेशानी
कमरों की कमी की वजह से बामला गांव के मिडिल और सीनियर सेकेंडरी कक्षाओं के साढ़े चार सौ बच्चों की परेशानियों को अमर उजाला ने 17 नवंबर के अंक में प्रमुखता से उठाया है। खबर में उल्लेख किया गया कि कमरों के अभाव में बच्चे खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने का मजबूर हैं। चारदीवारी न होने से बच्चे असुरक्षित हैं।
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