अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। हरियाणा रोडवेज के बेड़े में टायरों की कमी ने विभाग के अधिकारियों के माथे पर भी पसीना ला दिया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि 15 से 16 बसें रूटों पर न दौड़कर कर्मशाला में जैक पर खड़ी हैं। वजह सिर्फ एक है कि नवंबर माह का टायरों का कोटा डिपो में नहीं भेजा गया, जबकि डिपो की ओर से अब 108 टायरों की इमरजेंसी डिमांड मुख्यालय भेजी गई है। बसों की कमी के कारण तीन मुख्य मार्गों के अलावा लोकल रूटों पर बसों की कटौती की गई है। हालात पिछले माह से ज्यादा बिगड़ना शुरू हुए हैं।
शुरुआत तीन-चार बसों से हुई थी, जिनकी लगातार संख्या बढ़ने लगी हैं। जल्द भिवानी डिपो को टायरों का कोटा उपलब्ध नहीं कराया गया तो जैक पर खड़ी होने वाली बसों की संख्या बढ़ और जाएगी। भिवानी डिपो में फिलहाल 123 बसों में से केवल करीब 107 बसें ही चालू हालत में हैं।
सूत्रों की मानें तो अक्टूबर माह से ही टायरों की खेप नहीं पहुंचने से प्रदेश के सभी डिपो में बसों के संचालन का सिस्टम बिगड़ना शुरू हो गया था। मगर हालातों को काबू रखने के लिए डिमांड से कहीं कम टायर भेजे जा रहे थे। जिससे बसों का जैसे तैसे संचालन होता रहा। मगर नंबर माह में भिवानी डिपो के अंदर 54 टायरों की इमरजेंसी डिमांड भेजी गई थी, मगर पूरे माह कोई टायर नहीं भेजा गया। इसके बाद भी रोडवेज अधिकारी लगातार टायरों की कमी को लेकर पत्राचार करते रहे, मगर टायरों की खेप नहीं भेजी गई।
इन रूटों पर प्रभावित हुई बस सेवा
नए टायरों की वजह से खड़ी बसों के कारण दिल्ली रूट पर सुबह 08:03 बजे, इसके बाद दिल्ली से आने के बाद चार बजे लोहारू रूट, 9:50 बजे गुरूग्राम रूट पर रोडवेज सेवा फिलहाल बंद है। इसी तरह 08:15 पर हिसार से दिन भर में छह चक्कर लगाने वाली यानी छेसर बस सेवा भी बंद है। दोपहर 12 बजे रोहतक की तरफ जाने वाली बस भी बंद है। इसके बाद शाम साढ़े 3 बजे जींद जाने वाली बस सेवा भी बंद है। इसी तरह लोकल करीबन आधा दर्जन ग्रामीण रूटों पर भी बस सेवाएं बाधित हो गई हैं। ग्रामीण रूट सेवा बंद होने का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है।
रिसोलिंग टायरों की बजाए नए टायरों की मांग
रोडवेज विभाग के भिवानी डिपो में रिसोलिंग टायरों की बजाए नए टायरों की मांग है। फिलहाल रिसोलिंग टायरों की तो डिपो में कोई कमी नहीं हैं, मगर बस के अगले हिस्से में जरूरत के हिसाब से नए टायर ही लगाए जाते हैं, ऐसे में जिन बसों के टायरों की मियाद पूरी हो चुकी हैं, उन्हें रूट पर भी नहीं भेजा जा रहा है।
नए टायर की एक लाख किलोमीटर तक होती है मियाद
रोडवेज विभाग में बसों के नए टायर की मियाद एक लाख किलोमीटर तक मानी जाती है। करीबन 80 हजार से लेकर एक लाख 20 हजार किलोमीटर का दूरी तय करने के बाद इन नए टायरों को रिसोल करा दिया जाता है, जिसके बाद इन्हें करीबन दो लाख किलोमीटर तक चलाया जा सकता है। रोडवेज विभाग के पास हिसार, गुरुग्राम व करनाल में सेंट्रल टायर रिसोलिंग सेंटर बने हैं।
रोडवेज मुख्यालय से भिवानी डिपो में निर्धारित कोटे से बहुत कम टायर भेजे गए हैं। इस संबंध में रोडवेज कर्मशाला के अधिकारियों को नए टायरों की डिमांड का पत्र भेजे जाने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल नए टायरों की कमी बनी हुई हैं, इन हालातों से निपटने के भी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए हैं।
-मनीष फौगाट, महाप्रबंधक भिवानी डिपो।