डेड हाउस में सड़ रही थी लावारिस लाश, नप कर्मियों ने उठाने से किया इनकार
अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
सामान्य अस्पताल में यूं तो डॉक्टरों के रूम में लाखों रुपये के एसी लगाए जा रहे हैं, लेकिन डेड हाउस में पिछले पांच सालों से फ्रिजर खराब पड़ा है, जिसे चिकित्सका अधिकारी ठीक करवाने तक की जहमत नहीं उठा रहे है। ऐसे में वहां सड़ रही लाशों को अब नप कर्मचारियों ने उठाने से भी इनकार कर दिया है। सोमवार को लावारिस दो लाशों में से एक को उठाकर नप कर्मचारी ले गए, लेकिन दूसरी की हालत खराब होने व अधिकारी मौके पर मौजूद तक ना होने पर लाश को मोर्चरी में छोड़कर चले गए। कर्मचारियों ने फ्रिजर ठीक करवाने, दस्ताने, मास्क आदि मुहैया करवाने की मांग की।
जिले में लावारिस हालत में मिले शवों को पुलिस अपने कब्जे में लेकर 72 घंटों तक शिनाख्त के लिए सामान्य अस्पताल के शवगृह में रखवाती है। पहले से ही गली-सड़ी ये लाश तीन दिन तक बिना फ्रिजर व केमिकल लगाए ही वहां रखे जाने से सड़ने लगती हैं। आमतौर पर इस तरह की लाशों को जलाने का जिम्मा नगर परिषद कर्मचारियों का होता है, लेकिन नप कर्मचारियों ने अब ऐसी लाशों से बीमारी लगने के भय व सुविधाएं मुहैया ना करवाने पर इस तरह की लाशों को उठाने से इनकार कर दिया है।
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सड़ रही थी लाश और चल रहे थे कीड़े : कर्मचारी
लावारिस लाशों को दाह संस्कार के लिए उठाने के लिए आए नप कर्मचारी मुकेश, सुरेंद्र टांक व मसानिया ने कहा कि वह सोमवार सुबह यहां दो में से एक लाश को किसी तरह श्मशानघाट में ले जाकर जला आए। फिर से आए तो एक लावारिस लाश बुरी तरह से सड़ रही थी और कीड़े तक चल रहे थे। बार-बार सूचना देने के बाद भी शहर थाना पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। इसके साथ ही चिकित्सका अधिकारियों को इस बारे में कहा गया तो वह भी नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि पुलिस वालों का इंतजार कर वापस लौटना पड़ा।
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प्रशासन नहीं दे रहा ध्यान
करीब दस साल पहले शव गृह में पुराना फ्रिजर लगवाया गया था, जो अब सालों से कंडम पड़ा है और जंग लग गया है। विभाग अधिकारियों से बार-बार मांग कर चुके है, लेकिन फ्रिजर नहीं लगाया जा रहा है।
विनोद कुमार, मोर्चरी कर्मचारी
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मुहैया करवाए जाए संसाधन
नप कर्मचारियों को संशासन मुहैया करवाए जाए। नियम के हिसाब से ऐसी लाखों को कैमिकल व लेप लगाकर फ्रिजर में रखा जाता है, ताकि शव खराब ना हो। इसके साथ ही नप कर्मचारियों को दस्ताने, मास्क जैसे संसाधन मुहैया करवान भी स्वास्थ्य विभाग का काम है, लेकिन कर्मचारियों की कोई परवाह नहीं होती है। कर्मचारियों को ये संशासन मुहैया करवाए जाए व शवों को नप कर्मचारी अधिकारियों की मजूदगी में ही उठाएंगे।
कमल कांगड़ा, प्रधान कर्मचारी यूनियन नप
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एक माह में 5 से 6 लावारिस लाशों का नप करती है अंतिम संस्कार
सर्दी के मौसम में लावारिस लाशों की संख्या अधिक होती है। स्टेशन पर विकलांग या फिर साधु ठंड से मर जाते हैं तो गर्मी में नहरों में गली--सड़ी लाशें आती हैं। मुख्य तौर पर हर माह 5 से 6 लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार नप द्वारा किया जाता है। अस्पताल में फ्रिजर न होने से कर्मचारियों के लिए यह समस्या बनी हुई है।
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कर्मचारियों के लिए मोर्चरी में दस्ताने व मास्क उपलब्ध हैं। रही बात शवों को रखने के लिए फ्रिजर की उनकी अनुमति मिल चुकी है और जल्द ही जिले के सभी मोर्चरी रूम में एक-एक फ्रिजर खरीद कर रखवाया जाएगा।
डॉ. रणवीर सिंह पूनिया
सीएमओ, जिला अस्पताल