अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। बिना अनुमति हुडा पार्क के पास झूले लगाना झुला संचालकों को महंगा पड़ा। हुडा की ओर से चलाए अभियान के तहत जेसीबी से झूलों को तोड़ दिया गया। झूले टूटने से संचालकों को करीब साढ़े चार लाख का नुकसान हुआ। बिना अनुमति झूले लगाना गलत था मगर इस तरह झूले तोड़ने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। झूले संचालकों का कहना है कि उन्होंने झूले लगाए थे मगर शुरू नहीं किए थे। अनुमति के लिए आवेदन कर रखा था।
शहर के हुडा पार्क के पास हुडा की जगह में अक्सर ट्रेड फेयर, वूलन फेयर या फन फेयर लगते रहते हैं। बच्चों की गर्मियों की छुट्टियां शुरू हुई तो रोहतक के दो ठेकेदारों ने यहां झूले लगवा फन पार्क बनाया। इसकी अनुमति के लिए आवेदन भी किया। मगर अनुमति मिलने से पहले ही मंगलवार को हुडा का पीला पंजा चला और अधिकतर झूले तोड़ डाले। वहां कार्यरत कर्मचारियों ने झूले नहीं तोड़ने और स्वयं हटाने की गुहार भी लगाई, मगर उनकी एक नहीं सुनी गई। झूले टूटने से ठेकेदार को करीब साढ़े चार लाख का नुकसान हुआ। तीन लाख का तो अकेला एक हेलीकॉप्टर झूला बताया जा रहा था। एसएचओ सिविल लाइन अजीत सिंह ने बताया कि हुडा की ओर से अपने पत्र आया था कि हुडा की जमीन पर अवैध कब्जा किया जा रहा है तो हमने जवाब दिया था कि कोई विरोध हो तो पुलिस सुरक्षा मुहैया करवाई जाएगी। हुडा विभाग ने ही कार्रवाई की है।
झूला टूटने से बचाने के लिए महिला बच्चों संग अड़ी
यहां मेरठ की महिला शमा ने भी झूला लगा रखा है। दोपहर बाद जब जेसीबी उनके झूले की ओर बढ़ी तो वह अपने बच्चों के साथ झूले के सामने अड़ गई और कहा कि पहले उनके ऊपर जेसीबी चढ़ाओ। यह उनकी मेहनत है और झूला टूट गया तो उनका रोजगार ही खत्म हो जाएगा। महिला का विरोध देखते हुए उन्हें शुक्रवार तक झूला स्वयं हटाने की चेतावनी दी गई। महिला ने बताया कि उन्हें तो ठेकेदार ने बताया था कि मंजूरी मिल गई है। वे पहली बार मेरठ से यहां आए हैं और झूला लगाया है।