अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। सामान्य अस्पताल के नीकू वार्ड, जच्चा-बच्चा वार्ड में मरीज दवाइयां खरीदकर प्रयोग करने को मजबूर हैं जबकि सरकार की ओर से अस्पताल में ही दवाइयां देने का प्रावधान है। सिविल सर्जन ने नीकू वार्ड का निरीक्षण किया तो लगभग सभी मरीजों के पास बाहर से खरीदकर लाई हुई दवाइयां मिली। इस पर सिविल सर्जन भड़क गए और चिकित्सक को फटकार लगाई। वहां मौजूद बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राज महता ने जब बताया कि अस्पताल में अंदर से ये दवाइयां नहीं मिलती तो फार्मासिस्ट को बुलाया गया। फार्मासिस्ट ने जवाब दिया कि दवाइयों की रिक्वायरमेंट ही नहीं आई। इस पर सिविल सर्जन ने चिकित्सकों को सारी दवाइयों की रिक्वायरमेंट बनाने के निर्देश दिए ताकि दवाइयों की खरीद हो सके। साथ ही निर्देश दिए कि नीकू और जच्चा-बच्चा वार्ड में कोई भी दवा मरीज से बाहर से नहीं मंगवाई जाएगी।
सिविल सर्जन डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता मंगलवार दोपहर निक्कू वार्ड का निरीक्षण करने निकले तो खामियां नजर आई। कहीं कचरे के ढ़ेर थे तो कहीं अलमारी में खाली चद्दरें रखी थी। सिविल सर्जन सबसे पहले नीकू वार्ड के बाद बच्चों के माताओं के ठहरने के लिए बनाए कक्ष में पहुंचे। यहां महिला मरीज से पूछा कि कोई दवाई बाहर से तो नहीं खरीदी तो मरीजों ने बताया कि दवाइयां बाहर से ही खरीदी हैं। इस पर सिविल सर्जन ने दवाइयां देखी। उन्होंने तुरंत वहां मौजूद चिकित्सकों को बुलाया। जब इस बारे में बात की तो बताया कि इवनिंग ड्यूटी के चिकित्सक ने लिखी है। बाद में डॉ. राज महता ने बताया कि ये दवाइयां उनके पास है ही नहीं। इस कारण मजबूरन बाहर से मंगवानी पड़ती है। तुरंत फार्मासिस्ट को बुलाया गया जिन्होंने बताया कि रिक्वायरमेंट ही नहीं आती। इसके बाद सिविल सर्जन ने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि वे सभी दवाइयों की लिस्ट बनाएं। मरीज से किसी प्रकार की दवाइयां न मंगवाई जाए। यहां से खरीद की जाएंगी। इसके बाद अंदर केएमसी कक्ष में छत से गंदा पानी टपक रहा था। वहीं पर पलंबर को बुलाया गया। बाद में पता लगा कि ऊपर के वार्डों में समस्या है। इसके बाद सिविल सर्जन ने ऊपर एनआरसी (न्यूट्रीशियन रिहेब्लीटेशन सेंटर) का निरीक्षण किया। यहां व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश दिए। एक कक्ष में मरीजों के लिए एसी लगाने के भी निर्देश दिए।
आयरन-कैल्शियम के सिरप भी नहीं
नीकू वार्ड में बच्चों की बेसिक जरूरत वाली दवाइयां ही नहीं है जिनमें सबसे अहम आयरन-कैल्शियम के सिरप हैं। बच्चों के अभिभावकों को ये भी बाजार से खरीदने पड़ रहे हैं।
सीएमओ सर, यहां तो पीने का पानी भी नहीं मिल रहा
सिविल सर्जन के निरीक्षण के दौरान मरीजों ने पीने के पानी और गंदे शौचालय की भी शिकायत रखी। एक जगह सिविल सर्जन ने पीने के पानी की टोंटी दबाकर देखी तो उसमें पानी ही नहीं था। इस पर सिविल सर्जन ने पलंबर को तुरंत बुलाने के निर्देश दिए। मरीज परशुराम ने बताया कि वह यहां आरओ ठीक करने का काम करता है और उसकी पत्नी यहां एडमिट है। उससे सारी दवाइयां बाहर से मंगवाई गई हैं।
एलटी की रिक्वायरमेंट
निरीक्षण के दौरान बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि नीकू में उन्हें 24 घंटे टेस्ट की सुविधा दी जाए तो बेहतर है। बच्चों के छह टेस्ट बेहद जरूरी होते हैं और वे कभी भी करवाने पड़ सकते हैं। उनके पास छह घंटे की शिफ्ट में ही एलटी आता है। 18 घंटे कोई नहीं होता। इस पर सिविल सर्जन ने जल्द व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
खाली चल रहे थे पंखे और लाइट
एनआरसी सेंटर में शुरूआत में चिकित्सक कक्ष बनाया हुआ है। जब सिविल सर्जन वहां पहुंचे तो कमरा बंद था। जब खुलवाया गया तो अंदर दो पंखे चल रहे थे और लाइट जल रही थी। इस पर सिविल सर्जन ने पूछा तो नर्सों ने सॉरी बोला।
वर्जन:::
दवाइयां बाहर से मंगवाई जा रही थी। उन्हें तुरंत बंद कर दिया है। चिकित्सक से जरूरी दवाइयों की लिस्ट मांगी गई है। स्वास्थ्य विभाग दवाइयों की परचेज करेगा। हमारा लक्ष्य है कि मरीज का एक रुपया भी खर्च ना हो। अन्य व्यवस्थाओं के सुधार के भी निर्देश दिए हैं।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन