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इस्तेमाल करने को लेकर स्वास्थ्य विभाग भी नहीं गंभीर

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अमर उजाला ब्यूरो
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भिवानी। 70 लाख का आरओ प्लांट, फिर भी खरीदकर पी रहे पानी। यह हाल है स्वास्थ्य विभाग का। करीब नौ साल पहले सामान्य अस्पताल भिवानी को प्राइवेट अस्पतालों की तर्ज पर मॉडर्न बनाने के दौरान ही 70 लाख का आरओ प्लांट विशेष रूप से लगाया गया था। इससे अस्पताल परिसर में आरओ का पानी सप्लाई किया जाना था। मगर इसे विभागीय अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली कहे या नेताओं की राजनीति। बनने के नौ साल बाद भी हैंडओवर नहीं हुआ है। निर्माण करने वाली कंपनी रूपये वसूलकर जा चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चाहते तो कंपनी से विवाद के बाद अन्य किसी कंपनी के माध्यम से इसका प्रयोग कर सकते थे, मगर आज तक किसी ने रुचि नहीं दिखाई।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण एक करोड़ 10 लाख के दो प्रोजेक्ट आज जंग खा रहे हैं। इनमें एक है आरओ प्लांट और दूसरा है फायर सिस्टम। वर्ष 2009 में ये दो प्लांट लगे थे। 70 लाख के आरओ प्लांट से अस्पताल परिसर, सिविल सर्जन कार्यालय भवन में सप्लाई की जानी थी। प्लांट के पूरे परिसर में फिटिंग की गई। सारी व्यवस्था हो गई, मगर अंत में कंपनी के साथ विवाद हो गया। इसके बाद कंपनी में अस्पताल में फाल सिलिंग का काम भी अधूरा छोड़ दिया। कंपनी के प्रतिनिधि आरओ प्लांट को हैंडओवर करने भी आए, मगर उसकी देखभाल और मैनेज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से कर्मचारी नहीं मिल पाया। बाद में कंपनी के प्रतिनिधि नहीं आए। इसी फेर में आज तक भी आरओ प्लांट स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं हुआ है। आरओ प्लांट के लिए बड़ी-बड़ी महंगी मशीनें लगाई गई थी। बड़ा टैंक बनाया गया था और मशीनों के लिए अलग से हॉल बनाया गया था। अब ये मशीन जंग खा रही हैं और मशीनों के लिए बनाए विशेष कमरे के शीशे किसी ने तोड़ दिए हैं।
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थोड़े से प्रयास से सुधर सकती थी व्यवस्था
एलएंडटी कंपनी से हिसाब होने के बाद भी अगर जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारी थोड़ी रूचि दिखाते और प्रयास करते तो अस्पताल परिसर में बने आरओ प्लांट को चलाया जा सकता था। इसे हेंडल कंपनी के लिए किसी भी अन्य कंपनी को ठेका दिया जा सकता था या फिर विभाग अपने स्तर पर एक-दो कर्मचारियों की नियुक्ति कर इसका इस्तेमाल कर सकता था। मगर पिछले नौ सालों में किसी भी अधिकारी ने रुचि नहीं दिखाई और हालत ये हैं कि 70 लाख का आरओ प्लांट आज पूरी तरह जंग खा रहा है।
अधिकाकर खरीदकर तो तीमारदार पी रहे टंकी का पानी
70 लाख का आरओ प्लांट होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आज खरीद कर पानी पी रहे हैं। अस्पताल में अधिकारियों के लिए कैंपर सप्लाई होते हैं। कर्मचारी भी इन्हीं में से प्रयोग कर लेते हैं। काफी कर्मचारी अपने साथ पानी की बोतल लाते हैं। मरीज और उनके साथ आए तीमारदार टंकी का पानी पीने को मजबूर हैं। कहने को तो वाटर कूलर लगाए गए हैं मगर अधिकतर की हालत खराब है। ऐसे में मरीज गर्म और टंकी से सीधे सप्लाई हो रहा पानी ही पीने को मजबूर हैं।
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40 लाख का फायर सिस्टम भी हुआ बेकार
आरओ प्लांट लगाने के दौरान ही फायर सिस्टम भी पूरे अस्पताल परिसर में इंस्टॉल किया गया था। सिस्टम ऐसा था कि अस्पताल या सिविल सर्जन कार्यालय में जहां भी आगजनी की घटना हो तुरंत वहीं की वहीं पानी की व्यवस्था ताकि तुरंत आग पर काबू पाया जा सके। इसके अलावा सायरन सिस्टम। धुआं होते ही अलार्म बज उठे। इसे भी नहीं संभाला गया और आज यह भी बेकार हो चुका है। अब हालात ये हैं कि थोड़ी सी आग लगने पर ही दमकल विभाग से गाड़ी मंगवानी पड़ती है।
वर्जन:::
आरओ प्लांट अब तो बेकार हो चुकी है। एलएंडटी कंपनी जा चुकी है। अन्य कोई इसे चला पाएगा या नहीं यह कहना भी मुश्किल है।
-डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, सिविल सर्जन
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