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वैश्य कॉलेज में प्रशासक की नियुक्ति की सिफारिश के बाद मचा हड़कंप

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भिवानी। चार हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को शिक्षा देने वाले वैश्य कॉलेज में वीरवार दोहपर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी की ओर से कॉलेज में प्रशासक की नियुक्ति संबंधी सिफारिश की चिट्टी सोशल मीडिया पर वायरल हुई। बाद में पता चला कि वाकई यूनिवर्सिटी ने उच्चतर शिक्षा विभाग के डायरेक्टर जनरल को प्रशासक की नियुक्ति बाबत चिट्ठी लिखी है। यूनिवर्सिटी ने यह सिफारिश प्रबंध समिति के चुनाव लटकाने पर की है। उच्चतर शिक्षा विभाग के निर्णय पर अब सबकी नजर टिकी है।
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चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी (सीबीएलयू) के डीन ऑफ कॉलेजेज की ओर से उच्चतर शिक्षा विभाग के डायरेक्टर जनरल को कल 11 अक्तूबर को पत्र लिखा गया। पत्र में यह कहते हुए कॉलेज में प्रशासक नियुक्त करने की गुजारिश की गई है कि गवर्निंग बॉडी का कार्यकाल सालभर पहले पूरा हो चुका है। अब तक चुनाव नहीं हुए हैं। इस बाबत एडवोकेट ओमप्रकाश परमार ने सीएम विंडो पर शिकायत भी लगाई हुई है। इस शिकायत को आधार बनाते हुए यूनिवर्सिटी ने डायरेक्टर जनरल से कॉलेज में प्रशासक नियुक्त करने को कहा है। यूनिवर्सिटी के इस पत्र पर उच्चतर शिक्षा विभाग क्या कदम उठाएगा, इस पर सबकी नजर टिकी हैं। माना जा रहा है कि अगले एक-दो दिन में उच्चतर शिक्षा विभाग इस बारे में कोई फैसला ले सकता है।
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प्रबंध समिति के पदाधिकारियों में खलबली
जैसे ही प्रशासक की नियुक्ति संबंधी यूनिवर्सिटी की सिफारिश के बारे में वैश्य संस्थाओं के पदाधिकारियों को पता लगा तो दौड़-धूप तेज हो गई। बताया जाता है कि आनन-फानन में आज ही पत्र तैयार कर शिक्षा विभाग के अलावा प्रशासनिक अधिकारियों को भेजा गया। पत्र में पदाधिकारियों ने अपनी सफाई पेश की है। कहा गया है कि वे लोग चुनाव कराने को तैयार हैं।
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मुद्दा केवल चुनाव नहीं, और भी कई हैं
वैश्य कॉलेज में चुनाव के अलावा भी रार के कई मुद्दे हैं। चुनाव लटकाने के अलावा एडवोकेट ओमप्रकाश व पूर्व पार्षद आनंद बासिया ने संस्था के एग्रीमेंट पर भी सवाल उठाए हैं। इनका कहना है कि 1951 में वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट और किरोड़ीमल चैरिटेबल ट्रस्ट के बीच एग्रीमेंट हुआ था। इसमें चार आदमी वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट से और सात आदमी किरोड़ीमल चैरिटेबल ट्रस्ट से शामिल होंगे। इसके बाद 1975 में एग्रीमेंट बदल दिया गया। इसमें पांच सदस्य वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट के हो गए और एक किरोड़ीमल ट्रस्ट का। एडवोकेट परमार बाद में हुए एग्रीमेंट पर सवाल उठा रहे हैं। इस मामले की शिकायत राज्यपाल को भी की गई है। पूर्व पार्षद आनंद बासिया का कहना है कि 1951 वाला एग्रीमेंट लागू किया जाना चाहिए।
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क्या कहते हैं वैश्य ट्रस्ट के पदाधिकारी
वैश्य महाविद्यालय ट्रस्ट के महासचिव पवन बुवानीवाला का कहना है कि बंसीलाल यूनिवर्सिटी ने आंख बंद करके चिट्ठी लिखी गई है। वे लोग चुनाव के लिए छह बार एमडी यूनिवर्सिटी को पत्र लिख चुके हैं। लेकिन, आब्जर्वर नहीं भेजा। आज भी उन्होंने उच्चतर शिक्षा विभाग को पत्र लिख कर कहा गया है कि वे चुनाव को तैयार हैं। प्रशासक की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि 1951 के जिस एग्रीमेंट की बात की जा रही है, उसे 1975 में स्वयं किरोड़ीमल चैरिटेबल ट्रस्ट ने यह कहते हुए वापस ले लिया कि वे लोग कॉलेज नहीं चला सकते। इसलिए, 1951 का एग्रीमेंट महत्वहीन हो चुका है।
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यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ओढ़ी चुप्पी
इस मसले पर अपनी बात कहने के लिए बजाय चौधरी बंसीलाल यूनिवर्सिटी प्रशासन चुप्पी धारण किए रहा। इस बारे में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार भगवान सिंह चौधरी से अलग-अलग समय में तीन बार संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन कॉल रिसीव नहीं की।
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