कैश नहीं है...। बैंकों और एटीएम के बाहर ऐसे नोटिस दोपहर को ही चस्पाने पड़े। ऐसे विकट हालात होने लाजिमी भी हैं। जिलेभर के लोगों को हर रोज लगभग 500 करोड़ रुपये कैश की दरकार है, लेकिन कैश की आवक महज 50 करोड़ है। यानी, मांग की तुलना में दस गुणा कैश बैंकों में पहुंच रहा है। कुछ ही घंटों में कैश खत्म होने की वजह से लोगों को भारी फजीहत झेलने पड़ी। कतार में खड़े होने के बावजूद भी बड़ी संख्या में लोगों को कैश नहीं मिला।
जिलेभर के बैंकों की 238 ब्रांचों में अनुमानित 50 से 60 हजार लोग हर रोज कैश के लिए आ रहे हैं। इन लोगों के लिए कैश का इंतजाम करने में बैंकों के पसीना आया हुआ है। वीरवार को भी ऐसा ही हुआ। लंच-ब्रेक तक आधा दर्जन बैंकों में कैश खत्म हो गया। यूको बैंक ने कैश की उपलब्धता के लिहाज से शुरूआती घंटों में 4500 रुपये दिए, लेकिन बाद में एक्सचेंज लिमिट घटाकर 2000 करनी पड़ी। दोपहर बाद पूरे शहर में केवल एसबीआई का एटीएम कैश दे रहा था, बाकी के शटर डाउन रहे।
कैश की किल्लत की वजह से किसी के घर में बजने वाली शहनाई की गूंज खामोशी में है तो किसी के पास दवाई के लिए पैसे नहीं है। किसी को पढाई की फीस भरनी है तो किसी के अन्य दूसरे काम पैसे के अभाव में अटके पड़े हैं।
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जिनके यहां शादी है, उन्हें आज मिलेंगे ढाई लाख
जिन परिवारों में शादी है, उनके लिए नई गाइडलाइन के मुताबिक शुक्रवार से जिले में ढाई लाख रुपये कैश मिलेगा। लीड बैंक मैनेजर कुलजीत सिंह ने बताया कि नई गाइडलाइन के अनुसार मैरिज केस को कल से ढाई लाख रुपये दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि हर रोज औसतन 50 से 60 मैरिज केस आ रहे हैं। लीड बैंक मैनेजर ने बताया कि 500 के नए नोट के कल तक यहां पहुंचने की उम्मीद है।
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कैसे निकलेंगे 50 दिन, एक -एक दिन भारी
केस -1
बहल के शंकर दमा की बीमारी से पीड़ित है। सांस की तकलीफ होने पर चिकित्सक ने कैप्सूल इनहेल करने के लिए बोल रखा है। पिछले 7 दिनों से दवाई खत्म है। 30 कैप्सूल की डिब्बी 250 रुपये की आती है। पिछले चार दिन चक्कर लगाए लेकिन बुजुर्ग होने की वजह से हर बार लाइन में पीछे धकेल दिए गए। आज नंबर आया तो बैंक से कुछ पैसे मिले। या यूं कहिए कि बैंक से पैसे नहीं मिले वरन कुछ सांस और मिली है। घर जाकर कैप्सूल लूंगा तब दमा रूकेगा और सांस ले सकूंगा।
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केस- 2
पातवान गांव के मंगलसिंह को फसलों के लिए खाद बीज की जरूरत है। बाजार में 500-1000 के नोट चल नहीं रहे हैं। इसके अलावा पैसे नहीं है। मंगल सिंह के अनुसार, इस बार फसल अच्छी है पर बिना खाद बीज के फसलों की बढवार रूकी हुई है। बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। पूरा कैश नहीं मिल पा रहा है। जितना मिलता है, उस पैसे से फसल के लिए खाद, बीज, दवाई की पूर्ति नहीं हो रही है। भगवान जाने इस बार क्या होगा।
घर का राशन खत्म, उधार भी हुई दुश्वार
केस - तीन
पिछले कई दिनों से परिवार सहित कस्बे में रहकर बाढड़ा व आसपास के गांवों में गली व मकान निर्माण कार्य में मजदूरी करने वाले जिला जोधपुर, राजस्थान निवासी जगदीश के सात सदस्यीय परिवार में पिता-पुत्र दो कमाने वाले है। पिछले तीन दिनों से वे दोनों बारी-बारी से नोट बदलवाने के लिए लाईन मे लग रहे है लेकिन उनके नोट अब तक बदली नहीं हो पाए है। श्रमिक के पास 100-50 के जो रूपये थे उनसे पिछले सप्ताह तक काम चलता रहा लेकिन रसोई का राशन समाप्त हो चुका है। प्रवासी होने के कारण उनको उधार में भी सामान नहीं मिल पा रहा है। श्रमिक परिवार को अपना पेट भरने की चिंता सताएं जा रही है।
मजदूरी छोड़ लाइन में लगा श्रमिक परिवार
केस - चार
बाढड़ा में परिवार सहित रहकर आसपास के गांवों के किसानों के खेतों में खाद डालने का कार्य करने वाले जिला नागौर, राजस्थान के प्रवासी श्रमिक तारा सिंह के पास 100-50 के नोट व राशन समाप्त हो चुका है। परिवार के दो सदस्य काम पर जाने के बजाए नोट बदलवाने के लिए लाईनों में लग रहे है। काम पर जाने वाले दो सदस्य काम के बदले नकद रुपये के स्थान पर आटा व रसोई का दूसरा सामान लेने को प्राथमिकता दे रहे है ताकि स्वयं व बच्चों का पेट तो भरा जा सके।
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