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मरीजों को देने की बजाए कचरे के ढेर में फेंके जा रहे ओआरएस पाउडर और एंटी बायटिक दवाइयां

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भिवानी। सामान्य अस्पताल में मरीजों को दिए जाने की बजाए ओआरएस घोल के पैकेट और एंटीबायोटिक दवाइयां कचरे के ढेर में फेंक आग लगाई जा रही है। ओआरएस के करीब 50 पैकेट कचरे के ढेर में पड़े है वहीं एंटीबायोटिक दवाइयों के भी दो पैकेट हैं। इनकी एक्सपायरी भी अप्रैल 2019 की है। कर्मचारियों की लापरवाही यहीं खत्म नहीं हुई। अस्पताल का बॉयोवेस्ट भी खुले में जलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इसकी जांच करवाई जाएगी।
बुधवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे शव गृह की ओर कचरे के ढेर में आग लगाई हुई थी। इसी ढेर में सामान्य अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले ओआरएस घोल के पैकेट और एंटीबायोटिक दवाइयों के पैकेट भी जल रहे थे। वहां मौजूद लोगों ने ओआरएस पैकेट और दवाइयों को जलते हुए देखा तो पहले तो समझा एक्सपायरी डेट होने के कारण जलाए जा रहे होंगे। बाद में कुछ पैकेट उठाकर देखे तो पाया कि ओरआरएस पैकेट की एक्सपायरी तिथि अप्रैल 2019 है जबकि एंटीबायोटिक अमोक्सीस्लीन कैप्सूल की एक्सपायरी फरवरी 2019 है। ओआरएस के करीब 50 पैकेट थे जबकि कैप्सूल की 10-10 के दो पैकेट थे। ऐसे में ये दवाइयां किसी मरीज के काम आ सकती थी। सरकारी दवाइयां इस तरह कचरे के ढेर में जलाने स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ी कर रही है।
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बायोवेस्ट जलाने पर भी सवाल
स्वास्थ्य विभाग प्राइवेट अस्पतालों के ओपन में बॉयोवेस्ट फेंकने और जलाने पर कार्रवाई करता है। मगर सामान्य अस्पताल परिसर में ही बायोवेस्ट ना केवल खुले में फेंका जा रहा है बल्कि आग भी लगाई जा रही है। यह मामला पहले भी उठा। इसके बावजूद खुले में बायोवेस्ट फेंका जा रहा है और जलाया भी जा रहा है। वैसे तो सामान्य कचरा जलाने पर भी प्रतिबंध है और इसके लिए चालान और जुर्माने का प्रावधान है।
ओपीडी में टपक रही छत, कीचड़ में फिसलते रहे मरीज
सामान्य अस्पताल की ओपीडी की छत पिछले दो दिन से टपक रही है। बताया जा रहा है कि हाल ही में बने डायलिसिस सेंटर के सप्लाई पाइप में समस्या आने के कारण छत टपक रही है। ओपीडी में छत से टपकते पानी के कारण फिसलन बनी रही। इस कारण यहां से गुजरने वाले मरीज भी फिसलते रहे।
चिकित्सक नहीं मिलने पर स्टाफ से उलझते रहे मरीज
सामान्य अस्पताल में चिकित्सकों की कमी भी गंभीर समस्या बनती जा रही है। 76 स्वीकृत पदों की जगह महज 22 चिकित्सक कार्यरत है। ऐसे में मरीजों को अपने इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बुधवार दोपहर एक चिकित्सक इमरजेंसी कार्य से गए तो मरीजों ने स्टाफ कर्मचारियों से झगड़ना शुरू कर दिया। कर्मचारियों और मरीजों में तीखी नोक-झोंक हुई।
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वर्जन::::
कचरा वहां डालने पर रोक लगा दी गई है। दवाइयां कचरे में फेंके जाने की सूचना नहीं है। किसी शरारती तत्व का काम हो सकता है। इसकी जांच करवाई जाएगी। छत टपकने के लिए पलम्बर को बोला गया है। कल तक ठीक हो जाएगी।
डा. रघुवीर शांडित्य, प्रधान चिकित्सा अधिकारी
सामान्य अस्पताल
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