अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी।
सामान्य अस्पताल में आने वाले मरीजों को एक बार फिर राहत की बजाय परेशानी मिली। अल्ट्रासाउंड और सीबीसी (कंप्लीट ब्लड काउंट) मशीन में आई खराबी की वजह से दिनभर मरीज परेशान हुए। अस्पताल की अल्ट्रासाउंड मशीन शुक्रवार को जवाब दे गई। नतीजतन करीब 250 मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए भटकते रहे। सीबीसी मशीन की खराबी के कारण मरीजों को बिना टेस्ट कराए घर लौटना पड़ा तो कुछ प्राइवेट सेंटरों पर पहुंचे।
सामान्य अस्पताल में फिजिशियन और स्त्री रोग विभाग में सबसे ज्यादा मरीज आते हैं। स्त्री रोग विभाग में औसतन 300 तक महिला मरीज आती हैं। स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं, जच्चा-बच्चा को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा करता है। मगर, सामान्य अस्पताल में गर्भवती महिलाएं ही परेशान नजर आईं। परेशानी का मुख्य कारण रहा अल्ट्रासाउंड मशीन। सामान्य अस्पताल की नई अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले लंबे समय से खराब है। पुरानी मशीन से ही अब तक काम चलाया जा रहा था। पिछले तीन दिन से पुरानी मशीन में भी समस्या आ रही थी। शुक्रवार सुबह मशीन तो चली ही नहीं। इस कारण नोटिस चस्पा दिया गया कि आज अल्ट्रासाउंड नहीं होंगे। मशीन में खराबी है। मशीन को ठीक करवाने के लिए कंपनी से प्रतिनिधि भी बुलाया गया मगर दोपहर बाद तक भी मशीन ठीक नहीं हो पाई थी।
कंप्लीट ब्लड काउंट मशीन लंबे समय से खराब
डेंगू मरीजों की जांच के लिए प्लेटलेटस की जानकारी होना जरूरी है। यदि सामान्य अस्पताल की मुख्य लैब की कंप्लीट ब्लड काउंट मशीन ही खराब है। मशीन पिछले करीब तीन-चार महीने से खराब है। मशीन से अनेक तरह के टेस्ट होते है मगर अब सब ठप है। ऐसे में मशीन खराब होने की सूचना पर चिकित्सकों ने ये टेस्ट लिखने ही बंद कर दिए है। बहुत ज्यादा जरूरी हों वे टेस्ट ब्लड बैंक में हाल ही में आई नई सीबीसी मशीन से करने पड़ रहे है। ब्लड बैंक में भी काम का दबाव रहता है।
भटकते रहे मरीज, जेब की ढीली
अल्ट्रासाउंड सेंटर में औसतन हर रोज 200 से अधिक अल्ट्रासाउंड होते हैं। ज्यादातर अल्ट्रासाउंड गर्भवती महिलाओं के होते हैं। शुक्रवार को भी मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए भटकते रहे और वहां लगे नोटिस की मशीन खराब हैं, पढ़कर निराश ही लौटते रहे। कर्मचारियों से भी अल्ट्रासाउंड मशीन के बारे में जानकारी लेने का प्रयास करते रहे। आखिरकार निराश ही लौटे। कुछ ने प्राइवेट सेंटरों पर अल्ट्रासाउंड करवाये और जेब ढीली की। अस्पताल में जो अल्ट्रासाउंड टेस्ट नि:शुल्क होते हैं, प्राइवेट सेंटर संचालक उनके लिए 300 से छह सौ रुपये तक का शुल्क वसूलते है।
बेटा दर्द से तड़प रहा है और मशीन खराब है
बेटे को एपेंडिक्स की समस्या बताई थी। अब बेटे को दर्द है और चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड बताया है। तीन दिन से यहां के चक्कर लगा रहे है। लगता है प्राइवेट में ही करवाना पड़ेगा।
शकुंतला, खरक गांव
सुबह से खाली पेट कर रही हूं इंतजार
चिकित्सक को दिखाया था। अल्ट्रासाउंड के कारण सुबह खाली पेट आए। अक्सर अल्ट्रासाउंड करने वाला चिकित्सक दोपहर में आते हैं। अब बता रहे है कि मशीन ही खराब है।
बिमला, कालुवास गांव
बेटी की बच्चेेदानी में समस्या है। चिकित्सक ने जांच के बाद अब अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा है। यहां मशीन ही खराब है। कब ठीक होगी ये भी कोई नहीं बता रहा।
संतोष, महिला
बैंक कॉलोनी
अल्ट्रासाउंड मशीन नहीं चल रही है। शायद सॉफ्टवेयर में खराबी आ गई। कंपनी से इंजीनियर को बुलाया गया है। मशीन ठीक होने के बाद ही अल्ट्रासाउंड हो सकेंगे।
डॉ. अनिल शर्मा, इंचार्ज
अल्ट्रासाउंड सेंटर