रोडवेज कर्मचारियों का धरना, चार घंटे परेशान रहे यात्री
भिवानी। प्रदेश भर के 8200 चालक-परिचालकों की नियुक्ति तिथि से पक्का न करने और इन्हें कच्चा करने के सरकार के पत्र के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों ने चार घंटे धरना दिया। इस दौरान सवारी परेशान रही। बस के इंतजार में लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा। इस दौरान बाहर से बसों का आना लगभग बंद रहा और यहां से जाने वाली लगभग सभी बसें देरी से रवाना हुई।
शुक्रवार सुबह 11 बजे से पहले परिवहन सेवा सुचारू रही, लेकिन जैसे ही रोडवेज कर्मचारियों ने अपना धरना शुरू किया, वैसे ही परिवहन सेवा लड़खड़ाने लगी। बाहर से आने वाली बसों की संख्या घटती गई और बस अड्डा परिसर में सवारियों की तादाद बढ़ती चली गई। एक बजे से लेकर तीन बजे तक बस अड्डा परिसर सवारियों से खचाखच भर गया। लगभग हर बूथ पर भीड़ का आलम रहा। दिल्ली जाने वाले योगेश ने बताया कि बस के लिए घंटेभर से इंतजार कर रहा है, लेकिन बस नहीं आई।
रोडवेज महाप्रबंधक बलवंत सिंह ने बताया कि कर्मचारियों के धरने की वजह से आज बस अड्डे पर भारी भीड़ रही। बाहर के जिलों से आने वाली बसों की संख्या कम रही और यहां से रवाना होने वाली बसें भी देरी से चलीं, इस वजह से सवारियों का असुविधा हुई। लोकल और लंबे रुट्स प्रभावित रहे।
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सरकार पर बरसे रोडवेज कर्मचारी
भिवानी। हरियाणा रोडवेज संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर रोङवेज कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर चार घंटे का धरना देकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रोडवेज कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो दो दिसंबर को रोहतक में बड़ा फैसला लिया जाएगा शुक्रवार सुबह 11 बजे शुरू हुए एक दिवसीय धरने की अध्यक्षता डिपो प्रधान हरज्ञान घणघस व राजकुमार दलाल ने की और संचालन सचिव राजेश शर्मा व रणबीर गोरिया ने किया।
समिति के वरिष्ठ सदस्य नरेंद्र दिनोद व ओमप्रकाश ग्रेवाल ने बताया कि सरकार ने 20 नवंबर को पत्र जारी किया है जिसमें लिखा है कि 8200 चालक-परिचालकों की नियुक्ति तिथि से पक्का न करके इनको कच्चे समझा जाए और मिलने वाले तमाम भत्तों में कटौती जारी करने के आदेश किए हैं। कर्मचारी नेता राजकुमार दलाल ने बताया कि जब भी रोडवेज कर्मचारी आंदोलन करते हैं तो सरकार टेबल पर बातचीत बहुत बढ़िया करती है, लेकिन दूसरे ही दिन कर्मचारी विरोधी फैसले लागू कर देती है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि भाजपा दुनिया में पहली ऐसी सरकार है जो पक्के कर्मचारियों को कच्चा करने का काम कर रही है। जबकि चुनाव घोषणा पत्र में वादा किया था सभी कच्चे कर्मचारियों को पक्का किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए दूसरे प्रदेशों में जारी सेवा बंद कर रही है। उन्होने चेतावनी दी कि दो दिसंबर को रोहतक में बैठक कर बड़ा फैसला लिया जाएगा और अपनी मांगे मनवाने के लिए हर कर्मचारी अपना बलिदान देने को तैयार रहेगा। इस मौके पर जगदीश सांगवान, जयबीर घणघस, पवन शर्मा, ईशवर तालू, प्रेम, रमेश मान, अजमेर, जयसिंह तालू, सत्यवान सोनू, धर्मेन्द्र, जोगेंद्र शर्मा, नरेश, प्रदीप, धर्मबीर चांग, संजय सांगवान, चैनबीर सर्व कर्मचारी के प्रधान, रामफल देसवाल, कामरेड ओमप्रकाश आदि कर्मचारी नेताओ ंने अपने विचार रखे।
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ये हैं कर्मचारियों की मुख्य मांग
- सरकार प्राइवेट पॉलिसी को वापस ले।
- परिवहन बेड़े में 10000 नई बसें शामिल हों।
- चालक-परिचालक व कर्मशाला क्लर्क के स्टाफ की तुरंत पक्की भर्ती की जाए।
- रोडवेज कर्मचारियों को जोखिम भत्ता दिया जाए।
- कैशलेस मेडिकल सुविधा दी जाए।