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महापंचायत के दबाव के आगे झुका बिजली महकमा

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महापंचायत के आगे झुका बिजली विभाग
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बहल। बिजली संबंधी तथा अन्य मांगों को लेकर भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में रखी गई अधिकतर मांगों का अधिकारियों ने समाधान का आश्वासन दिया। बिजली, पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर आकर किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी सभी जायज मांगों पर विचार किया जाएगा तथा उनको जल्दी पूरा किया जाएगा। पंचायत में प्रदेशभर से जुटे लोगों ने किसान और खेती को बचाने के लिए किसान आयोग के गठन की मांग जोर शोर से उठाई।
प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से किसान सोमवार को बिजली घर परिसर में आयोजित महापंचायत में शामिल हुए। इस मौके पर किसानों ने बिजली, किसान एवं खेती से जुड़ी 11 सूत्रीय मांगपत्र रखा। किसान नेताओं ने कहा कि जब तक बिजली निगम एवं प्रशासन के अधिकारी मौके पर आकर समस्याओं के बारे में कोई ठोस आश्वासन नहीं देते हैं, तब तक धरना जारी रहेगा।
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इस पर बिजली निगम के सब अर्बन भिवानी के एक्सईएन संजय रंगा, डीएसपी संजय बिश्नोई तथा तहसीलदार जगदीश चंद्र बारी-बारी से मौके पर आए तथा किसानों को उनकी समस्याओं के लिए समाधान का आश्वासन दिया। बिजली निगम के अधिकारियों ने मुख्य मांगों के लिए 15 दिन में समाधान की बात कही जबकि कुछ पॉलिसी मैटर की मांगों को सरकार के अनुशंसा के लिए भेजने का आश्वासन दिया। वहीं, नायब तहसीलदार ने किसानों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की एसडीएम लोहारू से बातचीत करवाकर समाधान का आश्वासन दिया। डीएसपी ने किसान नेताओं पर दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। पंचायत की अध्यक्षता कैप्टन सोहनलाल ने की।

इस मौके पर नेताओं ने कहा कि खेती और किसानों की अनदेखी के कारण कृषि दिन-प्रतिदिन घाटे का सौदा बनती जा रही है। स्थिति यूं ही चली तो वह दिन दूर नहीं जब इस कृषि प्रधान भारत देश की अर्थव्यवस्था डगमगाती नजर आएगी। उन्होंने कहा कि अगर खेती नहीं बचेगी, तो देश नहीं बचेगा।

भीड़ को देख बंद किया कार्यालय
किसानों का बिजली घर में जमावड़ा देखकर बिजली निगम के हाथ पांव फूल गए। निगम ने अपने सभी कार्यालयों को बंद करवा दिया। वहीं, बिजली बिलों की 20 नवंबर को आखिरी तिथि होने के कारण उपभोक्ता कार्यालय में बिल भरने आए लेकिन उनको कार्यालय बंद मिला। उपभोक्ताओं को बिजली निगम के एक्सईएन संजय रंगा ने आश्वासन दिया कि जिन उपभोक्ताओं के बिलों की अंतिम तिथि 20 नवंबर है, वे अगर 21 नवंबर को बिल अदा करेंगे तो भी उनको सरचार्ज नहीं लगेगा।
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कई बार बनी स्थिति तनावपूर्ण
भाकियू के नेतृत्व में चली पंचायत में कई बार ऐसी स्थिति बनी, जिससे हालात बिगड़ सकते थे। शुरू से ही किसान नेताओं ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी कि अगर अधिकारी मौके पर नहीं आए तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। करीब एक बजे किसान नेताओं ने फिर से दोहराया कि वे आधे घंटे का समय देते हैं, अगर इस अवधि में प्रशासन एवं निगम के अधिकारी नहीं आए तो व्यवस्था खराब हो सकती है। प्रशासन ने सूझबूझ से काम लिया और बारी बारी से निगम, पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी किसानों के बीच आते गए।
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इन मांगों पर बनी सहमति
- बढ़े बिजली बिलों को 15 दिनों में सही किया जाएगा। बिलों को पिछले 12 साइकिल के हिसाब से एवरेज निकाल कर दुरुस्त किया जाएगा।
- बिजली लाइनों को तीन महीने में दुरुस्त कर दिया जाएगा।
- ट्रांसफार्मर को लाने, ले जाने के लिए निगम द्वारा गाड़ी उपलब्ध करवाई जाएगी।
- बिजली चोरी पकड़ने से पहले किसानों को नोटिस दिया जाएगा।
- घरेलू मीटर को जलने की स्थिति में लैब नहीं भेजा जाएगा।
- ट्रांसफार्मर जल जाने पर उसे 48 घंटे में बदला जाएगा।
- घरेलू मीटर के जलने पर केवल 550 रुपये की रसीद काटी जाएगी।
पंचायत में ये रहे मौजूद
पंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला, प्रदेशाध्यक्ष रतन मान, प्रदेश सचिव सुरेश दहिया, श्यामसिंह, हिसार के जिला प्रधान प्रदीप मिर्चपुर, जींद के जिला प्रधान छाजूराम कंडेला, भिवानी जिला प्रधान मेवा सिंह आर्य, बहल जोन प्रधान रवि आजाद, मंगल सिंह, ढिग़ावा जोन प्रधान आजाद सिंह भूंगला, महाबीर सहारण, महाबीर सांगवान, धर्मपाल बारवास, दयानंद नेहरा, मंदरूप, नौबत नंबरदार, धर्मबीर सरल, सुरेन्द्र छपारिया, जगबीर, मीरसिंह जेवली, भूप सिंह दलाल, बलवंत खरखड़ी आदि मौजूद रहे।
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