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प्रमाण-पत्र के लिए परेशान हुए दिव्यांग

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अमर उजाला ब्यूरो
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भिवानी।
विकलांगता प्रमाण-पत्र के लिए बुधवार को जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में दिव्यांग व उनके परिजन पहुंचे। प्रमाण-पत्र की कागजी कार्यवाही के लिए दिव्यांग और उनके परिजन जद्दोजहद करते दिखे। दोपहर को काम नहीं हुआ तो कई दिव्यांग उखड़ गए और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों पर बार-बार चक्कर लगवाने का आरोप लगाया। कई ने बताया कि वे महीनों से चक्कर काट रहे हैं, लेकिन काम नहीं हो रहा है।
दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार का दिन मुकर्रर कर रखा है। आज प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। बहुत कम ऐसे लोग होंगे, जो अपना प्रमाण-पत्र बनवा पाए। बार-बार चक्कर से नाराज होकर दिव्यांग और उनके अभिभावकों ने विभागीय टीम पर कागजी कार्यवाही में उलझाने का आरोप भी लगाया।
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खरक गांव के भगवंत और रोढां गांव के कुलदीप ने बताया कि वे लोग प्रमाण-पत्र के लिए कई साल से यहां चक्कर लगा रहे हैं। कभी कुछ तो कभी कुछ कह कर उन्हें टाल दिया जा रहा है। लोगों ने बताया कि कागजों की कमी के बारे में उन्हें एक बार अवगत नहीं कराया जाता। एक-एक करके कमी बताई जाती है, इसलिए लगातार चक्कर पर चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
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केस : एक
खरक गांव के बुजुर्ग भगवंत सिंह का 2005 में सड़क हादसे में पेट का हिस्सा और पैर गंवा चुका है। कुछ साल तो इलाज और स्वस्थ होने में गुजर गए। इसके बाद उसने विकलांगता प्रमाण-पत्र के लिए आवेदन किया। कई वर्ष बीत गए, लेकिन आज तक प्रमाण-पत्र नहीं बना। भगवंत ने बताया कि वह करीब 10 साल से चक्कर काट रहा है।
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केस दो
रोढां गांव के राजेंद्र सिंह अपनी दिव्यांग बेटी के प्रमाण-पत्र के लिए वह तीन महीनों से चक्कर पर चक्कर काट रहे हैं। पिछले बुधवार को टेस्ट कराया और आज कहा, जो टेस्ट रोहतक कराया था, उसके कागज लेकर आओ। कागज उनके पास हैं नहीं, अब कहां से लेकर आएं। समझ में नहीं आ रहा कि इतने चक्कर क्यों कटवाए जा रहे हैं। हर बार छोटी-छोटी त्रुटि बताकर उसे टरकाया जा रहा है। चक्कर काटकर वह और उसकी बेटी परेशान हो गए हैं।


केस : तीन
रोढां गांव की पूजा की तरह ही उसका चचेरा भाई कुलदीप भी प्रमाण-पत्र के लिए भटक रहा है। कुलदीप के चाचा राजेंद्र ने बताया कि कुलदीप और उसकी मां प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए वर्षों से चक्कर काट रहे हैं। हर बार 50 किलोमीटर की दूरी नाप कर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन विभाग प्रमाण-पत्र बनाने को तैयार नहीं है।
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प्रमाण-पत्र में अनावश्यक देरी का सवाल ही नहीं उठता। विकलांगता की प्रतिशतता ज्यादा से ज्यादा चाहने वालों को शिकायत हो सकती है। कुछ लोग विभाग पर दबाव बनाने के लिए देरी का आरोप लगाते हैं। जबकि, चार एक्सपर्ट चिकित्सकों की टीम पूरी पड़ताल के बाद ही प्रमाण-पत्र बनाती है। जो प्रमाण-पत्र के लिए पात्र हैं, उनका तुरंत प्रमाण-पत्र बनाया जा रहा है।
डॉ. रघवीर शांडिल्य
पीएमओ, जिला अस्पताल
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