भिवानी। रोडवेज कर्मचारियों और प्रशासन के बीच 12 दिनों चल रही लड़ाई अब सोशल मीडिया पर पहुंच गई हैं। हड़ताली कर्मचारियों ने अपने आंदोलन में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने के लिए व्हाट्सऐप के विभिन्न ग्रुपों में रोडवेज को बचाने के लिए एकजुट होने की अपील कर रहे हैं। यहीं नहीं अनेक ग्रुपों में रोडवेज बसों के खतरनाक हादसों की भी वीडियो चल रही है। जिन्हें देखने के बाद लोग अब रोडवेज बसों में यात्रा करने से हिचक रहे है। हालांकि जांच की तो ज्यादातर वीडियो पुरानी मिली। इन सबके बावजूद रविवार को करीब 66 बसें विभिन्न रूटों पर दौड़ती नजर आई।
रोडवेज हड़ताल में शामिल लगभग सभी कर्मचारी संगठनों, विभागों के कर्मचारियों ने अपने-अपने व्हाट्सऐप ग्रुप बना रखे है। ऐसे में अब रोडवेज कर्मचारियों के समर्थन में हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जोड़ना शुरू कर दिया है। सभी ग्रुपों में 720 बसों से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा रहा है। साथ ही यह बताया जा रहा है कि प्राइवेट बसों के भुगतान की जो राशि होगी उससे रोडवेज की कितनी बसें खरीदी जा सकती है। साथ ही रोडवेज बसों के भीषण हादसों की वीडियो भी खूब चल रही है। जिनके साथ मैसेज टैग किया जा रहा है कि अनुभव हीन चालकों की वजह से ये हादसे हो रहे हैं। इन्हें देखने के बाद लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है कि ये कब और कहां हुआ। जब इन वीडियो की जांच की तो पाया कि पिछले साल की है। लेकिन लोग रोडवेज बसों से आवागमन में कतरा रहे हैं। वहीं प्राइवेट बसे ठसाठस चल रही है तो रोडवेज बसों में बेहद कम यात्री नजर आ रहे है।
कर्मचारी नेता हुए भूमिगत, फोन स्विच ऑफ
रोडवेज के कर्मचारी नेता भूमिगत हो गए है। उनके फोन भी स्विच ऑफ चल रहे है। इसके पीछे अलग अलग तर्क दिया जा रह है। कुछ का कहना है कि पुलिस की उन पर नजर है और आंदोलन को जारी रखने के लिए वे भूमिगत हुए है। वहीं फोन स्विच ऑफ करने के लिए पीछे तर्क दिया जा रहा है कि उनके फोन ट्रेस किए जा रहे है।
66 बसें दौड़ी, यात्रियों को मिली पूरी सुविधा
रोडवेज प्रबंधन की चालकों की भर्ती और होम गार्ड के जवानों को कंडक्टर बनाने की योजना काम कर गई है। दिनभर में 66 बसें विभिन्न रूटों पर चली। रोडवेज के पास ठेके पर भर्ती किए गए 80 चालक और 80 कंडक्टर है।
720 प्राइवेट बसों को परमिट देने के विरोध में रोडवेज कर्मचारी हड़ताल पर है और उनके समर्थन में विभिन्न संगठन आंदोलन कर रहे है। वे व्हाट्सऐप ग्रुपों के माध्यम से भी लोगों को जोड़ रहे है। हादसों की वीडियो भी चल रही है। नए चालकों ने प्रदेशभर में तीन-चार हादसे किए है। हमारे साथी कर्मचारी नेता ने भी चालक द्वारा सही से बस नहीं चलाने पर बस से उतरना ठीक समझा।
कामरेड ओमप्रकाश, कर्मचारी नेता